हरियाणा के हांसी में दीपावली से पहले सब्जियों की कीमतें बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लहसुन 350, मटर 200 और प्याज 100 रुपये किलो बिक रहा है। स्थानीय लोगों ने दुकानों पर कीमतों की निगरानी की मांग की है।
हांसी: त्योहार से पहले बाजार में सब्जियां खरीदने पहुंचे लोगों को बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है। हांसी में आलू को छोड़कर अधिकतर सब्जियों के दाम आम परिवारों के बजट पर भारी पड़ रहे हैं। नींबू 220 रुपये और हरी मिर्च 120 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले महीने के मुकाबले कई सब्जियों की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इससे रोजमर्रा की खरीदारी के साथ त्योहार की तैयारियों का खर्च भी बढ़ गया है।
हांसी में सब्जियों के दाम बढ़े, बाजार में खरीदारी करना हुआ महंगा
दीपावली की तैयारियों के बीच हांसी के सब्जी बाजार में महंगाई का असर दिखाई दे रहा है। घरों में रोज इस्तेमाल होने वाली सब्जियों के भाव बढ़ने से लोगों को खरीदारी करते समय ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। बाजार में आलू अभी 20 रुपये किलो मिल रहा है, लेकिन दूसरी कई सब्जियों की कीमत 50 से 200 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। लहसुन सबसे महंगी चीजों में शामिल है, जो 350 रुपये किलो बिक रहा है।
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टमाटर और गोभी के भाव 50-50 रुपये प्रति किलो हैं। वहीं, गाजर और शकरकंद 100 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। अदरक की कीमत 160 रुपये और हरी मिर्च 120 रुपये प्रति किलो है। रोज खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाली इन चीजों के दाम बढ़ने से घरेलू खर्च पर सीधा असर पड़ रहा है। खासकर उन परिवारों के लिए परेशानी ज्यादा है, जिन्हें सीमित आमदनी में पूरे महीने का राशन और सब्जियां खरीदनी पड़ती हैं।
सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, मंडी में ही कई सब्जियां महंगे भाव पर पहुंच रही हैं। मांग और आपूर्ति में बदलाव होने से कीमतें प्रभावित हुई हैं। स्थानीय बाजारों में भी इसका असर देखा जा रहा है। गलियों और कॉलोनियों में सब्जी बेचने वाली दुकानों पर कुछ चीजों के दाम मुख्य मंडी की तुलना में ज्यादा बताए जा रहे हैं। ऐसे में घर के पास से खरीदारी करने वाले लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
मंडी से ज्यादा दाम वसूलने की शिकायत, लोगों ने उठाई निगरानी की मांग
पीर वाली ढाणी के रहने वाले राजेश ने सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि लोगों की आमदनी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हो रही, लेकिन घर चलाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। सब्जियों के लिए पहले की तुलना में ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं। इससे महीने का बजट संभालना मुश्किल हो रहा है।
राजेश ने बताया कि कामकाज में व्यस्त रहने के कारण हर व्यक्ति रोजाना सब्जी मंडी नहीं जा सकता। ज्यादातर लोग अपने घर के आसपास मौजूद दुकानों से ही जरूरत का सामान खरीदते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय दुकानों पर मंडी के मुकाबले दोगुने दाम तक लिए जा रहे हैं। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से सब्जियों की कीमतों पर निगरानी रखने की मांग की है।
सब्जी मंडी में खरीदारी करने पहुंचीं संतोष, सरिता और आशा ने भी महंगाई को लेकर परेशानी बताई। महिलाओं के मुताबिक, पिछले महीने की तुलना में कई सब्जियों की कीमतें डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गई हैं। पहले जितने पैसों में घर के लिए कई तरह की सब्जियां आ जाती थीं, अब उतनी रकम में कम सामान मिल रहा है।
महिलाओं का कहना है कि प्याज और मटर पहले से ही महंगे चल रहे हैं। अब प्याज के दाम 100 रुपये किलो होने से सलाद में इसका इस्तेमाल करना भी महंगा पड़ रहा है। रोज की जरूरत होने के कारण लोग सब्जियां खरीदना बंद नहीं कर सकते, लेकिन बढ़े हुए दामों के चलते खरीदारी में बदलाव करना पड़ रहा है।
मटर 200, नींबू 220 रुपये किलो, दूसरी सब्जियों की कीमतें भी बढ़ीं
हांसी के बाजार में मटर 200 रुपये और नींबू 220 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। धनिया और हरी मिर्च दोनों की कीमत 120 रुपये किलो है। वहीं, मेथी 80 रुपये, खीरा 70 रुपये और करेला 80 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। भिंडी का भाव 60 रुपये किलो है। इन कीमतों से साफ है कि केवल एक-दो सब्जियां ही नहीं, बल्कि रसोई में इस्तेमाल होने वाली कई जरूरी चीजें महंगी हुई हैं।
त्योहार के समय घरों में सामान्य दिनों की तुलना में अलग-अलग तरह के पकवान और व्यंजन बनाए जाते हैं। इसके लिए सब्जियों, मसालों और दूसरी चीजों की खरीदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे में लहसुन, अदरक, प्याज, मटर और नींबू जैसी चीजों के दाम बढ़ने से खाना तैयार करने का खर्च बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मंडियों में सब्जियों की आवक बेहतर होने और आपूर्ति सामान्य होने पर कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी दुकानदारों की ओर से भाव कम होने को लेकर कोई निश्चित जानकारी नहीं दी गई है।लोगों की मुख्य मांग है कि प्रशासन स्थानीय दुकानों पर सब्जियों की कीमतों की निगरानी करे, ताकि मंडी और मोहल्लों की दुकानों के बीच दामों में बहुत अधिक अंतर न रहे। फिलहाल हांसी में बढ़ी हुई कीमतों के बीच परिवारों को रोजमर्रा की जरूरत के हिसाब से सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं।







