असम में मांस व्यापार के लिए ले जाए जा रहे 26 कुत्ते बचाए गए, बोरी में भरकर बांध दिए थे मुंह

असम के कार्बी आंगलोंग में पुलिस ने मांस व्यापार के लिए ले जाए जाने के संदेह में 26 कुत्तों को बचाया। सभी जूट की बोरियों में बंद मिले। जानें पूरा मामला।

असम के कार्बी आंगलोंग जिले में पुलिस और चार पशु संरक्षण संगठनों ने संयुक्त अभियान चलाकर 26 कुत्तों को बचाया है। सभी कुत्तों के मुंह बंधे हुए थे और उन्हें जूट की बोरियों में ठूंसकर रखा गया था। आशंका है कि इन्हें मांस व्यापार के लिए ले जाया जा रहा था। फिलहाल सभी कुत्तों को गुवाहाटी के पशु देखभाल केंद्र में रखा गया है।

गुवाहाटी: असम के कार्बी आंगलोंग जिले में पुलिस और पशु संरक्षण संगठनों की संयुक्त कार्रवाई में 26 कुत्तों की जान बचाई गई है। बुधवार, 28 अक्टूबर को पुलिस ने एक वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली। इस दौरान जूट की बोरियों में बंद कुत्ते मिले, जिनके मुंह रस्सियों से बांधे गए थे। आशंका जताई जा रही है कि इन कुत्तों को मांस के अवैध कारोबार के लिए दूसरे राज्य में ले जाया जा रहा था। रेस्क्यू के बाद सभी जानवरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज और देखभाल की जा रही है।

जूट की बोरियों में बंद मिले 26 कुत्ते

कार्बी आंगलोंग जिले में पुलिस ने पशु संरक्षण संगठनों के साथ मिलकर यह अभियान चलाया। तलाशी के दौरान वाहन में बड़ी संख्या में कुत्ते बेहद खराब स्थिति में मिले। कुत्तों के मुंह बांध दिए गए थे और उन्हें जूट की बोरियों में रखा गया था। बोरियों में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण जानवरों को काफी परेशानी हो रही थी।

रेस्क्यू टीम ने सभी 26 कुत्तों को बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की। प्रारंभिक आशंका है कि इन्हें अवैध मांस व्यापार के लिए ले जाया जा रहा था। हालांकि, कुत्तों को कहां से लाया गया और उनकी अंतिम मंजिल क्या थी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुलिस के साथ चार संगठनों ने चलाया अभियान

इस कार्रवाई में असम पुलिस के साथ चार पशु कल्याण संगठनों ने हिस्सा लिया।

इनमें जस्ट बी फ्रेंडली (JBF), ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया, यूसीआई फाउंडेशन और अनाजोरी शामिल थे।

ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया पहले ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल इंडिया के नाम से काम करता था।

संगठनों के स्वयंसेवकों ने पुलिस के साथ मिलकर कुत्तों को बचाया और उनके लिए सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था की।

पशु संरक्षण संगठनों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस और स्थानीय संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल होने से जानवरों को समय रहते बचाया जा सकता है।

गुवाहाटी के पशु देखभाल केंद्र में पहुंचाए गए कुत्ते

रेस्क्यू के बाद सभी कुत्तों को पहले कार्बी आंगलोंग के पशु चिकित्सा विभाग की निगरानी में रखा गया। इसके कुछ घंटों बाद उन्हें गुवाहाटी स्थित JBF के इंटीग्रेटेड केयर एंड रिसोर्स सेंटर फॉर एनिमल वेलफेयर में पहुंचाया गया। इस केंद्र में पशु चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार किया जा रहा है। जरूरत के अनुसार कुत्तों के स्वास्थ्य की जांच और देखभाल की जाएगी।

संगठनों ने बताया कि कुत्तों के पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उन्हें गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए ऐसे परिवारों की तलाश की जाएगी, जो उनकी उचित देखभाल कर सकें।

असम से दूसरे राज्यों में कुत्तों की तस्करी का दावा

ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया के अनुसार, पूर्वोत्तर भारत में कुत्तों के अवैध मांस व्यापार की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। संगठन के शोध के मुताबिक, असम में हर साल बड़ी संख्या में कुत्तों को सड़कों से पकड़कर या चोरी करके दूसरे राज्यों में ले जाए जाने की आशंका रहती है। इनमें मिजोरम और नागालैंड जैसे पड़ोसी राज्यों का जिक्र किया गया है।

संगठन का कहना है कि इस तरह के अवैध परिवहन से जानवरों को गंभीर चोट, तनाव और दूसरी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सालाना तस्करी के आंकड़े पशु संरक्षण संगठन के अनुमानों पर आधारित हैं। इन्हें पुलिस द्वारा सत्यापित मामलों की संख्या नहीं समझना चाहिए।

इस साल अब तक 69 कुत्तों का रेस्क्यू

JBF के संस्थापक डॉ. शशांक दत्ता ने बताया कि इस साल उनके संगठन की भागीदारी में यह तीसरा बड़ा रेस्क्यू अभियान है। उनके मुताबिक, इन अभियानों में अब तक कुल 69 कुत्तों को बचाया जा चुका है।

उन्होंने कहा कि पुलिस के सहयोग से ऐसे मामलों में कार्रवाई करना आसान होता है। हालांकि, बचाए गए जानवरों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटाना भी बड़ी जिम्मेदारी है। डॉ. दत्ता ने पशु प्रेमियों से अपील की कि वे स्वस्थ होने वाले कुत्तों को गोद लेने के लिए आगे आएं।

मांस व्यापार छोड़ने वालों को मिल रहा दूसरा रोजगार

ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया केवल रेस्क्यू अभियान ही नहीं चला रहा, बल्कि कुत्तों के मांस व्यापार से जुड़े लोगों को वैकल्पिक रोजगार अपनाने में भी मदद कर रहा है। संगठन के अनुसार, नागालैंड में इस साल 50 से अधिक लोगों ने स्वेच्छा से यह कारोबार छोड़कर दूसरा काम शुरू किया है।

अब तक ऐसे कार्यक्रम से जुड़ने वाले लोगों की कुल संख्या 80 हो गई है। संगठन का मानना है कि अवैध व्यापार रोकने के साथ लोगों को रोजगार के दूसरे अवसर देना भी जरूरी है।

जानवरों की तस्करी रोकने के लिए निगरानी जरूरी

इस घटना ने एक बार फिर पशुओं के अवैध परिवहन और उनके साथ होने वाली क्रूरता का मुद्दा उठाया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जानवरों को बंद बोरियों में रखना और उनके मुंह बांधकर ले जाना उनकी सेहत और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

फिलहाल बचाए गए 26 कुत्तों की देखभाल की जा रही है। पुलिस की जांच से स्पष्ट होगा कि उन्हें किस उद्देश्य से ले जाया जा रहा था और इस मामले में कौन जिम्मेदार है।

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