कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में भाजपा के शशिल नमोशी ने उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पांचवीं बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को 3,297 वोटों से हराया। भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटों पर जीत हासिल की।
बेंगलुरु: कर्नाटक विधान परिषद की चार सीटों के चुनाव में भाजपा-जेडीएस गठबंधन ने कांग्रेस को हराया है। मंगलवार को उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार शशिल जी. नमोशी पांचवीं बार निर्वाचित हुए। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी शरणप्पा मत्तूर के खिलाफ 3,297 वोटों से जीत हासिल की। यह सीट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के गृह क्षेत्र कलबुर्गी और आसपास के जिलों से जुड़ी है। बुधवार सुबह तक बाकी दो निर्वाचन क्षेत्रों की मतगणना पूरी होने के बाद गठबंधन ने चारों सीटों पर जीत दर्ज कर ली।
शशिल नमोशी को मिले 15,596 वोट
निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी अंतिम मतगणना विवरण के अनुसार, शशिल नमोशी को 15,596 प्रथम वरीयता मत मिले। कांग्रेस के शरणप्पा मत्तूर को 12,299 वोट प्राप्त हुए। इस निर्वाचन क्षेत्र में जीत के लिए 14,191 मतों का कोटा निर्धारित किया गया था। नमोशी ने प्रथम वरीयता मतों की गणना के दौरान ही जरूरी आंकड़ा पार कर लिया।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 34,784 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 30,253 ने मतदान किया। गिनती के दौरान 28,380 मत वैध पाए गए, जबकि 1,873 मतपत्र खारिज हुए। इस जीत के साथ नमोशी ने विधान परिषद में अपनी सीट बरकरार रखी है।
पांचवीं बार जीतकर बरकरार रखी सीट
शशिल नमोशी लंबे समय से कर्नाटक की शिक्षक राजनीति से जुड़े हुए हैं। उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उनकी यह पांचवीं जीत है। इस निर्वाचन क्षेत्र में कलबुर्गी, बीदर, यादगीर, रायचूर, कोप्पल और बल्लारी जैसे जिले शामिल हैं।
चुनाव में भाजपा और जेडीएस ने साझा रणनीति के तहत उम्मीदवार उतारे थे। दोनों पार्टियों ने प्रचार के दौरान अपने कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को सक्रिय किया। नमोशी की जीत के बाद गठबंधन नेताओं ने इसे संयुक्त चुनावी प्रयासों का परिणाम बताया है।
बेंगलुरु शिक्षक सीट पर ए.पी. रंगनाथ जीते
बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीएस उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने कांग्रेस के पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया। रंगनाथ को 10,810 और पुट्टन्ना को 9,902 प्रथम वरीयता मत मिले। रंगनाथ इससे पहले भी इसी सीट पर दो बार चुनाव लड़ चुके थे, लेकिन उन्हें हार मिली थी।
साल 2020 में पुट्टन्ना भाजपा के उम्मीदवार थे। बाद में कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्होंने 2024 के उपचुनाव में भी रंगनाथ को हराया था। इस बार जेडीएस और भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में रंगनाथ को जीत मिली।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी भाजपा की जीत
कर्नाटक विधान परिषद की दो अन्य सीटों पर भी भाजपा उम्मीदवार विजयी हुए हैं।
दक्षिण-पूर्व स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के के.एम. सुरेश ने कांग्रेस उम्मीदवार शशि हुलिकुंटे मठ को हराया।
वहीं, पश्चिम स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के एस.वी. संकनूर ने कांग्रेस प्रत्याशी मोहन लिम्बिकायी को पराजित किया।
इन दोनों सीटों पर मंगलवार देर रात तक मतगणना जारी थी। बुधवार सुबह परिणाम स्पष्ट होने के बाद भाजपा-जेडीएस गठबंधन के खाते में चारों सीटें चली गईं।
मतपत्रों से कराया गया था मतदान
कर्नाटक विधान परिषद की चारों सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया गया था। इन चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय कागजी मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया। शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के अनुसार वरीयता देते हैं।
उत्तर-पूर्व शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में नमोशी ने प्रथम वरीयता वोटों से ही जीत के लिए निर्धारित कोटा पार कर लिया था। पश्चिम स्नातक क्षेत्र में मतगणना के दौरान बड़ी संख्या में मतपत्र अमान्य भी पाए गए। कुछ मतदाताओं ने निर्धारित अंकों के बजाय दूसरे निशान लगाए थे।
भाजपा-जेडीएस नेताओं ने क्या कहा?
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जीत किसी एक नेता की नहीं, बल्कि गठबंधन के साझा प्रयासों की है। जेडीएस युवा इकाई के अध्यक्ष निखिल कुमारस्वामी ने भी दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं को जीत का श्रेय दिया।
उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव मतपत्रों से हुए और राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद एनडीए उम्मीदवार जीते। यह उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया थी। चुनाव परिणाम से किसी अन्य चुनाव प्रक्रिया या तकनीक की विश्वसनीयता के बारे में व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
विधान परिषद में क्या बदलेगा?
इन नतीजों के बाद भाजपा की विधान परिषद में सदस्य संख्या बढ़कर 27 और जेडीएस की सात होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन चार सीटों के नतीजों से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की विधानसभा में स्थिति प्रभावित नहीं होती।
विधान परिषद में नए सदस्य शिक्षकों, स्नातकों, शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे उठा सकेंगे। राज्य में इस चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर विधान परिषद की आगामी कार्यवाही पर रहेगी।









