गाय-भैंस चराने वाले दिनेश चौधरी बने SDM, बिना कोचिंग तीन बार पाई सफलता

जोधपुर के किसान परिवार के दिनेश चौधरी ने बिना कोचिंग तीन बार RAS परीक्षा पास की। शिक्षक से SDM तक का उनका सफर जानें।

राजस्थान के जोधपुर में किसान परिवार से आने वाले दिनेश चौधरी ने बिना कोचिंग तीन बार RAS परीक्षा पास की। बचपन में खेतों में काम करने वाले दिनेश ने पहले शिक्षक की नौकरी हासिल की और फिर प्रशासनिक सेवा में सातवीं रैंक तक पहुंचे।

Dinesh Choudhary RAS Success Story: राजस्थान के जोधपुर जिले के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े दिनेश चौधरी आज एसडीएम बनने तक का सफर तय कर चुके हैं। उनके माता-पिता कभी स्कूल नहीं गए, लेकिन बेटे की पढ़ाई को हमेशा महत्व दिया। दिनेश ने बचपन में खेती और पशुपालन के काम में परिवार की मदद की। आगे चलकर 19 साल की उम्र में सरकारी शिक्षक बने और नौकरी के साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी जारी रखी। उनकी सफलता की खास बात यह रही कि उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया।

19 साल की उम्र में मिली पहली सरकारी नौकरी

जोधपुर के ग्रामीण इलाके से आने वाले दिनेश चौधरी का बचपन खेती-किसानी के बीच बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी। घर में पढ़ाई का माहौल भी ज्यादा नहीं था, क्योंकि उनके माता-पिता ने खुद स्कूली शिक्षा हासिल नहीं की थी।

दिनेश को बचपन से ही घर के कामों में हाथ बंटाना पड़ता था। कभी खेतों में काम करते तो कभी गाय-भैंस चराने जाते थे। इन जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी।

उनकी पहली बड़ी सफलता महज 19 साल की उम्र में मिली, जब उनका चयन थर्ड ग्रेड शिक्षक के पद पर हुआ। इतनी कम उम्र में सरकारी नौकरी मिलना परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि थी। हालांकि दिनेश अपने करियर को यहीं तक सीमित नहीं रखना चाहते थे।

शिक्षक की नौकरी करते हुए शुरू की RAS की तैयारी

सरकारी शिक्षक बनने के बाद दिनेश ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा में जाने का फैसला किया। नौकरी के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं था। उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना पड़ता था।

उन्होंने महंगे कोचिंग संस्थानों में दाखिला लेने के बजाय घर पर रहकर पढ़ने का रास्ता चुना। तैयारी के लिए जरूरी किताबों का चयन किया और ऑनलाइन उपलब्ध अध्ययन सामग्री का इस्तेमाल किया।

दिनेश ने अपने अध्ययन का तरीका ऐसा रखा, जिससे वे नौकरी के साथ तैयारी भी जारी रख सकें। उनका ध्यान ज्यादा से ज्यादा सामग्री इकट्ठा करने के बजाय चुने हुए विषयों को अच्छी तरह समझने पर रहा।

पहली बार 264वीं रैंक, फिर लगातार सुधारा प्रदर्शन

दिनेश चौधरी को RAS परीक्षा में पहली सफलता 2021 में मिली। उन्होंने 264वीं रैंक हासिल की और जिला रोजगार अधिकारी के पद पर चयनित हुए। प्रशासनिक क्षेत्र में यह उनके करियर की नई शुरुआत थी।

पहली सफलता के बाद उन्होंने बेहतर रैंक पाने के लिए दोबारा परीक्षा देने का फैसला किया। इस बार उन्होंने पिछली तैयारी की कमियों पर ध्यान दिया और उन विषयों को मजबूत किया, जिनमें सुधार की जरूरत थी।

साल 2023 की RAS परीक्षा में उनकी रैंक सुधरकर 31वीं हो गई। इसके बाद भी उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।

RAS 2024 में दिनेश ने सातवीं रैंक हासिल की। इस तरह तीन अलग-अलग परीक्षाओं में उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें एसडीएम पद तक पहुंचाया। 

टेस्ट सीरीज और गलतियों की जांच से मिली मदद

दिनेश अपनी तैयारी में सेल्फ-स्टडी के साथ सेल्फ-असेसमेंट को भी महत्वपूर्ण मानते हैं। वे केवल किताबें पढ़ने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि टेस्ट सीरीज के जरिए अपनी तैयारी जांचते रहे।

टेस्ट देने के बाद वे गलत जवाबों को देखते और समझने की कोशिश करते कि कमी कहां रह गई। इससे उन्हें कमजोर विषयों की पहचान करने और अगली परीक्षा के लिए तैयारी में बदलाव करने में मदद मिली।

उनका अनुभव बताता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमित अभ्यास के साथ अपनी गलतियों को समझना भी जरूरी है।

दोस्तों का साथ और सही माहौल भी बना मददगार

दिनेश अपनी सफलता में अच्छे दोस्तों के योगदान को भी अहम मानते हैं। तैयारी के दौरान उनके आसपास ऐसे लोग रहे, जिन्होंने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

उनके मुताबिक, आसपास के लोगों की सोच का असर आपकी तैयारी और फैसलों पर पड़ता है। इसलिए उन्होंने सकारात्मक माहौल बनाए रखने पर ध्यान दिया।

दिनेश की कहानी उन युवाओं के लिए उपयोगी है, जो नौकरी करते हुए RAS जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनका सफर दिखाता है कि कोचिंग के बिना भी सही अध्ययन सामग्री, नियमित अभ्यास और अपनी कमियों में सुधार करके बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

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