सोनीपत में बारिश से गेहूं की बिजाई को फायदा, मंडी में धान की खरीद और उठान प्रभावित

सोनीपत में गुरुवार को हुई बारिश से गेहूं की अगेती बिजाई के लिए खेतों में नमी बढ़ी है। वहीं, अनाज मंडी में धान भीगने से खरीद और उठान प्रभावित हुआ है।

सोनीपत में गुरुवार को हुई बारिश से मौसम में ठंडक बढ़ गई है। खाली खेतों में नमी आने से गेहूं की अगेती बिजाई आसान होगी। हालांकि, अनाज मंडी में धान भीगने और नमी बढ़ने के कारण खरीद व उठान प्रभावित हुआ है।

सोनीपत: हरियाणा के सोनीपत में गुरुवार, 29 अक्टूबर को सुबह से रुक-रुककर हुई बारिश ने किसानों के लिए राहत के साथ परेशानी भी बढ़ाई है। धान की कटाई के बाद खाली पड़े खेतों में नमी आने से गेहूं की बिजाई करने वाले किसानों को फायदा होगा। वहीं, नई अनाज मंडी में खुले में रखे धान को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल डालने पड़े। नमी बढ़ने से कुछ समय के लिए खरीद प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई।

गेहूं की अगेती बिजाई करने वाले किसानों को राहत

धान की कटाई के बाद जिन किसानों के खेत खाली हो चुके हैं, उनके लिए यह बारिश काम की साबित हो सकती है। मिट्टी में नमी आने से गेहूं की बुआई से पहले अलग से सिंचाई करने की जरूरत कम हो जाएगी। इससे किसानों का समय बचेगा और सिंचाई पर होने वाला खर्च भी घटेगा।

सोनीपत में बारिश से गेहूं की बिजाई को फायदा, मंडी में धान की खरीद और उठान प्रभावित

सोनीपत में इस रबी सीजन के दौरान कृषि विभाग ने करीब 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की बिजाई का लक्ष्य रखा है। किसान अब खेत की स्थिति देखकर बुआई शुरू कर सकते हैं। हालांकि, ज्यादा गीली मिट्टी में तुरंत बीज डालने के बजाय खेत के तैयार होने का इंतजार करना बेहतर होगा।

बारिश से उन किसानों को ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने अभी तक गेहूं की बुआई नहीं की है और खेत तैयार करने में लगे हैं।

पहले से बोए गए गेहूं में करंड बनने का खतरा

बारिश का असर सभी खेतों में एक जैसा नहीं रहेगा। जिन किसानों ने मंगलवार या बुधवार को गेहूं की बिजाई की थी, उनके सामने अलग परेशानी खड़ी हो सकती है।

कृषि जानकारों के मुताबिक, हल्की बारिश के बाद अगर तेज धूप निकलती है तो खेत की ऊपरी मिट्टी सूखकर सख्त हो सकती है। स्थानीय भाषा में इसे करंड कहा जाता है।

मिट्टी की यह पपड़ी बीज से निकलने वाले छोटे पौधों के लिए बाधा बन सकती है। इससे अंकुरण प्रभावित होने की आशंका रहती है।

हालांकि, जिले में बारिश बहुत तेज नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल गेहूं की फसल को बड़े नुकसान की आशंका कम बताई जा रही है। किसानों को अगले कुछ दिनों तक खेतों की स्थिति पर ध्यान देना होगा।

नई अनाज मंडी में धान की खरीद हुई धीमी

सोनीपत की नई अनाज मंडी में इन दिनों धान की आवक जारी है। सुबह हुई बारिश के बाद खुले में रखी फसल को बचाने के लिए किसानों और आढ़तियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।

मंडी के खुले फड़ों पर रखे धान को तिरपाल से ढका गया। इसके बावजूद कुछ स्थानों पर नमी बढ़ने से खरीद प्रभावित हुई।

धान की खरीद में नमी का स्तर महत्वपूर्ण होता है। अधिक नमी मिलने पर फसल की खरीद में देरी हो सकती है। बारिश के दौरान खुले में रखी ढेरियों की तौल और खरीद कुछ समय के लिए धीमी रही।

गोहाना की अनाज मंडी में भी बारिश से धान भीगने और खरीद प्रभावित होने की खबर सामने आई है।

शेड के नीचे रखी फसल की खरीद जारी रही

मंडी में सभी जगह काम बंद नहीं हुआ। पक्के शेड के नीचे रखे धान की तौल, खरीद और उठान की प्रक्रिया चलती रही।

मंडी प्रशासन और आढ़तियों ने बारिश को देखते हुए फसल को भीगने से बचाने के इंतजाम किए। जहां धान सुरक्षित रखा गया था, वहां कामकाज में ज्यादा परेशानी नहीं आई।

मंडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, फसल को ढकने की व्यवस्था की गई थी। नमी के कारण कुछ दिक्कत जरूर हुई, लेकिन खरीद और उठान का काम जारी रखा गया।

अब मौसम साफ होने पर खुले में रखे धान की स्थिति देखकर खरीद प्रक्रिया सामान्य होने की उम्मीद है।

बारिश के बाद बदला सोनीपत का मौसम

गुरुवार तड़के शुरू हुई बारिश और दिन में रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी से सोनीपत के मौसम में भी बदलाव आया। तापमान में गिरावट के साथ हल्की ठंडक महसूस की गई।

बारिश से खाली खेतों को फायदा मिला है, लेकिन धान की खरीद और हाल ही में बोए गए गेहूं पर इसके असर को लेकर किसानों की चिंता बनी हुई है।

फिलहाल किसानों के लिए जरूरी है कि वे मौसम को देखते हुए गेहूं की बिजाई करें और मंडी में लाई गई धान की फसल को नमी से बचाकर रखें।

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