कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों, घरेलू कर्ज और घटती बचत का हवाला देते हुए मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली: देश में बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले लोगों से मतदान का अधिकार छीनने की कोशिश कर रही है और अब उनके जीने के अधिकार पर भी असर डाल रही है। खरगे ने कहा कि त्योहारों के बीच बढ़ती कीमतों से आम लोगों की कमाई खर्च होती जा रही है। उन्होंने अपने बयान के समर्थन में महंगाई, घरेलू कर्ज और बचत से जुड़े कई आंकड़े भी साझा किए।
महंगाई को लेकर खरगे ने सरकार से क्या कहा?
खरगे ने अपने पोस्ट में कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर आम परिवारों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान महंगा होने से लोगों के लिए घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार की आर्थिक नीतियों के कारण आम जनता की परेशानियां बढ़ी हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आंकड़े खुद बता रहे हैं कि देश में महंगाई किस स्तर पर पहुंच चुकी है। उन्होंने भाजपा को 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले महंगाई के खिलाफ चलाए गए अपने प्रचार अभियान की भी याद दिलाई। खरगे के मुताबिक, जनता ने अच्छे दिनों की उम्मीद में लंबा इंतजार किया, लेकिन 12 साल बाद भी रोजमर्रा के खर्च से राहत नहीं मिली है।
खाद्य महंगाई 7.74 फीसदी, खुदरा महंगाई भी बढ़ी
खरगे ने अपने पोस्ट में दावा किया कि खाद्य महंगाई दर 2.13 फीसदी से बढ़कर 7.74 फीसदी हो गई है। उन्होंने खुदरा महंगाई 5.54 फीसदी और थोक महंगाई 11.39 फीसदी रहने का भी उल्लेख किया।
सरकार की ओर से जारी सितंबर 2026 के आधिकारिक आंकड़ों में भी खुदरा महंगाई 5.54 फीसदी और खाद्य महंगाई 7.74 फीसदी दर्ज की गई थी। वहीं, थोक मूल्य सूचकांक के अनुसार थोक महंगाई 11.39 फीसदी रही। ये आंकड़े सितंबर 2025 की तुलना में सालाना कीमतों में हुई बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।
खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवारों के मासिक खर्च पर दबाव पड़ सकता है। खासकर सीमित आमदनी वाले लोगों के लिए बढ़ते खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है।
2014 से कितने महंगे हुए प्याज, टमाटर और सरसों तेल?
कांग्रेस अध्यक्ष ने मई 2014 और अक्टूबर 2026 की कीमतों की तुलना करते हुए एक सूची भी साझा की। इसके मुताबिक, मई 2014 में प्याज की कीमत करीब 23 रुपये प्रति किलो थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर 53.32 रुपये प्रति किलो हो गई। इस तरह प्याज की कीमत में लगभग 131.83 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई।
टमाटर की कीमत 17.50 रुपये से बढ़कर 39.62 रुपये प्रति किलो पहुंचने का दावा किया गया। वहीं, सरसों तेल की कीमत 102 रुपये से बढ़कर 207.80 रुपये प्रति लीटर बताई गई। सरकार के उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी पोर्टल पर भी ये मौजूदा औसत खुदरा कीमतें दर्ज हैं। हालांकि, किसी वस्तु की दो अलग-अलग वर्षों की कीमतों की तुलना और सालाना महंगाई दर अलग-अलग आंकड़े होते हैं। इनका इस्तेमाल करते समय संबंधित अवधि को समझना जरूरी है।
घरेलू कर्ज बढ़ने और बचत घटने पर भी सवाल
खरगे ने घरेलू कर्ज और लोगों की वित्तीय बचत को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि घरेलू कर्ज में 36.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जबकि परिवारों की वित्तीय बचत में करीब चार फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि कमाई का बड़ा हिस्सा जरूरी खर्चों में जाने से लोगों के लिए भविष्य की जरूरतों के लिए पैसे बचाना मुश्किल हो रहा है।
1 नवंबर को दिल्ली में विपक्ष की बड़ी रैली
खरगे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी सरकार और चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। इसी मुद्दे पर 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की तैयारी है। दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम के लिए शर्तों के साथ अनुमति दी है।
कांग्रेस महंगाई और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को लगातार घेर रही है। हालांकि, मतदान का अधिकार छीनने और जीने का अधिकार खत्म करने संबंधी खरगे के बयान राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्थापित तथ्य।









