मेरठ के BIT ग्लोबल स्कूल में बुधवार को वार्षिकोत्सव 'प्रवाह' आयोजित किया गया। जर्मनी से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामने बच्चों ने भारतीय इतिहास, लोकसंस्कृति और वैज्ञानिक तरक्की पर प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में दोनों देशों के बीच शैक्षिक सहयोग पर भी बातचीत हुई।
मेरठ: बीआईटी ग्लोबल स्कूल का वार्षिकोत्सव इस बार कुछ अलग अंदाज में मनाया गया। स्कूल के मंच पर कभी वैदिक काल की झलक दिखी, तो कभी आजादी की लड़ाई और आधुनिक भारत की उपलब्धियां सामने आईं। बुधवार, 28 अक्टूबर को आयोजित 'प्रवाह' कार्यक्रम में जर्मनी से आए मेहमान भी शामिल हुए। विद्यार्थियों ने नृत्य, संगीत और नाटक के जरिए देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ विज्ञान और तकनीक में हुई प्रगति को दर्शकों के सामने रखा।
जर्मनी से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों का हुआ स्वागत
वार्षिकोत्सव में जर्मन-इंडियन सोसाइटी के फेडरल बोर्ड की उपाध्यक्ष और स्टटगार्ट स्थित इंटरनेशनल प्रोजेक्ट सेंटर की निदेशक एंजेलिका हाफ मुख्य अतिथि रहीं। उनके साथ जर्मनी की शिक्षिकाएं डामारिस रेबर, जेनिफर हाइस, अन्ना लीना मिल्च और शिक्षक निक जेनिन भी पहुंचे। जर्मन छात्र प्रतिनिधिमंडल ने भी समारोह में हिस्सा लिया।
स्कूल प्रबंधन ने विदेशी मेहमानों का फूलमालाओं और गुलदस्तों से स्वागत किया। कार्यक्रम में मेरठ के विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्य, शिक्षाविद, अभिभावक और अन्य अतिथि भी मौजूद रहे।
समारोह की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। प्रधानाचार्य एनपी सिंह ने स्कूल की वार्षिक रिपोर्ट रखी। उन्होंने पिछले एक वर्ष में पढ़ाई, खेल और दूसरी गतिविधियों में विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बारे में बताया। साथ ही स्कूल में हुए शैक्षिक विकास की जानकारी भी साझा की।
जर्मनी से आए विद्यार्थियों ने भी अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। भारतीय और जर्मन बच्चों को एक ही मंच पर अपनी-अपनी संस्कृति दिखाने का अवसर मिला।
नृत्य-नाटिका 'प्रवाह' में दिखा वैदिक काल से आधुनिक भारत तक का सफर
समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा नृत्य-नाटिका 'प्रवाह' की रही। इसमें बच्चों ने भारत के इतिहास के अलग-अलग दौर को मंच पर दिखाया। वैदिक काल से शुरू हुई प्रस्तुति आजादी के आंदोलन, स्वतंत्र भारत के निर्माण और देश की वर्तमान उपलब्धियों तक पहुंची।
विद्यार्थियों ने हरित क्रांति और श्वेत क्रांति को भी अपनी प्रस्तुति में जगह दी। इनके जरिए खेती और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश में आए बदलावों को दिखाया गया। हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता और उसके महत्व पर भी कार्यक्रम प्रस्तुत हुआ।
नारी शक्ति और शिक्षा के विस्तार से जुड़े हिस्से भी नृत्य-नाटिका में शामिल किए गए। बच्चों ने अभिनय और नृत्य के जरिए समाज में महिलाओं की भूमिका और पढ़ाई के बढ़ते महत्व को सामने रखा।
आधुनिक भारत की कहानी में अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को भी शामिल किया गया। इन प्रस्तुतियों के जरिए बताया गया कि देश अब नई तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में किस तरह आगे बढ़ रहा है।
असम, पंजाब और राजस्थान के लोकनृत्यों ने बांधा समां
कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों की संस्कृति भी देखने को मिली। असम, पंजाब और राजस्थान के लोकनृत्यों पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की पारंपरिक वेशभूषा, क्षेत्रीय संगीत और मंच सज्जा ने इन कार्यक्रमों को खास बनाया।
इन लोकनृत्यों के जरिए भारत में अलग-अलग भाषा, पहनावे और रीति-रिवाज होने के बावजूद आपसी जुड़ाव का संदेश दिया गया। विदेशी मेहमानों को भी भारतीय लोकसंस्कृति के कई रंग देखने का मौका मिला।
भारतीय और जर्मन विद्यार्थियों ने साझा किए पढ़ाई के अनुभव
मुख्य समारोह से पहले स्कूल में एक शैक्षिक संवाद कार्यक्रम भी रखा गया था। इसमें भारत और जर्मनी के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। दोनों देशों में पढ़ाई के तरीके, स्कूलों की गतिविधियों और नई शिक्षण तकनीकों को लेकर बातचीत हुई।
प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विद्यार्थियों को एक-दूसरे की शिक्षा व्यवस्था के बारे में जानने का अवसर मिला। शिक्षकों ने भी पढ़ाने के तरीकों और नए प्रयोगों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
इस शैक्षिक आदान-प्रदान का मकसद बच्चों को दूसरे देशों की संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था से परिचित कराना था। साथ ही दोनों देशों के स्कूलों के बीच आपसी सहयोग और बेहतर समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि एंजेलिका हाफ ने कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाया। समारोह के अंत में प्रधानाचार्य एनपी सिंह ने जर्मन प्रतिनिधिमंडल, अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों का धन्यवाद किया।







