तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सामाजिक न्याय सर्वे कराने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में आयोग बनाने को मंजूरी मिली। इसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। सर्वे अगले साल प्रस्तावित है।
चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने राज्य में सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक सर्वे कराने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को चेन्नई सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में सामाजिक न्याय सर्वे के लिए एक आयोग गठित करने को मंजूरी दी गई। आयोग की अध्यक्षता हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे। इसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों की सामाजिक स्थिति का आकलन करना और उनके विकास में आने वाली परेशानियों की पहचान करना है।
डेढ़ घंटे चली कैबिनेट बैठक में लिया फैसला
मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में गुरुवार को राज्य मंत्रिमंडल की तीसरी बैठक हुई। यह बैठक चेन्नई स्थित सचिवालय में करीब डेढ़ घंटे चली। बैठक के बाद ऊर्जा एवं कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने मीडिया को सरकार के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय सर्वे के लिए बहुसदस्यीय आयोग बनाया जाएगा।
आयोग में सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी शामिल होंगे। सर्वे किस तरीके से किया जाएगा और इसके लिए किन नियमों का पालन करना होगा, यह आयोग के गठन के बाद तय किया जाएगा। सरकार ने अभी आयोग के अध्यक्ष और दूसरे सदस्यों के नाम घोषित नहीं किए हैं।
फरवरी या मार्च 2027 में बन सकता है आयोग
तमिलनाडु सरकार की योजना अगले साल सामाजिक न्याय सर्वे शुरू करने की है। मंत्री निर्मल कुमार के अनुसार, आयोग का गठन फरवरी या मार्च 2027 के आसपास किया जा सकता है। हालांकि, सर्वे की शुरुआत केंद्र सरकार की जनगणना और जातिगत गणना पूरी होने के बाद प्रस्तावित है। इसलिए इसके लिए अभी कोई अंतिम तारीख घोषित नहीं की गई है।
राज्य सरकार पहले आयोग का ढांचा और कार्यप्रणाली तय करेगी। इसके बाद सर्वे के लिए जरूरी तैयारियां की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से मिले आंकड़े सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
सामाजिक न्याय सर्वे में क्या जानकारी जुटाई जाएगी?
प्रस्तावित सर्वे का मकसद केवल अलग-अलग जातियों की आबादी का पता लगाना नहीं है। सरकार समुदायों की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच के बारे में भी जानकारी जुटाना चाहती है।
इसमें परिवारों की आय, रोजगार, जमीन के स्वामित्व और बच्चों की पढ़ाई जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। स्कूल और कॉलेजों में दाखिले, बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने वाले परिवारों की स्थिति का भी अध्ययन प्रस्तावित है।
सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु पहले बता चुके हैं कि राज्य में आदि द्रविड़ समुदाय की सामाजिक और आर्थिक स्थिति समझने के लिए विस्तृत सर्वे की जरूरत है। इससे सरकार को यह पहचानने में मदद मिल सकती है कि किन क्षेत्रों और समुदायों को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है।
केंद्र की जातिगत जनगणना से कितना अलग होगा सर्वे?
तमिलनाडु सरकार का प्रस्तावित सामाजिक न्याय सर्वे केंद्र सरकार की जातिगत जनगणना से अलग होगा। केंद्र की गणना से विभिन्न समुदायों की आबादी का विवरण मिलेगा, जबकि राज्य सरकार का सर्वे उनके सामाजिक और आर्थिक हालात पर अधिक ध्यान देगा। राज्य सरकार यह जानना चाहती है कि अलग-अलग समुदायों को शिक्षा, रोजगार, जमीन और सरकारी सहायता जैसी सुविधाएं कितनी मिल रही हैं।
इन आंकड़ों के आधार पर भविष्य में सरकारी योजनाओं और नीतियों की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि, सर्वे के परिणामों के आधार पर किन नीतियों में बदलाव होगा, इस बारे में अभी कोई फैसला घोषित नहीं किया गया है।
विजय सरकार के चुनावी वादों में शामिल था सर्वे
सामाजिक न्याय सर्वे कराना तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के प्रमुख चुनावी वादों में शामिल रहा है। विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई विजय सरकार अब इस वादे पर आगे बढ़ रही है। राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर ने भी विधानसभा में अपने अभिभाषण के दौरान सामाजिक न्याय सर्वे कराने की सरकार की योजना का उल्लेख किया था। सरकार का मानना है कि अलग-अलग समुदायों की सही सामाजिक स्थिति सामने आने से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में आसानी होगी। इस फैसले का पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने स्वागत किया है। उन्होंने सर्वे की तैयारियां जल्द पूरी करने की मांग की है।
आठ औद्योगिक प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट बैठक में सामाजिक न्याय सर्वे के अलावा औद्योगिक विकास से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने आठ कंपनियों के औद्योगिक प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसके अलावा चेन्नई के पास थलंबूर में जमीन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए समिति बनाने का निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री विजय ने मंत्रियों से उनके विभागों के कामकाज की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों के साथ तालमेल बनाए रखने और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उत्तर-पूर्वी मानसून को देखते हुए संबंधित जिलों में जरूरी तैयारियां करने के निर्देश भी दिए गए।








