महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐप आधारित टैक्सी और दूसरी यात्री परिवहन सेवाओं की निगरानी के लिए आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का निर्देश दिया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से वाहनों, ड्राइवरों और उनके काम के घंटों की जानकारी मिलेगी। सरकार का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और कैब सेवाओं में पारदर्शिता लाना है।
मुंबई: महाराष्ट्र में Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित परिवहन सेवाओं की निगरानी के लिए राज्य सरकार नई डिजिटल व्यवस्था तैयार करने जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को परिवहन विभाग को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने के निर्देश दिए। इस प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े वाहनों, ड्राइवरों, उनकी ड्यूटी और यात्रियों की सेवाओं की जानकारी एक जगह उपलब्ध हो सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा के साथ परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र एग्रीगेटर नियम 2026 को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में परिवहन विभाग के कामकाज की जानकारी ली। बैठक में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं की बढ़ती संख्या, यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों से जुड़ी परेशानियों पर चर्चा हुई। फडणवीस ने अधिकारियों से कहा कि राज्य में एग्रीगेटर कंपनियों के संचालन की जानकारी वास्तविक समय में उपलब्ध कराने वाला डिजिटल सिस्टम तैयार किया जाए।
इस व्यवस्था के जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि किस कंपनी के कितने वाहन सड़कों पर चल रहे हैं, कौन-सा ड्राइवर कितने घंटे काम कर रहा है और यात्रियों को किस तरह सेवाएं दी जा रही हैं। बैठक में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक, परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय सेठी और परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
AI की मदद से कैब सेवाओं पर रखी जाएगी नजर
प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनालिटिक्स शामिल करने की योजना है। इसके जरिए वाहनों के संचालन, ड्राइवरों को यात्राएं आवंटित करने, पार्किंग प्रबंधन और यात्रियों से जुड़ी सेवाओं का विश्लेषण किया जा सकेगा।
सरकार चाहती है कि अलग-अलग कंपनियों की जरूरी जानकारी एक व्यवस्थित डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध हो, ताकि परिवहन विभाग को निगरानी और नियमों के पालन में मदद मिले। अभी एग्रीगेटर कंपनियां अपने-अपने मोबाइल ऐप के जरिए वाहन और ड्राइवरों का प्रबंधन करती हैं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य इन सेवाओं के संचालन से जुड़ी जरूरी जानकारी सरकारी निगरानी के दायरे में लाना है। हालांकि, प्लेटफॉर्म कब तैयार होगा और कंपनियों को कौन-कौन सा डेटा देना होगा, इसका विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है।
यात्रियों की सुरक्षा को मिलेगी प्राथमिकता
महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में लोग रोजाना ऐप आधारित टैक्सी और ऑटो सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा, ड्राइवरों की पहचान और वाहनों की जानकारी का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी माना जा रहा है। सरकार पहले ही महाराष्ट्र मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम 2026 लागू कर चुकी है। इन नियमों में वाहन पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा और जरूरी परमिट जैसी शर्तें रखी गई हैं।
नियमों के तहत वाहनों में ट्रैकिंग डिवाइस और आपातकालीन सहायता सुविधाओं का भी प्रावधान है। इसके अलावा यात्रियों की शिकायतों के समाधान और चौबीसों घंटे सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े नियम भी बनाए गए हैं। नया डिजिटल प्लेटफॉर्म इन व्यवस्थाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है।
ड्राइवरों के काम के घंटों पर भी होगी निगरानी
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में ड्राइवरों के काम करने की अवधि और उनकी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। महाराष्ट्र के एग्रीगेटर नियमों में ड्राइवरों के काम के घंटों को लेकर शर्तें निर्धारित की गई हैं। नियमों के अनुसार, एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म पर ड्राइवरों के काम करने की अधिकतम अवधि 12 घंटे निर्धारित है और जरूरी विश्राम का भी प्रावधान है। प्रस्तावित डिजिटल व्यवस्था से ड्राइवरों के कार्य समय की निगरानी करने में मदद मिल सकती है।
इससे लगातार लंबे समय तक वाहन चलाने जैसी समस्याओं की पहचान करना आसान होगा। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों में काम करने वाले ड्राइवरों के समय का रिकॉर्ड किस तरीके से जोड़ा जाएगा, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है।
स्वतंत्र टैक्सी ड्राइवरों की परेशानियों पर भी चर्चा
बैठक में उन टैक्सी ड्राइवरों की समस्याओं पर भी विचार किया गया, जो बड़ी एग्रीगेटर कंपनियों से जुड़े बिना अपनी सेवाएं देते हैं। ऐप आधारित परिवहन सेवाओं के विस्तार के कारण स्वतंत्र टैक्सी चालकों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।
इसके अलावा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यात्राओं के आवंटन और किराये से जुड़ी पारदर्शिता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को इन पहलुओं पर ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि नई व्यवस्था में यात्रियों और ड्राइवरों दोनों के हितों पर विचार किया जा सके।
महाराष्ट्र एग्रीगेटर नियम 2026 में क्या व्यवस्था है?
महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में मोटर वाहन एग्रीगेटर नियम अधिसूचित किए थे। इनके तहत ऐप आधारित परिवहन सेवाएं देने वाली कंपनियों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी किया गया है। नियमों में किराया निर्धारित करने, यात्रियों की शिकायतों का समाधान करने, ड्राइवरों के प्रशिक्षण और वाहनों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य परिवहन सेवाओं के लिए ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिसमें कंपनियों की जवाबदेही तय हो और यात्रियों को सुरक्षित सेवाएं मिल सकें। अब प्रस्तावित AI आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इन नियमों के पालन की निगरानी को और मजबूत करने की तैयारी है।
कब शुरू होगा नया डिजिटल प्लेटफॉर्म?
मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को प्लेटफॉर्म विकसित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इसके शुरू होने की निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। तकनीकी ढांचा तैयार होने के बाद कंपनियों से जानकारी जोड़ने, डेटा सुरक्षा और निगरानी की प्रक्रिया तय करनी होगी। फिलहाल महाराष्ट्र में एग्रीगेटर नियम 2026 लागू हैं और संबंधित कंपनियों को इनका पालन करना होगा।










