चक्रवात अर्नब के खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने 30 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। छह जिलों में अत्यधिक बारिश का रेड अलर्ट जारी है। प्रशासन ने 2,037 आश्रय स्थल और 313 बचाव दल तैयार रखे हैं।
भुवनेश्वर: बंगाल की खाड़ी से उठा भीषण चक्रवाती तूफान अर्नब बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार कर गया। इसके बाद तूफान की तीव्रता कम हुई है, लेकिन दक्षिणी ओडिशा में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बना हुआ है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकाला जा रहा है। प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मलकानगिरी में सबसे अधिक असर की आशंका
मंत्री सुरेश पुजारी के मुताबिक, चक्रवात का असर ओडिशा के सभी दक्षिणी जिलों में देखने को मिल सकता है। इनमें मलकानगिरी सबसे अधिक प्रभावित होने वाला जिला हो सकता है। सरकार ने गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट, मलकानगिरी और नबरंगपुर जिलों पर विशेष ध्यान दिया है।
इन क्षेत्रों में निचले इलाकों और भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों से लोगों को निकाला जा रहा है। जिला प्रशासन को राहत शिविरों में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कालाहांडी, कंधमाल और नुआपड़ा जिलों में भी अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है।
30 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे
ओडिशा सरकार के अनुसार, बुधवार तक 30 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा चुका है। राज्यभर में 2,037 चक्रवात आश्रय स्थल तैयार रखे गए हैं। इनमें भोजन, पीने के पानी और दूसरी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
सरकार ने एहतियात के तौर पर राज्य के 30 में से 16 जिलों में बुधवार को स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया। प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
आंध्र प्रदेश तट पार करते समय 135 किमी की रफ्तार से चली हवाएं
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, चक्रवात अर्नब ने बुधवार तड़के दो बजे से सुबह आठ बजे के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तट को पार किया। इस दौरान हवा की अधिकतम लगातार गति 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटा रही। कुछ समय के लिए हवा के झोंके 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचे।
सुबह 8:30 बजे चक्रवात की तीव्रता घटकर गंभीर चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आ गई। इसके बाद हवा की गति करीब 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान के आगे बढ़ने के साथ इसकी ताकत में और कमी आने का अनुमान है।
छह जिलों में अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट
मौसम विभाग ने मलकानगिरी, कोरापुट, नबरंगपुर, रायगड़ा, गजपति और कालाहांडी जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश से भूस्खलन का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे स्थानों पर लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। बरगढ़, सुबर्णपुर, बौध, नुआपाड़ा, बलांगीर, कंधमाल, पुरी, खुर्दा और नयागढ़ जिलों में भी भारी बारिश का अनुमान है।
भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती के अनुसार, तूफान के प्रभाव से कुछ इलाकों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। हवा के झोंके 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
313 राहत और बचाव टीमों की तैनाती
आपदा प्रबंधन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में कुल 313 बचाव टीमें तैनात की हैं। इनमें ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 60 टीमें, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की नौ टीमें और अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की 244 टीमें शामिल हैं।
बचाव दलों को उन स्थानों पर भेजा गया है, जहां भारी बारिश, जलभराव या रास्ते बंद होने की आशंका अधिक है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने के लिए उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराए हैं।
19 हजार से ज्यादा मछली पकड़ने वाली नावें लौटीं
समुद्र में खराब मौसम को देखते हुए मछुआरों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर लौटने के निर्देश दिए गए थे। सरकार के मुताबिक, राज्य की सभी 19,143 मछली पकड़ने वाली नावें तट पर लौट चुकी हैं।
भूस्खलन की आशंका वाले कुछ पहाड़ी रास्तों पर एहतियात के तौर पर यातायात भी रोका गया है। प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन बुधवार सुबह तक किसी बड़ी जनहानि या व्यापक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई थी।
छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ सकता है तूफान
आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात अगले 48 घंटों में उत्तर-उत्तर पश्चिम दिशा में आगे बढ़ सकता है। इसके दक्षिणी ओडिशा के कुछ हिस्सों से गुजरते हुए छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, जमीन पर आगे बढ़ने के दौरान इसकी तीव्रता लगातार कम होने की संभावना है। मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य जनहानि को पूरी तरह रोकना है। इसके लिए प्रशासन को पहले से सतर्क किया गया है।










