राजस्थान के सीकर जिले की रहने वाली प्रीति चंद्रा ने कभी पत्रकारिता की तो कभी बच्चों को पढ़ाया। बाद में उन्होंने बिना कोचिंग UPSC की परीक्षा पास की। IPS बनने के बाद चंबल में डकैतों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उनका नाम चर्चा में आया।
IPS Priti Chandra Success Story: राजस्थान की IPS अधिकारी प्रीति चंद्रा ने बिना कोचिंग के UPSC परीक्षा पास की थी। सिविल सेवा परीक्षा में उनकी ऑल इंडिया रैंक 249 रही। पुलिस की वर्दी पहनने से पहले वह बच्चों को पढ़ाती थीं और पत्रकारिता में भी काम कर चुकी थीं। बाद में उन्होंने नौकरी से हटकर UPSC की तैयारी पर ध्यान दिया। साल 2008 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ।
सीकर के गांव में हुई शुरुआती पढ़ाई
प्रीति चंद्रा का घर राजस्थान के सीकर जिले के कूदन गांव में है। उनके पिता रामचंद्र सुंडा भारतीय सेना में नौकरी कर चुके हैं। परिवार खेती-किसानी से भी जुड़ा रहा है। प्रीति ने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू की थी।
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स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर चली गईं। यहां उन्होंने महारानी कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद एमए, बीएड और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। वह सिविल सेवा में जाना चाहती थीं, लेकिन पढ़ाई के तुरंत बाद UPSC की तैयारी शुरू नहीं की।
टीचर और पत्रकार रहने के बाद बनीं IPS
कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने पर प्रीति चंद्रा ने बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया। कुछ समय तक उन्होंने पत्रकारिता भी की। इसी दौरान उन्होंने तय किया कि अब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करेंगी।
UPSC की तैयारी के लिए प्रीति ने किसी कोचिंग सेंटर में एडमिशन नहीं लिया। उन्होंने खुद पढ़ाई की और परीक्षा में शामिल हुईं। नतीजा आया तो उन्हें देशभर में 249वीं रैंक मिली। इसी रैंक के साथ उनका चयन IPS में हुआ।
प्रीति चंद्रा को राजस्थान कैडर मिला। वह 2008 बैच की IPS अधिकारी हैं। पुलिस में आने के बाद उन्होंने प्रदेश के कई जिलों में काम किया, लेकिन करौली में तैनाती के दौरान डकैतों के खिलाफ कार्रवाई से उनका नाम ज्यादा चर्चा में आया।
करौली में पोस्टिंग के दौरान क्यों हुईं मशहूर?
IPS बनने के बाद प्रीति चंद्रा ने राजस्थान पुलिस में कई जिम्मेदारियां संभालीं। इनमें करौली की पोस्टिंग उनके करियर का चर्चित हिस्सा रही।
करौली का कुछ क्षेत्र चंबल के बीहड़ों से जुड़ा है। लंबे समय तक यह इलाका डकैतों की गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा। यहां पुलिस के लिए अपराधियों तक पहुंचना और उनके खिलाफ कार्रवाई करना आसान नहीं माना जाता था।
करौली में तैनाती के दौरान प्रीति चंद्रा डकैतों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में शामिल रहीं। इस दौरान कई डकैतों के आत्मसमर्पण की घटनाएं भी सामने आईं। अपराधियों के खिलाफ उनके सख्त रवैये के कारण लोग उन्हें 'लेडी सिंघम' कहने लगे।
राजस्थान के किन जिलों में रही पोस्टिंग?
करौली के अलावा प्रीति चंद्रा ने बूंदी, बीकानेर, जयपुर और जोधपुर में भी काम किया है। अलग-अलग जिलों में उन्हें पुलिस प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां मिलीं।
उन्होंने राजस्थान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी ACB में भी सेवाएं दी हैं। पुलिस विभाग में काम करते हुए उन्हें अपराध से जुड़े मामलों के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ीं।
करौली में डकैतों के खिलाफ कार्रवाई से मिली पहचान के बाद भी उनका करियर अलग-अलग पदों और जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ता रहा।
बिना कोचिंग UPSC की तैयारी करने वालों के लिए क्या सीख?
प्रीति चंद्रा पहले बच्चों को पढ़ाती थीं। पत्रकारिता में भी कुछ समय काम किया, लेकिन उनकी इच्छा पुलिस अफसर बनने की थी। इसी वजह से उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की। कोचिंग जाने के बजाय घर पर ही पढ़ाई की। जब परीक्षा का रिजल्ट आया तो उनकी ऑल इंडिया रैंक 249 थी।
सीकर जिले के कूदन गांव में रहने वाली प्रीति ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की थी। आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर गईं, जहां महारानी कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने एमए, बीएड और एमफिल किया। पढ़ाई पूरी होने पर नौकरी भी की, मगर सिविल सेवा में जाने का विचार नहीं छोड़ा। बाद में इसी की तैयारी की और IPS बन गईं।











