शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत ने युवाओं को दी किताबें पढ़ने की सलाह, कहा- अपनी सोच विकसित करें

सिक्किम के शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत ने गंगटोक साहित्य महोत्सव मे युवाओं को किताबे पढ़ने की सलाह दी। उन्होंने स्वतंत्र सोच, मातृभाषा और संस्कृति का महत्व बताया।

सिक्किम के शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत ने युवाओं से नियमित किताबें पढ़ने की अपील की है। गंगटोक में आयोजित दूसरे सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव में उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत से स्वतंत्र सोच, समझ और रचनात्मकता विकसित होती है। उन्होंने मातृभाषा में विचार व्यक्त करने और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।

गंगटोक: सिक्किम के शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत ने युवाओं को किताबें पढ़ने की आदत विकसित करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा पास करना या अच्छे अंक हासिल करना नहीं है। किताबें इंसान को अपने आसपास की दुनिया समझने, सवाल पूछने और किसी विषय पर अपनी राय बनाने में मदद करती हैं। बुधवार, 28 अक्टूबर को गंगटोक में दूसरे सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव के उद्घाटन समारोह में उन्होंने छात्रों से ज्यादा से ज्यादा पुस्तकें पढ़ने और अपनी भाषा में विचार व्यक्त करने का आग्रह किया।

किताबें पढ़ने से युवाओं की सोच होगी मजबूत

साहित्य महोत्सव को संबोधित करते हुए राजू बस्नेत ने कहा कि युवाओं के बौद्धिक विकास में किताबों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अलग-अलग विषयों की पुस्तकें पढ़ने से नई जानकारी मिलती है और किसी मुद्दे को कई नजरिए से समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने छात्रों से कहा कि केवल दूसरों की बातों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी समझ विकसित करनी चाहिए। इसके लिए नियमित पढ़ना और पढ़ी हुई बातों पर विचार करना जरूरी है।

शिक्षा मंत्री के मुताबिक, किताबें युवाओं को अपनी अलग पहचान और आवाज विकसित करने में मदद करती हैं। पढ़ने की आदत से वे अपने विचार स्पष्ट तरीके से सामने रख सकते हैं और समाज से जुड़े विषयों पर बेहतर समझ बना सकते हैं।

मातृभाषा को रचनात्मकता में बाधा न मानें

राजू बस्नेत ने कार्यक्रम में मातृभाषा के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की भाषा उसके विचारों या रचनात्मक क्षमता को सीमित नहीं करती। उनके अनुसार, अच्छे विचार किसी भी भाषा में सामने आ सकते हैं। जरूरी यह है कि व्यक्ति के पास ज्ञान हो और वह अपनी बात आत्मविश्वास के साथ रख सके।

उन्होंने युवाओं को अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े रहने की सलाह दी। सिक्किम में कई भाषाएं बोली जाती हैं और अलग-अलग समुदायों की साहित्यिक परंपराएं हैं। शिक्षा मंत्री का मानना है कि इन भाषाओं में मौजूद कहानियों और विचारों को आगे बढ़ाने के लिए नई पीढ़ी को साहित्य से जुड़ना चाहिए।

तीन दिन तक चलेगा कला और साहित्य महोत्सव

सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव का दूसरा संस्करण 28 अक्टूबर को गंगटोक के रिज पार्क में शुरू हुआ। इसका आयोजन 30 अक्टूबर तक किया जा रहा है। कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से लेखक, कवि, कलाकार और साहित्य प्रेमी शामिल हो रहे हैं। यहां किताबों, संस्कृति, संगीत और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा के लिए कई सत्र रखे गए हैं।

इस आयोजन की पहल मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने की है। महोत्सव सिक्किम सरकार के शिक्षा विभाग और स्टूडेंट्स वेलफेयर बोर्ड की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इसके आयोजन में टीमवर्क आर्ट्स सहयोग कर रही है, जो जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल जैसे साहित्यिक कार्यक्रमों से भी जुड़ी रही है।

सिक्किम के पहाड़ों और संस्कृति पर भी की बात

शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सिक्किम की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य के पहाड़ों, गांवों और स्थानीय समुदायों के पास कहने के लिए अनेक कहानियां हैं। यहां की प्रकृति, जैव विविधता और जैविक जीवनशैली लेखकों तथा कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

बस्नेत ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय कहानियों को केवल मौखिक परंपराओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इन्हें किताबों, कला और दूसरी रचनात्मक विधाओं के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। उनके मुताबिक, साहित्य महोत्सव ऐसे विचारों को सामने लाने और राज्य की पहचान को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का अवसर देता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई महोत्सव की शुरुआत

साहित्य महोत्सव के पहले दिन रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। गंग्येप के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय की छात्राओं के बैंड ने अंग्रेजी और हिंदी गीतों की प्रस्तुति दी। दर्शकों ने छात्राओं के संगीत कार्यक्रम की सराहना की।

सिक्किम सरकार के संस्कृति विभाग ने भी एक विशेष नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इसमें भूटिया, लेप्चा और नेपाली समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं तथा आपसी एकता को दिखाया गया। कार्यक्रम में इतिहासकार और लेखक विलियम डेलरिम्पल ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने इतिहास और लेखन से जुड़े सत्र में ताशी चोपेल के साथ बातचीत की। पहले दिन के कार्यक्रम का समापन आगाज समूह की गजल प्रस्तुतियों के साथ हुआ।

कई प्रसिद्ध लेखक और कलाकार होंगे शामिल

तीन दिवसीय महोत्सव में ममांग दाई, रणजीत होस्कोटे, नवराज पराजुली, स्टीफन ऑल्टर और चुडेन काबिमो जैसे लेखक शामिल हैं। यहां साहित्य के साथ पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, लोककथाओं और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी चर्चा हो रही है।

संगीत कार्यक्रमों में इंडियन ओशन, कबीर कैफे और दूसरे कलाकारों की प्रस्तुतियां भी निर्धारित हैं। महोत्सव का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को ऐसे लोगों से मिलने का अवसर देना है, जो लेखन, संगीत और कला के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

छात्रों को साहित्य से जोड़ने की पहल

सिक्किम सरकार इस महोत्सव के जरिए छात्रों में पढ़ने की रुचि बढ़ाना चाहती है। इसके लिए साहित्यिक चर्चा, कार्यशालाएं और लेखकों से बातचीत जैसे कार्यक्रम रखे गए हैं। यह आयोजन युवाओं को अपनी भाषा और आसपास की संस्कृति से जुड़ी कहानियां समझने का अवसर भी दे रहा है। शिक्षा मंत्री राजू बस्नेत का संदेश है कि किताबें पढ़ना केवल पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि अपनी सोच विकसित करने का भी तरीका है।

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