मूसी रिवरफ्रंट जनसुनवाई से पहले BRS के दो नेता नजरबंद, केटी रामाराव ने तेलंगाना सरकार पर उठाए सवाल

हैदराबाद मे मूसी रिवरफ्रंट जनसुनवाई से पहले BRS नेता सबिता इंद्रा और कार्तिक रेड्डी को नजरबंद किया गया। KTR ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकार रोकने का आरोप लगाया।

मूसी रिवरफ्रंट जनसुनवाई से पहले BRS के दो नेता नजरबंद, केटी रामाराव ने तेलंगाना सरकार पर उठाए सवालहैदराबाद में मूसी रिवरफ्रंट परियोजना की जनसुनवाई से पहले बीआरएस नेता सबिता इंद्रा रेड्डी और कार्तिक रेड्डी को घरों में नजरबंद किए जाने का मामला सामने आया है। केटी रामाराव ने कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए दोनों नेताओं की रिहाई मांगी।

हैदराबाद: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में मूसी नदी के विकास और सौंदर्यीकरण से जुड़ी परियोजना पर बुधवार को जनसुनवाई होनी थी। इससे पहले पुलिस ने बीआरएस की उपनेता पी. सबिता इंद्रा रेड्डी और राजेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र के पार्टी प्रभारी कार्तिक रेड्डी की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया। बीआरएस नेताओं का आरोप है कि सरकार परियोजना से प्रभावित लोगों की आवाज उठाने से विपक्ष को रोक रही है। हालांकि, पुलिस की ओर से नजरबंदी के कारणों पर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

सुबह चार बजे सबिता इंद्रा रेड्डी के घर पहुंची पुलिस

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बुधवार तड़के करीब चार बजे मधुरानगर थाने के पुलिसकर्मी हैदराबाद की श्रीनगर कॉलोनी स्थित सबिता इंद्रा रेड्डी के आवास पर पहुंचे।

घर के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती के बाद उनकी आवाजाही पर रोक लगाए जाने की बात सामने आई। इसी दौरान बीआरएस नेता कार्तिक रेड्डी को भी कथित तौर पर उनके आवास पर नजरबंद किया गया। दोनों नेताओं को मूसी रिवरफ्रंट परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई में जाने से रोकने के लिए यह कार्रवाई किए जाने का आरोप है।

हालांकि, पुलिस ने सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया कि किसी संभावित प्रदर्शन या कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया था या इसके पीछे कोई दूसरा कारण था।

सबिता रेड्डी बोलीं- हमने प्रदर्शन की घोषणा नहीं की

पूर्व मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने बुधवार को किसी विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उनके मुताबिक, वह जनसुनवाई में हिस्सा लेने या किसी प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी भी नहीं कर रही थीं।

उन्होंने पूछा कि जब किसी तरह का प्रदर्शन प्रस्तावित नहीं था, तो उनके घर के बाहर सुबह से पुलिस तैनात करने और बाहर निकलने से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी। सबिता रेड्डी ने आरोप लगाया कि राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना आपातकाल के दौर से की।

केटी रामाराव ने की बिना शर्त रिहाई की मांग

बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने दोनों नेताओं की कथित नजरबंदी की निंदा की है। उन्होंने इसे अलोकतांत्रिक कार्रवाई बताते हुए कहा कि सरकार विपक्षी नेताओं को सार्वजनिक मुद्दों पर आवाज उठाने से रोक रही है।

रामाराव का आरोप है कि मूसी नदी के किनारे रहने वाले परिवारों को प्रस्तावित परियोजना के कारण विस्थापन का खतरा है। ऐसे में बीआरएस प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने मांग की कि सबिता इंद्रा रेड्डी और कार्तिक रेड्डी पर लगाए गए प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं।

मूसी रिवरफ्रंट परियोजना पर क्यों हो रहा विवाद?

तेलंगाना सरकार मूसी नदी के पुनर्विकास की योजना पर काम कर रही है। परियोजना में नदी की सफाई, बाढ़ नियंत्रण, तटों का विकास और बुनियादी सुविधाओं के निर्माण जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। परियोजना से जुड़ी सरकारी निविदाओं में नदी के किनारे सुरक्षा दीवारों, सड़कों, पुलों, जल निकासी और सीवरेज व्यवस्था का भी उल्लेख है।

हालांकि, नदी किनारे रहने वाले कुछ लोगों और सामाजिक संगठनों ने जमीन अधिग्रहण तथा संभावित विस्थापन पर चिंता जताई है। इन संगठनों की मांग है कि निर्माण और अधिग्रहण से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं और प्रभावित परिवारों से पर्याप्त बातचीत की जाए।

केटीआर ने 1.5 लाख करोड़ रुपये को लेकर लगाए आरोप

केटी रामाराव ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की सरकार पर मूसी परियोजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना के पीछे निजी रियल एस्टेट हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परियोजना के कारण बड़ी संख्या में परिवारों के घर प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों और परियोजना से संभावित रूप से प्रभावित परिवारों की बताई गई संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन्हें बीआरएस के राजनीतिक आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सूखे से प्रभावित किसानों के लिए मांगा मुआवजा

मूसी परियोजना के साथ केटी रामाराव ने राज्य के किसानों की समस्याओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि तेलंगाना के कई क्षेत्रों में सूखे और फसल खराब होने से किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। बीआरएस नेता ने सरकार से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को कम से कम 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग की।

उनका कहना है कि सरकार को बड़ी विकास परियोजनाओं के साथ किसानों की तत्काल जरूरतों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। हालांकि, किसानों के नुकसान और मुआवजे के दावों पर सरकारी आकलन का अलग से मिलान जरूरी है।

जमीन अधिग्रहण का मामला अदालत भी पहुंचा

मूसी रिवरफ्रंट परियोजना से संबंधित जमीन अधिग्रहण को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। सितंबर 2026 में तेलंगाना हाईकोर्ट ने रंगारेड्डी जिले में कुछ याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए अधिकारियों को अगली सुनवाई तक उनकी संबंधित जमीन से बेदखल नहीं करने का निर्देश दिया था।

यह आदेश कुछ निश्चित भूखंडों तक सीमित था। अदालत ने पूरी मूसी रिवरफ्रंट परियोजना पर रोक नहीं लगाई थी। फिलहाल ताजा नजरबंदी विवाद के बीच जनसुनवाई, प्रभावित परिवारों के अधिकार और परियोजना की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

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