वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव की जीत सांसद बोले 2027 के चुनाव का बिगुल बज गया स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा आगे

वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को हराया। स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा बढ़त बनाए हुए हैं।
वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव की जीत सांसद बोले 2027 के चुनाव का बिगुल बज गया स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा आगे
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वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव की जीत के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखने को मिला। उन्होंने भाजपा के डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को हराकर लगातार दूसरी बार शिक्षक एमएलसी सीट पर जीत हासिल की। चुनाव परिणाम के बाद सपा नेताओं ने इसे शिक्षकों के समर्थन का नतीजा बताया। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस जीत से आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीतिक तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा। इसी क्रम में सपा सांसद ने इसे 2027 के चुनाव का बिगुल बताते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के उत्साह का जिक्र किया।

लाल बिहारी यादव को पहली वरीयता के मतों की गणना में 10,958 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 मत प्राप्त हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच पहली वरीयता के मतों में 4,898 वोट का अंतर रहा। कुल वैध मतों के आधार पर जीत के लिए निर्धारित संख्या पूरी नहीं होने के कारण दूसरी वरीयता के मतों की गणना की गई। इसके बाद लाल बिहारी यादव को विजयी घोषित किया गया। उनकी जीत की खबर मिलते ही मतगणना स्थल के बाहर मौजूद समर्थकों ने नारेबाजी की और एक दूसरे को बधाई दी।

लाल बिहारी यादव की जीत को सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। पुरानी पेंशन व्यवस्था और शिक्षकों के मानदेय जैसे विषय भी राजनीतिक चर्चा में रहे। जीत के बाद लाल बिहारी यादव ने मतदाताओं का आभार जताया और कहा कि शिक्षकों ने उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने भाजपा के चुनावी दावों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। हालांकि, चुनाव परिणाम को पूरे प्रदेश के विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानने के बजाय इसे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के फैसले के रूप में देखना उचित होगा।

इधर वाराणसी खंड स्नातक एमएलसी सीट पर भी सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा और भाजपा उम्मीदवार केदार सिंह के बीच मुकाबला जारी था। 28 अक्टूबर की सुबह सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, दो राउंड की मतगणना के बाद आशुतोष सिन्हा करीब 2,900 वोटों से आगे चल रहे थे। आशुतोष सिन्हा ने मतगणना के आधिकारिक आंकड़े जारी करने में देरी को लेकर सवाल उठाए और चुनाव आयोग से मामले पर संज्ञान लेने की मांग की। उस समय स्नातक सीट का अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुआ था और मतों की गिनती जारी थी।

वाराणसी खंड के अंतर्गत वाराणसी के अलावा चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया जिले आते हैं। यहां शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। मतपत्रों की गिनती में समय लगने के कारण परिणाम अलग-अलग चरणों में सामने आए। शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की जीत के बाद सपा कार्यकर्ताओं की निगाहें स्नातक सीट के नतीजे पर टिकी थीं। आशुतोष सिन्हा की बढ़त से पार्टी समर्थकों में उत्साह था, लेकिन अंतिम नतीजे के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार जरूरी था।

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