केरल की कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार ने 2006 के एमसी रोड प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार की जांच जारी रखने का फैसला किया है। उस समय वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार राज्य के लोक निर्माण विभाग में सचिव थे। मंत्री पी.के. बशीर ने विधानसभा में बताया कि विजिलेंस की नई प्रारंभिक जांच चल रही है, लेकिन इसकी रिपोर्ट अभी नहीं मिली है।
तिरुवनंतपुरम: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े करीब 20 साल पुराने सड़क निर्माण मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में है। केरल सरकार ने 2006 के एमसी रोड प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की नई जांच शुरू कराई है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को विधानसभा में लोक निर्माण मंत्री पी.के. बशीर ने बताया कि राज्य का सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) मामले की प्रारंभिक जांच कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं मिली है। ज्ञानेश कुमार उस समय केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) में सचिव के पद पर कार्यरत थे।
विधानसभा में मंत्री पी.के. बशीर ने क्या बताया?
केरल विधानसभा में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायकों ने पुराने सड़क निर्माण प्रोजेक्ट की जांच पर सरकार से जवाब मांगा। भाजपा विधायक बी.बी. गोपकुमार, वी. मुरलीधरन और राजीव चंद्रशेखर ने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में विजिलेंस जांच की वर्तमान स्थिति क्या है।
इस पर मंत्री पी.के. बशीर ने बताया कि मामले में नई प्रारंभिक जांच के आदेश दिए गए हैं। विजिलेंस विभाग पुराने रिकॉर्ड और आरोपों की समीक्षा कर रहा है। मंत्री ने कहा कि 2006 में हुई जांच में कुछ कमियां सामने आई थीं। इसी वजह से सरकार ने मामले को दोबारा देखने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला किया जाएगा।
क्या है 2006 का एमसी रोड प्रोजेक्ट?
यह मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) से जुड़ा है। इसके तहत विश्व बैंक की सहायता से राज्य की प्रमुख सड़कों का विकास किया जाना था। वर्ष 2006 में अंगमाली से तिरुवनंतपुरम तक एमसी रोड के पुनर्निर्माण का काम चल रहा था। उस समय संबंधित सड़क परियोजना की लागत करीब 215 करोड़ रुपये बताई गई थी।
इस परियोजना का ठेका मलेशिया की एक कंपनी और भारतीय कंपनी भागीरथ इंजीनियरिंग के संयुक्त उपक्रम PATI-BEL को मिला था। ज्ञानेश कुमार उस समय लोक निर्माण विभाग में सचिव थे। परियोजना के दौरान बिलों के भुगतान और निर्माण कार्य से जुड़ी कई शिकायतें सामने आई थीं।
दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप ठेकेदारों के बिल पास कराने के बदले दो करोड़ रुपये मांगने का है। परियोजना से जुड़े एक ठेकेदार साजन बी.ओ. ने दावा किया है कि अधिकारियों की ओर से भुगतान रोककर रिश्वत की मांग की गई थी। उनके अनुसार, मलेशियाई कंपनी के मुख्य परियोजना प्रबंधक ली सी बीन को बिलों का भुगतान हासिल करने में परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
ठेकेदार ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के सचिव रहने के दौरान भुगतान संबंधी मंजूरी में देरी हुई। उन्होंने इस मामले से जुड़े दस्तावेज विजिलेंस विभाग को सौंपने की बात भी कही है। हालांकि, रिश्वत मांगने का आरोप अभी जांच के दायरे में है। इसे किसी अदालत द्वारा साबित अपराध नहीं माना जा सकता।
मलेशियाई इंजीनियर की मौत से भी जुड़ा है मामला
सड़क निर्माण प्रोजेक्ट के दौरान मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन की मौत ने भी सवाल खड़े किए थे।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना से जुड़ी वित्तीय परेशानियों के बीच वह मलेशिया लौट गए थे, जहां उनकी आत्महत्या से मौत हो गई थी।
बताया गया कि उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले परियोजना में भुगतान संबंधी परेशानियों और अधिकारियों की भूमिका को लेकर शिकायतें की थीं।
इसी घटना के बाद 2006 में विजिलेंस जांच शुरू हुई थी। हालांकि, जांच कथित तौर पर पूरी हुए बिना ही संबंधित फाइलें बंद कर दी गई थीं।
अब नई जांच में पुराने दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और उस समय सामने आई शिकायतों की समीक्षा की जा रही है।
सरकार को 700 करोड़ के नुकसान का दावा
विधानसभा में लोक निर्माण मंत्री पी.के. बशीर ने कहा कि परियोजना से जुड़ी कथित अनियमितताओं के कारण सरकार को लगभग 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। मंत्री ने इस नुकसान के लिए संबंधित अधिकारियों की कथित अनियमितताओं का जिक्र किया।
हालांकि, इस राशि और जिम्मेदार व्यक्तियों को लेकर नई प्रारंभिक जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। विजिलेंस की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि पुराने आरोपों में कितना आधार है और क्या आगे विस्तृत जांच या कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
अक्टूबर में दोबारा क्यों शुरू हुई जांच?
इस मामले को लेकर केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी से जुड़े नेता मलयिनकीझु वेणुगोपाल ने शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 4 अक्टूबर को विजिलेंस विभाग को प्रारंभिक जांच के निर्देश दिए।
जांच का उद्देश्य पुराने सड़क निर्माण प्रोजेक्ट की फाइलों और संबंधित आरोपों की दोबारा समीक्षा करना है।
मंत्री पी.के. बशीर ने विधानसभा में कहा कि मामला लगभग दो दशक पुराना है। इसलिए सभी रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद ही सरकार किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
ज्ञानेश कुमार के मामले में आगे क्या होगा?
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। ऐसे में उनसे जुड़े पुराने भ्रष्टाचार के आरोपों की नई जांच राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हालांकि, 2006 में विभागीय सचिव रहना अपने आप किसी कथित वित्तीय गड़बड़ी में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। फिलहाल VACB की प्रारंभिक जांच जारी है। रिपोर्ट में यदि कोई ठोस आधार मिलता है, तो सरकार कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस नई जांच में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किसी आरोप के सिद्ध होने की पुष्टि नहीं हुई है










