गुजरात के बोटाद में ट्रेन को पटरी से उतारकर यात्रियों को लूटने की साजिश के मामले में दो लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। सितंबर 2024 की इस घटना में ट्रेन लोहे के टुकड़े से टकराई थी, लेकिन बड़ा हादसा टल गया था।
अहमदाबाद: गुजरात के बोटाद जिले में करीब दो साल पहले ट्रेन हादसा कराकर यात्रियों को लूटने की कोशिश करने वाले दो दोषियों को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनीषसहाय पराशर ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को रमेश सालिया और जयेश बावलिया को दोषी ठहराया। दोनों ने रेलवे ट्रैक पर लोहे का भारी टुकड़ा रखा था। उनका इरादा ट्रेन को पटरी से उतारने के बाद यात्रियों का सामान और कीमती सामान लूटने का था।
सितंबर 2024 में ट्रेन को पटरी से उतारने की हुई थी कोशिश
यह मामला 25 सितंबर 2024 का है। उस दिन तड़के करीब तीन बजे ओखा-भावनगर एक्सप्रेस ट्रेन संख्या 19210 बोटाद जिले के राणपुर क्षेत्र से गुजर रही थी।
कुंडली रेलवे स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर ट्रेन अचानक पटरी पर रखे लोहे के भारी टुकड़े से टकरा गई। रेलवे ट्रैक के बीच रखी गई यह वस्तु लगभग चार फीट लंबी थी।
टक्कर के बाद ट्रेन के इंजन को नुकसान पहुंचा और उसे रोकना पड़ा। हालांकि, ट्रेन पटरी से नहीं उतरी और सभी यात्री सुरक्षित रहे।
इस घटना के बाद रेलवे और स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की। शुरुआत में आशंका जताई गई कि किसी ने जानबूझकर ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है।
यात्रियों के घायल होने के बाद लूटपाट करने की थी योजना
जांच में सामने आया कि इस घटना के पीछे रमेश कांजी सालिया और जयेश उर्फ जालो नगरभाई बावलिया शामिल थे। घटना के समय रमेश की उम्र करीब 55 साल और जयेश की उम्र 24 साल बताई गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने आर्थिक परेशानी और कर्ज चुकाने के लिए यात्रियों को लूटने की योजना बनाई थी।
उनकी सोच थी कि ट्रेन पटरी से उतरने पर अफरा-तफरी मचेगी और इसी दौरान वे यात्रियों के रुपये तथा कीमती सामान लेकर भाग जाएंगे।
हालांकि, जिला सरकारी वकील केएम मकवाना ने बताया कि दोनों पर वास्तव में कोई बहुत बड़ा कर्ज नहीं था। अदालत में आर्थिक परेशानी की बात उनकी ओर से सामने आई थी।
साजिश से पहले यूट्यूब पर देखे थे वीडियो
पुलिस जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई। आरोपियों ने घटना को अंजाम देने से पहले इंटरनेट पर ट्रेन को पटरी से उतारने से संबंधित वीडियो देखे थे।
पुलिस के मुताबिक, उन्होंने करीब आठ से दस दिनों तक यूट्यूब पर ऐसे वीडियो की जानकारी जुटाई थी।
इसके बाद दोनों ने रेलवे लाइन पर लोहे का टुकड़ा रखकर ट्रेन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
ट्रेन पटरी से नहीं उतरी तो दोनों की योजना नाकाम हो गई। घटना के बाद वे मौके से फरार हो गए थे।
पुलिस और जांच एजेंसियों ने मिलकर पकड़े आरोपी
घटना गंभीर होने के कारण स्थानीय पुलिस के साथ कई जांच एजेंसियां सक्रिय हुई थीं।
बोटाद पुलिस, रेलवे पुलिस, स्थानीय अपराध शाखा, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और गुजरात एटीएस ने मामले की जांच में सहयोग किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जुड़ी टीम भी जांच प्रक्रिया में शामिल रही।
जांच के बाद 1 अक्टूबर 2024 को रमेश और जयेश को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों, घटनास्थल से मिले सबूतों और उनके मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी की जांच की। इसके आधार पर मामला अदालत तक पहुंचा।
अदालत में पेश किए गए 15 गवाह और 55 दस्तावेज
सरकारी वकील के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने अदालत में 15 गवाहों के बयान और 55 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
इनमें ट्रेन के लोको पायलट का बयान महत्वपूर्ण रहा। इसके अलावा रेलवे ट्रैक पर मिला लोहे का टुकड़ा और आरोपियों के मोबाइल फोन की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री भी जांच का हिस्सा बनी।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपियों को दोषी पाया।
भारतीय न्याय संहिता, रेलवे अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने रेलवे अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोनों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
बड़ा रेल हादसा टला, लेकिन साजिश पर मिली सख्त सजा
इस घटना में ट्रेन के इंजन को नुकसान जरूर पहुंचा था, लेकिन कोई यात्री घायल नहीं हुआ। ट्रेन के पटरी पर बने रहने से बड़ा हादसा टल गया।
अदालत के फैसले के बाद सितंबर 2024 से चल रहे इस आपराधिक मामले में दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है।
यह मामला रेलवे सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पटरी से छेड़छाड़ करने की ऐसी कोशिश बड़ी संख्या में यात्रियों की जान खतरे में डाल सकती है।
रेलवे ट्रैक पर किसी संदिग्ध वस्तु या छेड़छाड़ की जानकारी मिलने पर तुरंत रेलवे अधिकारियों या रेलवे सुरक्षा हेल्पलाइन 139 पर सूचना देना जरूरी है।









