नागौर के विनय मोहन ने IIT कानपुर में दाखिला मिलने के बावजूद प्रशासनिक सेवा को अपना करियर चुना। करीब 10 साल तक परीक्षा की तैयारी की। इस दौरान परिवार का साथ मिला और लोगों के सवाल भी झेले। आखिरकार दो बार RAS परीक्षा पास की और SDM बने।
नागौर: IIT कानपुर में दाखिला मिल जाए तो ज्यादातर छात्र अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके अच्छी नौकरी पाने की सोचते हैं। लेकिन राजस्थान के नागौर निवासी विनय मोहन ने कुछ अलग करने का फैसला किया। उन्होंने IIT की पढ़ाई बीच में छोड़ दी और RAS परीक्षा की तैयारी में जुट गए। उनका यह फैसला आसान नहीं था। कई साल तक परीक्षा की तैयारी करते रहे, लोग नौकरी करने की सलाह देते रहे। फिर भी उन्होंने रास्ता नहीं बदला। आखिरकार दो बार RAS परीक्षा पास करके SDM बनने में कामयाब हुए।
2015 में ग्रेजुएशन, पांच साल बाद IIT कानपुर में मिला दाखिला
विनय मोहन राजस्थान के नागौर के रहने वाले हैं। साल 2015 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी। उनका विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग था।
साल 2020 में उन्हें IIT कानपुर में दाखिला मिल गया। यहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी मेहनत की थी। परिवार के लिए भी यह खुशी की बात थी। अब उनके पास इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे पढ़ने और करियर बनाने का मौका था।
मगर पढ़ाई के दौरान उनका मन प्रशासनिक सेवा की तरफ जाने लगा। उन्हें लगा कि सरकारी अधिकारी बनकर वे लोगों की समस्याओं पर सीधे काम कर सकते हैं। कुछ समय तक सोचने के बाद उन्होंने IIT छोड़ने का निर्णय लिया।
IIT छोड़ने पर लोगों ने दी नौकरी करने की सलाह
विनय के लिए असली मुश्किलें इस फैसले के बाद शुरू हुईं। IIT की पढ़ाई छोड़कर RAS की तैयारी करना बड़ा जोखिम था। परीक्षा कब पास होगी और नौकरी कब मिलेगी, इसका जवाब उनके पास भी नहीं था।
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एक वीडियो इंटरव्यू में विनय ने अपने संघर्ष के बारे में बताया। उनके मुताबिक, जब कोई युवा कई साल तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता रहता है तो आसपास के लोग उसके भविष्य को लेकर सवाल करने लगते हैं।
उनके साथ भी ऐसा हुआ। लोग कहते थे कि अब प्राइवेट नौकरी कर लेनी चाहिए। कुछ लोग कारोबार शुरू करने की सलाह देते थे। समय बीतने के साथ ये बातें बढ़ती गईं।
करीब 10 साल की इस यात्रा में ऐसे मौके भी आए, जब मानसिक दबाव काफी ज्यादा था। विनय ने इन परेशानियों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी।
माता-पिता ने कभी तैयारी छोड़ने के लिए नहीं कहा
लंबे समय तक बिना नौकरी के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता। विनय के माता-पिता ने इस दौरान उनका साथ दिया।
विनय बताते हैं कि घरवालों ने उन पर भरोसा रखा। तैयारी में ज्यादा समय लगने के बावजूद उन्हें बार-बार मौका दिया गया। घर से मिले इसी सहयोग के कारण वे अपनी पढ़ाई जारी रख सके।
बाहर के लोगों की बातें अपनी जगह थीं, लेकिन परिवार का भरोसा उनके लिए ज्यादा मायने रखता था। उन्हें तैयारी छोड़कर तुरंत नौकरी तलाशने का दबाव नहीं झेलना पड़ा।
कोचिंग से ज्यादा खुद की पढ़ाई पर किया भरोसा
RAS परीक्षा की तैयारी के लिए विनय ने रोजाना पढ़ने का समय तय कर रखा था। वे करीब आठ घंटे पढ़ाई करते थे। उन्होंने इस काम को अपनी रोज की नौकरी जैसा बना लिया था।
उनकी तैयारी में सेल्फ स्टडी की बड़ी भूमिका रही। वे नियमित पढ़ते रहे और अपनी गलतियों को समझकर उन्हें सुधारने की कोशिश करते रहे।
विनय का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में लंबे समय तक मेहनत करनी पड़ सकती है। एक बार परीक्षा में सफलता नहीं मिलने पर पूरी तैयारी छोड़ देना सही नहीं है। यह देखना भी जरूरी है कि पिछली बार कहां कमी रह गई थी।
उन्होंने इसी तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रखी और अगली परीक्षाओं में प्रदर्शन बेहतर किया।
पहली बार 84वीं रैंक मिली, दोबारा परीक्षा देकर 30वीं रैंक हासिल की
कई वर्षों की तैयारी के बाद विनय मोहन को RAS 2023 परीक्षा में सफलता मिली। उन्होंने 84वीं रैंक हासिल की। लंबे संघर्ष के बाद मिली इस कामयाबी से उनका प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना पूरा होने लगा था।
हालांकि, विनय यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक बार फिर RAS परीक्षा देने का फैसला किया। इस बार उनका लक्ष्य पिछली रैंक से बेहतर प्रदर्शन करना था।
अगली कोशिश में उन्होंने 30वीं रैंक हासिल की और SDM पद तक पहुंचे। इस तरह एक ही परीक्षा में दो बार सफलता हासिल करने के बाद उनका लंबा सफर मुकाम तक पहुंचा।
RAS की तैयारी करने वाले युवाओं को विनय मोहन की सलाह
विनय मोहन के लिए RAS की परीक्षा पास करना आसान नहीं रहा। तैयारी करते-करते कई साल निकल गए। इस बीच लोग उनसे पूछने लगे कि आखिर कब तक पढ़ते रहेंगे। कोई नौकरी करने को कहता तो कोई अपना काम शुरू करने की सलाह देता। विनय बताते हैं कि ऐसी बातें सुनकर परेशानी होती थी, लेकिन उन्होंने पढ़ाई बंद नहीं की।
उनके मुताबिक, परीक्षा में मनचाहा रिजल्ट नहीं मिलने पर यह देखना चाहिए कि गलती कहां हो रही है। उसी कमी को दूर करके दोबारा कोशिश करनी चाहिए। विनय ने भी ऐसा ही किया। RAS 2023 में उन्हें 84वीं रैंक मिली थी। इसके बाद उन्होंने फिर परीक्षा दी और इस बार 30वीं रैंक हासिल कर ली।
विनय अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता को भी देते हैं। उनका कहना है कि घरवालों ने कभी उन पर भरोसा कम नहीं होने दिया। करीब 10 साल के इस सफर में कई बार मुश्किलें आईं, लेकिन परिवार ने पढ़ाई जारी रखने में मदद की। विनय का मानना है कि सिर्फ ज्यादा घंटे पढ़ने से बात नहीं बनती। यह समझना भी जरूरी है कि जो पढ़ रहे हैं, उससे परीक्षा की तैयारी कितनी बेहतर हो रही है।
RAS की तैयारी कर रहे छात्र राजस्थान लोक सेवा आयोग की वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in पर परीक्षा, भर्ती और रिजल्ट से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।











