सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में तत्काल सुनवाई के अनुरोधों का लाइव प्रसारण बंद कर दिया है। वहीं, 2 नवंबर से वरिष्ठ वकील मौखिक मेंशनिंग नहीं कर सकेंगे। अदालत ने जूनियर वकीलों को इसके लिए प्रोत्साहित करने को कहा है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मामलों की तत्काल सुनवाई की मांग करने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में 'मेंशनिंग' के लाइव प्रसारण पर रोक लगा दी गई। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब एक दिन पहले सीजेआई ने बिना ठोस वजह तत्काल सुनवाई की मांग करने वाले वकीलों पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने इस प्रक्रिया से जुड़े नए निर्देश भी जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने मेंशनिंग का लाइव प्रसारण क्यों बंद किया?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार, 28 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में मेंशनिंग का लाइव प्रसारण बंद कर दिया। यानी अब वकील जब किसी मामले की जल्दी सुनवाई के लिए अनुरोध करेंगे, तो उस दौरान होने वाली बातचीत लाइव नहीं दिखाई जाएगी। यह फैसला मंगलवार, 27 अक्टूबर को अदालत में हुई एक घटना के बाद लिया गया। उस दिन एक वकील ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की थी।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील से पूछा कि मामले की सुनवाई इतनी जल्दी क्यों जरूरी है। वकील इसकी कोई ठोस वजह नहीं बता सके। इस बात पर सीजेआई ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बिना किसी जरूरी कारण के मामलों की तुरंत सुनवाई मांगना अदालत के काम में परेशानी पैदा करता है। ऐसे अनुरोधों की वजह से अदालत का समय भी खराब होता है। उन्होंने इस तरह की आदत बंद करने की जरूरत बताई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों की लाइव सुनवाई बंद नहीं की है। फिलहाल यह रोक सिर्फ मुख्य न्यायाधीश की अदालत में मेंशनिंग के दौरान होने वाली बातचीत पर लगाई गई है।
सुप्रीम कोर्ट में मेंशनिंग क्या होती है?
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सुप्रीम कोर्ट में किसी केस की जल्दी सुनवाई कराने के लिए वकील जज से अनुरोध करते हैं। कोर्ट की भाषा में इसे मेंशनिंग कहा जाता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति का मामला अदालत में है और उसे जल्द फैसले या राहत की जरूरत है। ऐसे में उसका वकील कोर्ट से कह सकता है कि इस केस की सुनवाई जल्दी की जाए।
वकील अपनी बात मुख्य न्यायाधीश या संबंधित जजों के सामने रख सकते हैं। इसके लिए लिखकर भी अनुरोध दिया जा सकता है। हालांकि, हर मामले में जल्दी सुनवाई की तारीख नहीं मिलती। कोर्ट पहले देखता है कि मामला कितना जरूरी है और उसे पहले सुनने की क्या वजह है। इसके बाद ही तय होता है कि केस की सुनवाई कब होगी।
2 नवंबर से वरिष्ठ वकीलों के लिए क्या बदलेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने मेंशनिंग से जुड़े नियमों को लेकर नया परिपत्र जारी किया है। इसके मुताबिक, सोमवार, 2 नवंबर 2026 से वरिष्ठ अधिवक्ताओं को किसी भी अदालत में तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक मेंशनिंग करने की अनुमति नहीं होगी। यह नियम सुप्रीम कोर्ट की सभी अदालतों में लागू होगा। परिपत्र में कहा गया है कि ऐसे अनुरोध करने के लिए युवा और जूनियर वकीलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि तत्काल सुनवाई मांगने की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म कर दी गई है। पात्र मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार अनुरोध करने की व्यवस्था बनी रहेगी। नए निर्देश विशेष रूप से वरिष्ठ अधिवक्ताओं की ओर से की जाने वाली मौखिक मेंशनिंग से जुड़े हैं।
राहुल गांधी से जुड़े मामले पर क्यों नाराज हुए सीजेआई?
मंगलवार को एक वकील ने राहुल गांधी से संबंधित कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले की तत्काल सुनवाई की मांग उठाई थी। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील से पूछा कि मामले को इतनी जल्दी सुनने की आवश्यकता क्या है। उन्होंने अनुरोध का स्पष्ट आधार नहीं होने पर आपत्ति जताई।सीजेआई ने वकील से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने इस मामले को लेकर किसी समाचार चैनल से बातचीत की है।
मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों से स्पष्ट था कि वह बिना पर्याप्त आधार के मामलों को तत्काल सूचीबद्ध कराने की मांग से असहमत थे। इसके बाद अदालत में मेंशनिंग के लाइव प्रसारण को लेकर निर्देश दिए गए, जिन्हें बुधवार से लागू कर दिया गया।








