झारखंड सरकार ने गोड्डा जिले में 51.49 करोड़ रुपये की लागत से पशु आहार कारखाना लगाने की मंजूरी दी है। महागामा के गोविंदपुर में बनने वाले इस प्लांट से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर संतुलित आहार मिलेगा और डेयरी कारोबार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
गोड्डा: झारखंड के पशुपालकों के लिए राहत की खबर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में महागामा प्रखंड के गोविंदपुर में आधुनिक पशु आहार कारखाना स्थापित करने का प्रस्ताव मंजूर हो गया। इस परियोजना पर 51 करोड़ 49 लाख रुपये खर्च होंगे। कारखाने की शुरुआती क्षमता रोजाना 50 मीट्रिक टन पशु आहार तैयार करने की होगी। सरकार ने इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली है।
गोविंदपुर में 5.22 एकड़ जमीन पर बनेगा कारखान
गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड में पशु आहार उत्पादन की नई इकाई लगाने की तैयारी है। इसके लिए गोविंदपुर मौजा में 5.22 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। परियोजना की जिम्मेदारी झारखंड मिल्क फेडरेशन (JMF) को सौंपी गई है।
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कारखाने की स्थापना से स्थानीय पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए संतुलित आहार खरीदने का नया विकल्प मिलेगा। अभी कई पशुपालकों को दूसरे क्षेत्रों से आने वाले पशु आहार पर निर्भर रहना पड़ता है।
बाहर से आहार मंगाने में परिवहन का खर्च जुड़ता है। कई बार आपूर्ति में परेशानी होने पर पशुपालकों को जरूरत के मुताबिक आहार नहीं मिल पाता। स्थानीय उत्पादन शुरू होने से ऐसी दिक्कतें कम होने की उम्मीद है।
पहले रोज 50 टन पशु आहार बनेगा
प्रस्तावित कारखाने में शुरुआत में प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन पशु आहार बनाने की क्षमता विकसित की जाएगी। आगे जरूरत और मांग बढ़ने पर इसे 100 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंचाने की योजना है।
इससे गोड्डा के अलावा आसपास के जिलों में भी पशु आहार की आपूर्ति बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि, कारखाने में उत्पादन कब शुरू होगा, इसकी कोई निश्चित तारीख अभी सामने नहीं आई है।
परियोजना राज्य सरकार की दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी योजना के अंतर्गत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र के लिए जरूरी सुविधाओं का विस्तार करना है।
2026-27 में खर्च होंगे 30 करोड़ रुपये
राज्य मंत्रिमंडल ने कारखाने के लिए कुल 51.49 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 में 30 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी भी मिली है।
परियोजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 की राज्य योजना में शामिल किया गया है। स्वीकृति मिलने के बाद अब इसके निर्माण और आगे की प्रक्रियाओं पर काम किया जा सकेगा।
महागामा की विधायक और ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह इस परियोजना के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। स्थानीय किसानों और पशुपालकों की ओर से भी लंबे समय से कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई जा रही थी।
पशुपालकों का खर्च कम होने की उम्मीद
पशुपालन में दुधारू पशुओं के खानपान पर नियमित खर्च होता है। अच्छी गुणवत्ता वाला संतुलित आहार पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए जरूरी माना जाता है।
गोड्डा में कारखाना शुरू होने के बाद पशुपालकों को नजदीक से पशु आहार खरीदने की सुविधा मिल सकती है। इससे माल ढुलाई पर होने वाला खर्च घटने की संभावना है।
हालांकि, पशुपालकों को वास्तविक बचत कितनी होगी, यह कारखाने में तैयार आहार की कीमत और उसकी उपलब्धता पर निर्भर करेगा। सरकार की ओर से फिलहाल पशु आहार की बिक्री दर घोषित नहीं की गई है।
डेयरी कारोबार को भी मिल सकता है बढ़ावा
गोड्डा और महागामा के कई ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। दूध की बिक्री उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का एक जरिया है।
ऐसे परिवारों को नियमित रूप से पौष्टिक आहार मिलने पर पशुओं की देखभाल आसान हो सकती है। इससे दूध उत्पादन में सुधार और डेयरी गतिविधियों के विस्तार की उम्मीद की जा रही है।
कारखाने के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है। हालांकि, इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की गई है।
फिलहाल परियोजना को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। अब निर्माण शुरू होने और कारखाने को चालू करने की समयसीमा पर नजर रहेगी।
परियोजना से जुड़ी सरकारी घोषणाओं और आगे की जानकारी के लिए पाठक झारखंड सरकार के कैबिनेट निर्णय पोर्टल पर अपडेट देख सकते हैं।








