अमेरिका में पढ़ाई के दौरान भारतीय छात्र कैंपस में नौकरी करके अपने कुछ खर्च पूरे कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों से लेकर लाइब्रेरी और क्लासरूम तक काम के कई मौके मिलते हैं। आइए जानते हैं ऐसी पांच नौकरियों के बारे में, जिनके लिए छात्र आवेदन कर सकते हैं।
US Part-Time Jobs:अमेरिका में पढ़ाई का सपना पूरा करने के बाद सबसे बड़ी चिंता खर्चों को लेकर होती है। कॉलेज की फीस के साथ कमरे का किराया, खाने-पीने और आने-जाने पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च होती है। घर से मिलने वाले पैसों के अलावा अपनी कमाई का जरिया हो तो छात्रों को थोड़ी राहत मिल सकती है। यही वजह है कि कई भारतीय छात्र पढ़ाई के साथ कैंपस में काम करना पसंद करते हैं।
अमेरिकी यूनिवर्सिटियों में छात्रों को ऑफिस का काम संभालने, नए विद्यार्थियों की मदद करने और प्रोफेसरों के साथ काम करने जैसे अवसर मिलते हैं। नौकरी तलाशने वाली वेबसाइट Indeed पर इन पदों की सैलरी से जुड़े आंकड़े भी उपलब्ध हैं। हालांकि, वहां बताई गई सालाना सैलरी और कैंपस में कुछ घंटे काम करने वाले छात्र की वास्तविक कमाई में काफी अंतर हो सकता है।
पढ़ाई के दौरान कितने घंटे नौकरी कर सकते हैं भारतीय छात्र?
अमेरिका में F-1 वीजा पर पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आमतौर पर पढ़ाई के सत्र के दौरान कैंपस में सप्ताह में 20 घंटे तक काम करने की अनुमति होती है। यूनिवर्सिटी की आधिकारिक छुट्टियों में पात्र छात्र अधिक घंटे भी काम कर सकते हैं।
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कैंपस से बाहर नौकरी करने के नियम अलग हैं। इसके लिए जरूरी अनुमति लेनी पड़ सकती है। इसलिए काम शुरू करने से पहले कॉलेज के इंटरनेशनल स्टूडेंट ऑफिस से नियमों की जानकारी लेना जरूरी है।
डिपार्टमेंट असिस्टेंट: कॉलेज के ऑफिस में काम करने का मौका
यूनिवर्सिटी के अलग-अलग विभागों में रोजाना कई प्रशासनिक काम होते हैं। इन्हें संभालने के लिए डिपार्टमेंट असिस्टेंट रखे जाते हैं। इस नौकरी में छात्रों को ऑफिस आने वाले लोगों की मदद करनी होती है। प्रोफेसरों की मीटिंग तय करना, जरूरी कागजात व्यवस्थित रखना और कॉलेज के कार्यक्रमों की तैयारी में हाथ बंटाना भी काम का हिस्सा हो सकता है।
जिन छात्रों को कंप्यूटर चलाना आता है और लोगों से बातचीत करने में आसानी होती है, उनके लिए यह अच्छा विकल्प है। Indeed के दिए गए आंकड़ों में इस पद का सालाना वेतन 48,547 डॉलर, यानी करीब 46 लाख रुपये बताया गया है। यह सामान्य वेतन का अनुमान है, छात्र की पार्ट-टाइम कमाई नहीं।
स्टूडेंट एंबेसडर: नए छात्रों को दिखाना होगा कैंपस
किसी यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले छात्र और उनके परिवार वहां की सुविधाओं के बारे में जानना चाहते हैं। ऐसे में स्टूडेंट एंबेसडर उनकी मदद करते हैं। वे कैंपस घुमाते हैं, कॉलेज के माहौल के बारे में बताते हैं और एडमिशन से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
कभी-कभी उन्हें स्कूलों में जाकर भी अपनी यूनिवर्सिटी के बारे में जानकारी देनी पड़ती है। अंग्रेजी में अच्छी बातचीत करने वाले और नए लोगों से मिलने-जुलने के शौकीन छात्रों के लिए यह काम उपयोगी हो सकता है। इस पद का औसत वार्षिक वेतन 42,457 डॉलर, यानी लगभग 40.33 लाख रुपये बताया गया है।
पीयर मेंटर: नए विद्यार्थियों को कॉलेज समझने में मदद
विदेश में पहली बार पढ़ने पहुंचे छात्र अक्सर शुरुआत में परेशान रहते हैं। उन्हें क्लास का शेड्यूल, असाइनमेंट जमा करने का तरीका और कैंपस की सुविधाएं समझने में समय लगता है। पीयर मेंटर ऐसे ही विद्यार्थियों की मदद करते हैं।
इस नौकरी में छात्रों को नए साथियों के सवालों का जवाब देना होता है। उन्हें सही विभाग तक पहुंचाना, कॉलेज के संसाधनों के बारे में बताना और पढ़ाई से जुड़ी सामान्य परेशानियां समझने में सहयोग करना पड़ता है।
जो छात्र कुछ समय से यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं, वे इस भूमिका के लिए आवेदन कर सकते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पीयर मेंटर का औसत सालाना वेतन 39,184 डॉलर, यानी करीब 37.22 लाख रुपये है।
लाइब्रेरी असिस्टेंट: किताबों के बीच काम करने का अवसर
कॉलेज की लाइब्रेरी केवल किताबें पढ़ने की जगह नहीं होती। यहां रोजाना सैकड़ों छात्र अध्ययन सामग्री लेने और लौटाने आते हैं। इस व्यवस्था को संभालने के लिए लाइब्रेरी असिस्टेंट की जरूरत पड़ती है।
इस पद पर किताबों को सही जगह रखना, रिकॉर्ड संभालना और विद्यार्थियों को उनकी जरूरत की पुस्तकें खोजने में मदद करना होता है। लाइब्रेरी में शांति बनाए रखने और किताबें जारी करने की प्रक्रिया में भी सहयोग देना पड़ सकता है।
जिन्हें शांत वातावरण में काम करना पसंद है, वे इस नौकरी पर विचार कर सकते हैं। इसके लिए औसत वार्षिक वेतन 36,614 डॉलर, यानी लगभग 34.78 लाख रुपये बताया गया है।
टीचिंग असिस्टेंट: प्रोफेसर के साथ काम करने का मौका
किसी विषय पर अच्छी पकड़ है तो टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी भी मिल सकती है। इसमें प्रोफेसर को क्लास से जुड़े कामों में सहयोग देना होता है। छात्रों के सवाल समझाना, असाइनमेंट जांचने में मदद करना और कुछ शैक्षणिक गतिविधियां संभालना इसकी जिम्मेदारियों में शामिल हो सकता है।
यह काम खासतौर पर उन विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो आगे चलकर पढ़ाने या रिसर्च के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। हालांकि, सभी छात्रों को ऐसे पद नहीं मिलते। कई विभाग अपनी शैक्षणिक योग्यता और चयन प्रक्रिया तय करते हैं।
Indeed के आंकड़ों के अनुसार, इस पद का औसत सालाना वेतन 27,896 डॉलर, यानी करीब 26.50 लाख रुपये बताया गया है।
फारेंसिक टीम की मदद से होगा सीन रिक्रिएशन
डीसीपी मध्य अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि घटनास्थल का सीन रिक्रिएशन कराने के लिए फारेंसिक विभाग को पत्र भेजा गया है। वादी मुकदमा को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। फोरेंसिक टीम की ओर से समय मिलने पर इसी सप्ताह घटनाक्रम को दोहराया जाएगा। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि घटना के समय कौन कहां मौजूद था और शिवा की मौत किन परिस्थितियों में हुई।
होटल से नेपाल तक मददगारों की भूमिका की जांच
पुलिस श्रद्धा के फरार होने के दौरान मदद करने वालों की भूमिका भी खंगाल रही है। आमिर समेत तीन लोगों को चिन्हित किया गया है। इनमें श्रद्धा को होटल में कमरा दिलाने और नेपाल पहुंचाने में मदद करने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इनकी भूमिका की पुष्टि होने के बाद मुकदमे में नाम बढ़ाए जाएंगे।
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