सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एसके कौल ने CJP नेता सौरव दास से अपने संबंधों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वह दिवाली पार्टी में कुछ मिनट के लिए गए थे। महेश जेठमलानी ने दोनों की तस्वीरों पर सवाल उठाए थे।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस संजय किशन कौल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास से अपने संबंधों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया है। बुधवार, 28 अक्टूबर को सामने आए न्यूज एजेंसी एएनआई के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सौरव से उनकी मुलाकात पत्रकार के तौर पर हुई थी। उन्होंने कभी उनका मार्गदर्शन नहीं किया। इससे पहले वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद महेश जेठमलानी ने दोनों की एक पुरानी तस्वीर को लेकर सवाल उठाए थे।
दिवाली पार्टी में क्यों गए थे जस्टिस एसके कौल?
जस्टिस कौल ने बताया कि सौरव दास के साथ उनकी जो तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है, वह करीब एक साल पुरानी है। उस समय सौरव पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे और उनसे एक-दो बार मिल चुके थे। कौल के मुताबिक, दिवाली के दौरान सौरव ने उन्हें अपने यहां आने का निमंत्रण दिया था। वह पहले से किसी दूसरे कार्यक्रम में जा रहे थे, लेकिन बार-बार आग्रह करने पर थोड़ी देर के लिए वहां पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पत्नी को कॉफी पीने के लिए कहकर वह करीब दस मिनट के लिए कार्यक्रम में गए थे। इसके बाद वहां से निकल गए। कौल का कहना है कि उनकी मुलाकात को किसी राजनीतिक विचारधारा या संगठन से जोड़कर देखना सही नहीं है।
सौरव दास को मार्गदर्शन देने के सवाल पर क्या बोले?
इंटरव्यू में जस्टिस कौल से पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सौरव दास को राजनीतिक या सामाजिक गतिविधियों के लिए सलाह दी थी। इस पर उन्होंने साफ किया कि वह सौरव के मेंटर नहीं रहे हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ मुलाकातों में सौरव को अपनी भाषा संयमित रखने की सलाह जरूर दी थी। कौल ने कहा कि उनकी पीढ़ी के लोग बातचीत में शालीन भाषा को ज्यादा महत्व देते हैं। आज की युवा पीढ़ी, खासकर जेनरेशन जेड के बोलने का तरीका कई बार अलग होता है।
उनके मुताबिक, असहमति जताने के दौरान भी शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। कई बार इस्तेमाल की जाने वाली तीखी भाषा पुरानी पीढ़ी के लोगों को असहज कर देती है।
महेश जेठमलानी ने किन बातों पर उठाए सवाल?
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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने मंगलवार, 27 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जस्टिस कौल की टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने सौरव दास के दिवाली कार्यक्रम में जस्टिस कौल की मौजूदगी पर भी आपत्ति जताई थी। जेठमलानी ने इस मुलाकात को लेकर कई सवाल किए और इसे मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ने की कोशिश की।
उन्होंने जस्टिस कौल के हालिया बयानों के समय पर भी सवाल उठाए। जेठमलानी का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मामले लंबित हैं। हालांकि, उनके ये आरोप और सवाल हैं। इनसे जस्टिस कौल तथा सौरव दास के बीच किसी राजनीतिक साझेदारी की पुष्टि नहीं होती।
CJP के युवाओं को सलाह देने से किया इनकार
जस्टिस कौल से यह भी पूछा गया कि क्या वह कॉकरोच जनता पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को अपना विरोध जताने का तरीका बदलने की सलाह देंगे। इस सवाल पर उन्होंने कोई सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि यदि वह संगठन के कार्यकर्ताओं को सलाह देंगे, तो इसे उनके राजनीतिक मार्गदर्शन के तौर पर पेश किया जा सकता है। कौल ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को सामान्य बातचीत में अपनी भाषा सुधारने के लिए कहना और किसी संगठन को सलाह देना अलग बातें हैं।
पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ पर टिप्पणी के बाद बढ़ी चर्चा
जस्टिस कौल हाल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की कार्यप्रणाली को लेकर की गई टिप्पणियों के कारण भी चर्चा में रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े मामलों में कॉलेजियम के औपचारिक फैसले से पहले सरकार के साथ चर्चा होती थी। महेश जेठमलानी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि न्यायिक स्वतंत्रता का आकलन किसी पूर्व न्यायाधीश के अपने दावों के बजाय उनके फैसलों के आधार पर होना चाहिए।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई थीं तस्वीरें
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 13 अक्टूबर को CJP कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद सौरव दास और अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई हुई थी। इस मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत से रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने और कानूनी शर्तों का पालन करने का लिखित आश्वासन देना पड़ा था। इसी घटनाक्रम के बीच जस्टिस कौल और सौरव दास की पुरानी तस्वीरों को लेकर चर्चा शुरू हुई।









