उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी में नियुक्ति से पहले होने वाले चरित्र सत्यापन के नियम बदल दिए हैं। 28 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में हिंसक गतिविधियों, आपराधिक मामलों और FIR को लेकर स्थिति साफ की गई है। हालांकि, केवल FIR दर्ज होने से किसी अभ्यर्थी की नौकरी नहीं रुकेगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चरित्र सत्यापन से जुड़ा नया आदेश आया है। योगी सरकार ने तय किया है कि हिंसा के जरिए व्यवस्था बदलने की कोशिश करने वाले संगठनों से जुड़े लोगों की सरकारी नौकरी में नियुक्ति पर रोक लग सकती है। नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग के प्रमुख सचिव एम. देवराज ने बुधवार, 28 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया है। इसमें यह भी बताया गया है कि किसी उम्मीदवार के खिलाफ FIR दर्ज होने या आपराधिक मामला चलने की स्थिति में नियुक्ति से पहले किन बातों की जांच की जाएगी। सिर्फ मुकदमा दर्ज होना किसी अभ्यर्थी को नौकरी से बाहर करने का आधार नहीं होगा।
हिंसक प्रदर्शन और गंभीर अपराधों पर क्या हैं नए नियम?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को केवल उसके राजनीतिक विचारों या किसी सामान्य विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण सरकारी नौकरी से नहीं रोका जा सकता। लेकिन यदि वह ऐसे संगठन से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य हिंसा के जरिए मौजूदा व्यवस्था को बदलना है, तो उसकी नियुक्ति पर रोक लग सकती है।
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नई नीति में पिछले तीन वर्षों की गतिविधियों को भी महत्व दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति 21 वर्ष की उम्र पूरी करने के बाद चरित्र सत्यापन से पहले के तीन वर्षों में ऐसी हिंसक गतिविधियों में शामिल रहा है, तो इसे उसकी सक्रिय भागीदारी का संकेत माना जा सकता है। हालांकि, इस दौरान उसके व्यवहार में सुधार होने के ठोस प्रमाण मिलने पर मामले का अलग मूल्यांकन किया जा सकेगा।
इसके अलावा हत्या, डकैती, दुष्कर्म, महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध, आतंकवादी गतिविधियों, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और सॉल्वर गैंग जैसे मामलों को भी सत्यापन में गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसे मामलों में उम्मीदवार की पात्रता अपराध की प्रकृति और कानूनी स्थिति के आधार पर तय होगी।
यानी केवल किसी आंदोलन में शामिल होना नौकरी से बाहर होने का आधार नहीं है। नियमों में मुख्य रूप से हिंसक गतिविधियों और गंभीर आपराधिक मामलों पर ध्यान दिया गया है।
FIR दर्ज है तो क्या सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी?
नई नीति में FIR को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की गई है। यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज है या किसी मामले की जांच चल रही है, तो उसे अपने आप सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा।
विभाग यह देखेगा कि मामला किस अपराध से जुड़ा है, उसकी वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है और उम्मीदवार के खिलाफ उपलब्ध रिकॉर्ड में क्या जानकारी है।
किसी मामले में बरी होने, समझौता होने या किशोर न्याय कानून से जुड़े मामलों को भी अलग परिस्थितियों के अनुसार देखा जाएगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ऐसे मामले में नौकरी मिलना तय है।
अभ्यर्थियों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे आवेदन करते समय अपने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी न छिपाएं। यदि किसी उम्मीदवार ने जानबूझकर गलत जानकारी दी या जरूरी तथ्य छिपाए, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है। उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
इसलिए जिन अभ्यर्थियों के खिलाफ कभी FIR दर्ज हुई है, उन्हें भर्ती फॉर्म में पूछी गई जानकारी सही तरीके से भरनी चाहिए।
किन भर्तियों पर लागू होगी नई नीति और कब से मिलेगा फायदा?
यूपी सरकार ने सरकारी नौकरियों में चरित्र सत्यापन के लिए जो नए नियम बनाए हैं, वे सिर्फ एक-दो विभागों तक सीमित नहीं रहेंगे। राज्य में होने वाली सीधी भर्तियों के साथ सरकारी निगमों, परिषदों, शिक्षण संस्थानों, पंचायतों और स्थानीय निकायों की नियुक्तियों में भी इन्हें लागू किया जाएगा। सरकारी उपक्रम और स्वायत्त संस्थाएं भी इसके दायरे में आएंगी।
नई व्यवस्था में उम्मीदवारों को पुलिस जांच के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सामान्य मामलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई अपने पास मौजूद रिकॉर्ड से ही जानकारी जुटाएंगी। इसके लिए उम्मीदवार को हर बार थाने बुलाने या अलग से कागजात मांगने की जरूरत नहीं होगी।
चरित्र सत्यापन की रिपोर्ट देने के लिए पुलिस को 30 दिन का समय मिलेगा। जांच में किसी उम्मीदवार के खिलाफ ऐसी जानकारी सामने आती है, जिससे उसकी नियुक्ति प्रभावित हो सकती है, तो उसे सफाई देने का मौका भी मिलेगा। जिलाधिकारी के स्तर से उसका पक्ष सुना जाएगा।










