Karwa Chauth 2026: वाराणसी में शाम 7:57 बजे चंद्रोदय, बादलों से चांद दिखने में हो सकती है परेशानी

वाराणसी में करवा चौथ पर शाम 7:57 बजे चांद निकलने का समय है। चक्रवात अर्नब के कारण बादल चंद्रदर्शन में बाधा बन सकते हैं। जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधिऔर मंत्र।

करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जा रहा है। वाराणसी में चंद्रोदय का समय शाम 7:57 बजे बताया गया है। चक्रवात अर्नब के असर से छाए बादल चंद्रदर्शन में बाधा बन सकते हैं। जानिए पूजा विधि और मंत्र।

वाराणसी: करवा चौथ पर इस बार मौसम व्रत रखने वाली महिलाओं की परेशानी बढ़ा सकता है। पूर्वांचल में चक्रवात अर्नब के प्रभाव से बादल छाए हैं और कई जगह बारिश हो रही है। ऐसे में शाम को चांद दिखाई देने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। वाराणसी के कुछ पंचांगों के अनुसार, गुरुवार को शाम 7:57 बजे चंद्रोदय होगा। हालांकि, अलग-अलग पंचांगों में समय का थोड़ा अंतर है। महिलाएं गौरी-गणेश और भगवान शिव की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ पर कितने बजे निकलेगा चांद?

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ मनाया जाता है। इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस साल यह पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को पड़ रहा है।

Karwa Chauth 2026: वाराणसी में शाम 7:57 बजे चंद्रोदय, बादलों से चांद दिखने में हो सकती है परेशानी

वाराणसी के लिए चंद्रोदय का समय शाम 7:57 बजे बताया गया है। हालांकि, कुछ पंचांगों में रात 8:02 बजे का समय भी दिया गया है। यह अंतर गणना की पद्धति के कारण हो सकता है।

करवा चौथ में चंद्रमा का विशेष महत्व है। पारंपरिक रूप से महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को चांद देखने के बाद अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं।

वाराणसी में शाम की पूजा के लिए पंचांग के अनुसार लगभग 5:19 बजे से 6:36 बजे तक का समय बताया गया है।

बादलों के कारण चांद दिखने में हो सकती है देरी

पूर्वांचल में गुरुवार सुबह से मौसम बदला हुआ है। वाराणसी और आसपास के जिलों में बादल छाए रहने के साथ बारिश की खबरें सामने आई हैं।

इसका असर शाम के चंद्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। यदि रात तक आसमान साफ नहीं हुआ तो चांद निकलने के निर्धारित समय पर भी दिखाई नहीं देगा।

हालांकि, चंद्रोदय और चांद का दिखाई देना दो अलग बातें हैं। बादल होने से चंद्रमा के निकलने का समय नहीं बदलता, लेकिन उसे देखने में परेशानी हो सकती है।

ऐसी स्थिति में व्रत रखने वाली महिलाएं अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय धर्माचार्य की सलाह के अनुसार पूजा कर सकती हैं।

करवा चौथ पर इस मंत्र से करें माता गौरी की पूजा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय के अनुसार, करक चतुर्थी का व्रत सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ा है।

इस दिन सौभाग्य की देवी माता गौरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान यह मंत्र पढ़ा जाता है।

माता गौरी का पूजा मंत्र
शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं सन्ततिं शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंत्र के जरिए माता गौरी से सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

इसके साथ भगवान गणेश, शिव, कार्तिकेय और चंद्रदेव की भी पूजा की जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की क्या है परंपरा?

करवा चौथ में शाम के समय पूजा करने के बाद चंद्रदर्शन का इंतजार किया जाता है। परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार पूजा की विधि में थोड़ा अंतर हो सकता है।

आमतौर पर महिलाएं पूजा की थाली में दीपक, जल का पात्र और अन्य सामग्री रखती हैं। चंद्रमा दिखाई देने पर उसे जल अर्पित किया जाता है।

इसके बाद पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना की जाती है। कई परिवारों में छलनी से चंद्रमा देखने की भी परंपरा है।

पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं।

करवा चौथ के व्रत का धार्मिक महत्व

श्रीकाशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, धार्मिक ग्रंथों में करवा चौथ को महिलाओं के सौभाग्य से जुड़ा व्रत बताया गया है।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक शास्त्रीय विधान में इस व्रत का अधिकार महिलाओं को दिया गया है और इसमें आयु, जाति या संप्रदाय का भेद नहीं माना गया है।

करवा चौथ की पूजा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार की जाती है। कहीं महिलाएं सामूहिक रूप से व्रत कथा सुनती हैं तो कहीं परिवार में ही पूजा की जाती है।

इस वर्ष वाराणसी में बादलों के कारण चंद्रदर्शन को लेकर असमंजस बना हुआ है। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं को स्थानीय चंद्रोदय समय और मौसम की स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।

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