झारखंड में मेडिकल की पढ़ाई के अवसर बढ़े हैं। वर्ष 2019-20 में राज्य में MBBS की 580 सीटें थीं, जो 2026-27 में 1650 हो गई हैं। बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चिकित्सा शिक्षा और डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने पर बैठक की।
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर जोर दिया है। पिछले सात वर्षों में MBBS सीटों की संख्या में 1070 का इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बुधवार को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ करीब चार घंटे बैठक की। उन्होंने अगले दो वर्षों में राज्य को डॉक्टरों की उपलब्धता के मामले में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है।
सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ाई गईं सीटें
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में पहले 180 सीटें थीं, जिन्हें बढ़ाकर 250 कर दिया गया है। धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या 50 से 100 और जमशेदपुर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 50 से 150 हो गई है।
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दुमका, पलामू और हजारीबाग के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी 100-100 सीटें उपलब्ध हैं। इससे राज्य के अलग-अलग हिस्सों के विद्यार्थियों को मेडिकल की पढ़ाई करने के अधिक अवसर मिल रहे हैं।
निजी मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों की संख्या बढ़ी है। जमशेदपुर के मणिपाल टाटा मेडिकल कॉलेज में अब 250 सीटें हैं, जबकि पहले 150 थीं। पलामू के लक्ष्मी चंद्रवंशी मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या 100 से बढ़कर 150 हो गई है।
इसी तरह सरायकेला स्थित नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पहले 100 सीटें थीं, जो अब 200 हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सरकारी और निजी कॉलेजों में बढ़ी सीटों से आने वाले वर्षों में राज्य को अधिक प्रशिक्षित डॉक्टर मिल सकेंगे।
मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई के साथ सुविधाओं पर भी जोर
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों की स्थिति पर चर्चा की। बैठक में देखा गया कि कॉलेजों में अभी क्या सुविधाएं हैं और नई सीटें बढ़ने पर किन चीजों की जरूरत पड़ेगी।
इरफान अंसारी ने कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को कॉलेज में अच्छे शिक्षक और जरूरी उपकरण मिलने चाहिए। सिर्फ किताबों से पढ़ाई पूरी नहीं होती। छात्रों को अस्पतालों में मरीजों का इलाज देखने और डॉक्टरों के साथ काम सीखने का मौका भी मिलना चाहिए।
बैठक में शिक्षकों की संख्या का मुद्दा भी उठा। सीटें बढ़ने के बाद छात्रों की संख्या भी बढ़ेगी। ऐसे में कॉलेजों में पर्याप्त शिक्षक, लैब और प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी होगी। इनकी कमी रहने पर छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों से ऐसे डॉक्टर निकलने चाहिए, जिन्हें इलाज की जानकारी होने के साथ मरीजों की परेशानी समझने का भी अनुभव हो। इसके लिए कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने की जरूरत है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मार्गदर्शन में विभाग अस्पतालों की सुविधाएं बेहतर करने पर काम कर रहा है। सरकार की कोशिश है कि गरीब परिवारों के मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े और उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
गांवों के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी कैसे होगी दूर?
झारखंड में मेडिकल की सीटें बढ़ने से ज्यादा छात्रों को अपने राज्य में पढ़ाई करने का मौका मिलेगा। लेकिन गांवों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी पूरी करना अलग चुनौती है। कई दूरदराज के इलाकों में लोगों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक जाना पड़ता है।
एक डॉक्टर को तैयार होने में कई साल लगते हैं। इसलिए मेडिकल कॉलेजों में नई सीटें मिलने के बाद भी सरकारी अस्पतालों को तुरंत नए डॉक्टर नहीं मिल सकेंगे। सरकार ने अगले दो साल में डॉक्टरों की कमी दूर करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए नई नियुक्तियां और खाली पदों पर तैनाती भी जरूरी होगी।










