जूना अखाड़े की पवित्र छड़ी यात्रा 29 अक्टूबर को पिथौरागढ़ पहुंची। आदि कैलास और ऊं पर्वत के दर्शन के बाद यात्रा में शामिल 72 साधु-संतों का स्वागत किया गया। अब यात्रा कुमाऊं के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ेगी।
पिथौरागढ़: उत्तराखंड के चारधाम और उच्च हिमालयी तीर्थस्थलों की यात्रा पर निकले पंच दशनाम जूना अखाड़े के साधु-संत गुरुवार, 29 अक्टूबर को पिथौरागढ़ पहुंचे। आदि कैलास और ऊं पर्वत के दर्शन के बाद यहां यात्रा दल का स्वागत किया गया। महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी वीरेन्द्रानंद महाराज के नेतृत्व में 72 संत इस यात्रा में शामिल हैं। पिथौरागढ़ में विश्राम के बाद यात्रा कुमाऊं के दूसरे मंदिरों और धार्मिक स्थलों की ओर रवाना होगी।
आदि कैलास और ऊं पर्वत तक पहुंचे साधु-संत
पवित्र छड़ी यात्रा के दौरान संतों ने उत्तराखंड के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना की। गढ़वाल क्षेत्र के चारधामों के दर्शन के बाद यात्रा कुमाऊं के मानसखंड क्षेत्र में पहुंची।
यात्रा दल तवाघाट स्थित शिव शक्ति आश्रम से आगे बढ़ते हुए पैदल आदि कैलास और ऊं पर्वत तक पहुंचा। यहां साधु-संतों ने धार्मिक परंपराओं के अनुसार दर्शन और पूजा की।
आदि कैलास उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित प्रमुख धार्मिक स्थल है। वहीं, ऊं पर्वत अपनी प्राकृतिक आकृति के लिए प्रसिद्ध है। पर्वत पर बर्फ से बनने वाली आकृति को श्रद्धालु ॐ के स्वरूप से जोड़कर देखते हैं।
इस यात्रा में इन दोनों स्थलों के दर्शन को महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया है।
द एशियन स्कूल में हुआ छड़ी यात्रा का स्वागत
उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लौटने के बाद यात्रा दल पिथौरागढ़ स्थित द एशियन स्कूल पहुंचा। यहां विद्यालय परिवार ने पवित्र छड़ी और साधु-संतों का स्वागत किया।
यात्रा में शामिल संतों ने विद्यालय में कुछ समय बिताया। इस दौरान यात्रा के धार्मिक महत्व और इसके उद्देश्य की जानकारी दी गई।
जूना अखाड़े की यह यात्रा उत्तराखंड के विभिन्न धार्मिक स्थलों को जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से प्रसिद्ध मंदिरों के साथ उन पौराणिक स्थलों तक भी पहुंचने की योजना है, जिनके बारे में आम लोगों को कम जानकारी है।
यात्रा का पहला चरण गढ़वाल मंडल के प्रमुख तीर्थस्थलों में पूरा हुआ था। बद्रीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के बाद संत मानसखंड की यात्रा पर आगे बढ़े थे।
शौर्यगाथा
अब गुरना माता मंदिर समेत इन धामों के होंगे दर्शन
पिथौरागढ़ में विश्राम के बाद यात्रा दल प्रसिद्ध गुरना माता मंदिर में दर्शन और पूजा करेगा। इसके बाद संतों का अगला पड़ाव लोहाघाट और चंपावत क्षेत्र में होगा।
यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम में गोलज्यू मंदिर और हिंगलाज माता मंदिर के दर्शन भी शामिल हैं। इसके बाद संत मां पूर्णागिरि धाम और गर्जिया माता मंदिर जाएंगे।
इन धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना पूरी करने के बाद यात्रा दल का हरिद्वार स्थित श्यामपुर के प्रेम गिरि आश्रम में रात्रि विश्राम का कार्यक्रम है।
इसके बाद पवित्र छड़ी को बागेश्वर धाम ले जाने की योजना बताई गई है। यात्रा के दौरान संत अलग-अलग स्थानों की धार्मिक परंपराओं से भी जुड़ रहे हैं।
हरिद्वार से शुरू हुई थी यात्रा की तैयारी
पंच दशनाम जूना अखाड़े ने इस वर्ष पवित्र छड़ी यात्रा का कार्यक्रम सात अक्टूबर से निर्धारित किया था। यात्रा की तैयारी के दौरान अखाड़े के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की थी।
योजना के अनुसार, यात्रा में उत्तराखंड के चारधामों के अलावा गढ़वाल और कुमाऊं के पौराणिक तीर्थस्थलों को शामिल किया गया।
अगस्त में जारी कार्यक्रम के मुताबिक, यात्रा का समापन 30 अक्टूबर तक प्रस्तावित था। हालांकि, अक्टूबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि संतों का दल 14 अक्टूबर को हरिद्वार के माया देवी मंदिर से रवाना हुआ था।
सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को जोड़ना है उद्देश्य
यात्रा प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी वीरेन्द्रानंद महाराज के अनुसार, पवित्र छड़ी यात्रा का उद्देश्य केवल मंदिरों में दर्शन करना नहीं है।
इसके जरिए केदारखंड यानी गढ़वाल और मानसखंड यानी कुमाऊं की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यात्रा में विश्व शांति, सुख-समृद्धि और मानव कल्याण की कामना भी की जा रही है।
जूना अखाड़े के पदाधिकारी पहले भी इस यात्रा के माध्यम से उत्तराखंड के कम प्रसिद्ध तीर्थस्थलों को पहचान दिलाने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं।
पिथौरागढ़ में स्वागत के बाद यात्रा अब अपने अगले पड़ावों की ओर बढ़ेगी। संतों के तय कार्यक्रम के अनुसार शेष मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना की जाएगी।










