असम में बाल विवाह के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 537 लोग गिरफ्तार, 460 मामले दर्ज

असम में बाल विवाह के खिलाफ पुलिस का अभियान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के ताजा अपडेट के अनुसार 537 गिरफ्तारियां हुई है और 460 मामल दर्ज किए गए।

असम में बाल विवाह के खिलाफ चल रहे पुलिस अभियान में गिरफ्तारियों का आंकड़ा 537 पहुंच गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, राज्य में 460 मामले दर्ज हुए हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह रोकने के लिए कार्रवाई जारी रहेगी।

गुवाहाटी: असम में कम उम्र में लड़कियों और लड़कों की शादी कराने के मामलों पर पुलिस की सख्ती बढ़ गई है। राज्य सरकार के निर्देश पर अलग-अलग जिलों में संदिग्ध मामलों की जांच की जा रही है। पुलिस उन लोगों की पहचान कर रही है जिन पर नाबालिगों की शादी कराने, उसका आयोजन करने या इसमें सहयोग देने का आरोप है। सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य बाल विवाह जैसी गैरकानूनी प्रथा को रोकना और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा करना है।

मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने जारी किए गिरफ्तारी के आंकड़े

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पुलिस कार्रवाई की जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि शाम पांच बजे तक राज्य में 524 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जबकि 441 मामले दर्ज हुए थे।

इसके बाद बुधवार को जारी एक अन्य अपडेट में गिरफ्तारियों की संख्या 537 और दर्ज मामलों की संख्या 460 बताई गई। सरमा ने कहा कि उनकी सरकार बाल विवाह के खिलाफ अभियान बंद नहीं करेगी। उनका कहना है कि असम को इस प्रथा से मुक्त करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

नवंबर से पहले ही शुरू हुआ अभियान

मुख्यमंत्री ने पहले संकेत दिया था कि नवंबर में बाल विवाह के खिलाफ एक और बड़ा पुलिस अभियान चलाया जाएगा। हालांकि, राज्य में कार्रवाई तय समय से पहले ही शुरू हो गई। पुलिस ने अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में कई जिलों में जांच और गिरफ्तारियां तेज कर दीं।

सरकार के अनुसार, अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज शिकायतों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस संदिग्ध मामलों की जांच के साथ यह भी पता लगा रही है कि विवाह कराने में किन लोगों की भूमिका रही थी।

धुबरी जिले में बड़ी संख्या में लोग हिरासत में

इस अभियान के दौरान धुबरी जिला पुलिस की कार्रवाई भी चर्चा में रही। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों से 63 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इनमें बाल विवाह कराने के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के साथ कुछ माता-पिता और अभिभावक भी शामिल बताए गए।

धुबरी सदर, गौरीपुर, गोलकगंज, बिलासीपारा और अन्य थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की गई। पुलिस की जांच में संबंधित लोगों की भूमिका और उपलब्ध सबूतों की पड़ताल की जा रही है। हिरासत में लिया जाना या गिरफ्तार होना अपने आप में किसी व्यक्ति का दोष साबित नहीं करता।

कई अन्य जिलों में भी चल रही कार्रवाई

धुबरी के अलावा गोलपाड़ा, दरांग, सोनितपुर, मोरीगांव और कामरूप सहित कई जिलों में पुलिस अभियान चलने की जानकारी सामने आई है। गोलपाड़ा में भी बड़ी संख्या में लोगों को पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए पकड़े जाने की खबर है।

राज्य सरकार ने संबंधित पुलिस इकाइयों को कानून के अनुसार मामलों की जांच करने और आगे की कार्रवाई करने को कहा है। अलग-अलग जिलों में जांच जारी रहने के कारण गिरफ्तारियों और दर्ज मामलों के आंकड़े बदल सकते हैं।

बाल विवाह को लेकर भारत में क्या कानून है?

भारत में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। इसके तहत सामान्य कानूनी परिभाषा में लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल और लड़के की 21 साल है। कानून बाल विवाह कराने, उसे बढ़ावा देने और उसका आयोजन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान करता है।

मामले की परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। यदि किसी बच्चे के खिलाफ यौन अपराध का मामला सामने आता है, तो पॉक्सो कानून के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, हर मामले में कौन-सी धाराएं लागू होंगी, यह संबंधित तथ्यों और जांच पर निर्भर करता है।

असम में पहले भी चला है बड़ा अभियान

असम सरकार ने फरवरी 2023 में बाल विवाह के खिलाफ व्यापक पुलिस कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद अक्टूबर 2023 और दिसंबर 2024 में भी विशेष अभियान चलाए गए। इन कार्रवाइयों के दौरान बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई थीं। राज्य सरकार का दावा है कि लगातार पुलिस कार्रवाई और जागरूकता अभियानों से बाल विवाह के मामलों को कम करने में मदद मिली है।

हालांकि, किसी अभियान के वास्तविक प्रभाव का आकलन करने के लिए केवल गिरफ्तारियों की संख्या पर्याप्त नहीं होती। विवाह की उम्र, लड़कियों की शिक्षा और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं।

बाल विवाह से बच्चों को क्या नुकसान होता है?

कम उम्र में शादी होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। खासकर लड़कियों को समय से पहले स्कूल छोड़ने, आर्थिक निर्भरता और स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कम उम्र में गर्भधारण से भी स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। इसी कारण बाल विवाह रोकने के लिए कानूनी कार्रवाई के साथ परिवारों में जागरूकता, बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंद परिवारों को सहायता देना भी जरूरी माना जाता है।

आगे भी जारी रहेगा पुलिस अभियान

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि बाल विवाह के खिलाफ सरकार की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस दर्ज मामलों में सबूत जुटाने और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है। संबंधित मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालतों में चलेगी। सरकार का लक्ष्य बाल विवाह रोकना है, जबकि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ आरोप साबित करना जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया की जिम्मेदारी होगी।

आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई जारी रहने पर गिरफ्तारियों और मामलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।

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