भारत के पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को लेकर नई चर्चा शुरू हुई है। रणनीतिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने सुझाव दिया है कि दोनों देशों के साथ भविष्य में होने वाले जल समझौतों में शांति और सुरक्षा से जुड़ी शर्तें भी रखी जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने इजरायल और जॉर्डन का उदाहरण दिया है।
नई दिल्ली: भारत के पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ पानी के समझौतों को लेकर एक नया सुझाव सामने आया है। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने अपने लेख में कहा कि पानी के बंटवारे के साथ पड़ोसी देशों की कुछ जिम्मेदारियां भी तय होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अगर भारत पड़ोसी देशों को नदी का पानी देने का समझौता करता है, तो उन देशों को भी शांति बनाए रखने और भारत की सुरक्षा का ध्यान रखने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए इजरायल और जॉर्डन के बीच हुए समझौते का उदाहरण दिया है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश को लेकर क्या है सुझाव?
ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि भारत को पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ पानी के बंटवारे को सिर्फ नदियों से जुड़ा मामला नहीं मानना चाहिए। उनके अनुसार, भविष्य में होने वाले जल समझौतों में यह भी तय होना चाहिए कि दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ होने वाली गतिविधियों को रोकने में सहयोग करेंगे।उन्होंने सुझाव दिया कि भारत पाकिस्तान को तय मात्रा में पानी देने की व्यवस्था कर सकता है। इसके बदले पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद रोकने और भारत के खिलाफ होने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई करने का भरोसा देना होगा।
बांग्लादेश के साथ भी पानी के बंटवारे के अलावा सुरक्षा और आपसी सहयोग से जुड़ी शर्तें रखी जा सकती हैं। हालांकि, यह सिर्फ ब्रह्मा चेलानी का सुझाव है। भारत सरकार ने अभी ऐसा कोई नया समझौता करने की घोषणा नहीं की है।
इजरायल और जॉर्डन के समझौते में क्या खास है?
इजरायल और जॉर्डन ने 26 अक्टूबर 1994 को शांति समझौता किया था। इसमें दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे के साथ शांति और सुरक्षा से जुड़ी बातें भी शामिल की गई थीं। समझौते के तहत यह तय किया गया कि दोनों देश नदियों और जमीन के नीचे मौजूद पानी का इस्तेमाल कैसे करेंगे। इसके अलावा पानी की सप्लाई और उसकी निगरानी के लिए भी नियम बनाए गए।
दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ होने वाली हिंसक और दुश्मनी वाली गतिविधियों को रोकने की जिम्मेदारी भी ली थी। चेलानी का मानना है कि भारत भी इससे सीख सकता है। हालांकि, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्थिति इजरायल और जॉर्डन से अलग है। इसलिए यहां की जरूरतों को देखते हुए ही ऐसी कोई व्यवस्था बनाई जा सकती है।
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पहलगाम हमले के बाद भारत ने रोकी थी सिंधु जल संधि
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी और उससे जुड़ी छह प्रमुख नदियों के पानी के इस्तेमाल के नियम तय किए गए थे। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। इसके अगले दिन भारत सरकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सिंधु जल संधि को फिलहाल रोकने का फैसला किया था।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि स्थगित रहेगी। हालांकि, इस फैसले को लेकर कानूनी विवाद भी चल रहा है। अगस्त 2026 में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने कहा कि सिंधु जल संधि अब भी लागू है। दूसरी तरफ भारत ने इस न्यायाधिकरण के अधिकार को मानने से इनकार कर दिया और संधि रोकने का अपना फैसला बरकरार रखा।
दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश के साथ गंगा जल समझौता
भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को गंगा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। यह समझौता 30 साल के लिए किया गया था और इसकी अवधि 12 दिसंबर 2026 को पूरी हो रही है। इसके तहत फरक्का के पास गंगा नदी के पानी को दोनों देशों के बीच बांटने के नियम तय किए गए हैं। खासकर जनवरी से मई तक, जब नदी में पानी कम होता है, तब इस समझौते की अहमियत बढ़ जाती है।
बांग्लादेश चाहता है कि उसके साथ नया समझौता हो या पुराने समझौते में बदलाव किया जाए। उसकी मांग है कि सूखे मौसम में उसे मिलने वाले पानी की पक्की गारंटी हो। भारत का कहना है कि दोनों देशों के बीच नदियों और पानी से जुड़े मामलों पर संयुक्त नदी आयोग के जरिए बातचीत की जाती है।
क्या जल समझौतों में शामिल होंगी शांति की शर्तें?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि भारत सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ भविष्य में होने वाले समझौतों में शांति और सुरक्षा से जुड़ी नई शर्तें रखेगी या नहीं। ब्रह्मा चेलानी ने अपने लेख में कहा है कि पानी का बंटवारा ऐसा होना चाहिए, जिससे पड़ोसी देशों के बीच भरोसा और सहयोग बढ़े। उनके मुताबिक, दोनों देशों को पानी मिलने के साथ अपनी जिम्मेदारियां भी निभानी चाहिए।
अब बांग्लादेश के साथ गंगा जल समझौते की अवधि खत्म होने में ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर होने वाली बातचीत पर नजर रहेगी।









