समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के उत्तराखंड के लोगों को लेकर दिए गए कथित घुसपैठिए वाले बयान पर विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब हल्द्वानी की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में अखिलेश यादव को उत्तराखंड का जमाई बताते हुए उनसे ससुराल वालों से माफी मांगने की बात कही। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। ज्योति अधिकारी ने कुमाऊंनी और हिंदी में अपनी बात रखते हुए कहा कि अखिलेश यादव उनके जमाई हैं और अगर उनसे कुछ गलती हो गई है तो उन्हें समझाया जाएगा। उन्होंने हंसते हुए कहा कि हमारी बेटी से कुछ गड़बड़ हो गई क्या, अब जमाई को अपने पास बुलाकर समझा देंगे। इस तरह उन्होंने राजनीतिक विवाद पर पारिवारिक रिश्ते का उदाहरण देकर तंज कसा और अखिलेश यादव से उत्तराखंड के लोगों से माफी मांगने को कहा।
दरअसल, विवाद उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों के सवाल पर उत्तराखंड के लोगों का जिक्र किया था। इस टिप्पणी को उत्तराखंड के लोगों के अपमान के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं समेत कई लोगों ने विरोध जताया और अखिलेश यादव से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस बयान पर आपत्ति जताई। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी की ओर से सफाई दी गई कि अखिलेश यादव की टिप्पणी उत्तराखंड के सभी लोगों के लिए नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के संदर्भ में थी।
ज्योति अधिकारी ने इस पूरे मामले में उत्तराखंड के विपक्षी नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दूसरे मुद्दों पर विरोध जताने वाले नेताओं को इस मामले में भी अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उनके वीडियो में मौजूद अन्य लोग भी बातचीत के दौरान मजाकिया अंदाज में नजर आए। ज्योति ने कहा कि जब तक अखिलेश यादव अपने बयान को लेकर माफी नहीं मांगते, तब तक विरोध जारी रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में चल रही बहस को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा और तेज हो गई है।
अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव का संबंध भी उत्तराखंड से है। इसी पारिवारिक रिश्ते का जिक्र करते हुए ज्योति अधिकारी ने उन्हें उत्तराखंड का जमाई कहा और व्यंग्यात्मक लहजे में माफी मांगने की सलाह दी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी, राज्यों के लोगों के सम्मान और सार्वजनिक मंचों पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर बहस छेड़ दी है।









