उत्तराखंड सरकार अगले दो वर्षों में हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े बुनकरों की संख्या बढ़ाकर 25 हजार करने की तैयारी में है। अभी प्रदेश में 12,561 बुनकर जुड़े हैं। सरकार प्रशिक्षण, प्रोत्साहन योजनाओं और उत्पादों की बिक्री बढ़ाकर स्वरोजगार के नए अवसर तैयार करेगी।
देहरादून: उत्तराखंड में पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प का काम करने वाले लोगों के लिए सरकार नई योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने अगले दो साल में इस क्षेत्र से जुड़े लोगों की संख्या लगभग दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने और बुनकरों को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की तैयारी है। एमएसएमई मंत्री भरत सिंह चौधरी के अनुसार, सरकार का प्रयास है कि ज्यादा लोग अपनी कला के जरिए रोजगार हासिल कर सकें।
प्रदेश में अभी 12,561 बुनकर, संख्या बढ़ाने की तैयारी
उत्तराखंड में हथकरघा और हस्तशिल्प स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। अगस्त 2026 तक की हैंडलूम जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 12,561 बुनकर इस क्षेत्र से जुड़े हैं।
सरकार ने अगले दो वर्षों में यह संख्या बढ़ाकर कम से कम 25 हजार करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए मौजूदा बुनकरों के साथ नए लोगों को भी प्रशिक्षण और काम से जोड़ने की योजना है।
विभाग विशेष प्रोत्साहन योजनाओं के अलावा स्पेशल कंपोनेंट सब प्लान (SCSP) और ट्राइबल सब प्लान (TSP) से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाएगा।
सरकार का मकसद उन लोगों को भी इस कारोबार से जोड़ना है, जो पारंपरिक बुनाई और हस्तशिल्प सीखकर अपने घर या गांव से काम करना चाहते हैं।
युवाओं को प्रशिक्षण देंगे अनुभवी बुनकर
एमएसएमई विभाग की योजना के तहत लंबे समय से हथकरघा और हस्तशिल्प का काम कर रहे कुशल कारीगरों को प्रशिक्षक के रूप में जोड़ा जाएगा।
ये कारीगर युवाओं को बुनाई, डिजाइन और पारंपरिक उत्पाद तैयार करने की जानकारी दे सकेंगे। इससे नए लोगों को काम सीखने के साथ अनुभवी बुनकरों के हुनर का भी फायदा मिलेगा।
प्रदेश में स्कूल स्तर पर भी हस्तशिल्प से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार अब ऐसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
अगस्त में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने भी कहा था कि प्रशिक्षण, आधुनिक डिजाइन और मशीनों के जरिए स्थानीय कारीगरों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर काम किया जा रहा है।
पिथौरागढ़ से उत्तरकाशी तक होता है हथकरघा का काम
उत्तराखंड के कई जिलों में बुनाई का काम पीढ़ियों से चला आ रहा है। पिथौरागढ़ के धारचूला और मुनस्यारी में पारंपरिक वस्त्र तैयार किए जाते हैं।
इसी तरह उत्तरकाशी के डुंडा और भटवाड़ी, ऊधमसिंह नगर के जसपुर, हरिद्वार के रुड़की और चमोली के माणा तथा घिंघराण क्षेत्र में भी हथकरघा से जुड़ी गतिविधियां होती हैं।
इसके अलावा राज्य के सभी 13 जिलों में अलग-अलग तरह के हस्तशिल्प उत्पाद बनाए जाते हैं।
इनमें ऊनी कपड़े, शॉल, रिंगाल और बांस से तैयार सामान, लकड़ी की कलाकृतियां और स्थानीय डिजाइन वाले दूसरे उत्पाद शामिल हैं।
तीन साल में 1.57 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री
राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वित्तीय वर्षों में हिमाद्री इम्पोरियम और दूसरे निर्धारित बिक्री केंद्रों के जरिए हथकरघा एवं हस्तशिल्प उत्पादों की कुल बिक्री 1.57 करोड़ रुपये से अधिक रही।
वित्त वर्ष 2023-24 में सबसे ज्यादा 81.21 लाख रुपये की बिक्री हुई थी। इसके बाद के दोनों वित्तीय वर्षों में बिक्री का आंकड़ा 40 लाख रुपये से नीचे रहा।
ऐसे में सरकार के सामने उत्पादन बढ़ाने के साथ तैयार सामान के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की भी चुनौती है।
बिक्री में सुधार होने पर बुनकरों को नियमित ऑर्डर मिलने और अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
हिमाद्री इम्पोरियम से ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री
उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए हिमाद्री इम्पोरियम की व्यवस्था है। देहरादून, उत्तरकाशी और नई दिल्ली जैसे स्थानों पर राज्य के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की बिक्री की जाती है।
इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
हिमाद्री के जरिए ऐंपण कला, ऊनी वस्त्र, रिंगाल से तैयार घरेलू सामान और दूसरे पारंपरिक उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं।
सरकार मेलों, प्रदर्शनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ाने पर भी काम कर रही है।
नए बुनकरों को कब से मिलेगा प्रशिक्षण?
एमएसएमई मंत्री भरत सिंह चौधरी ने बताया कि विभाग की ओर से आगे और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे। कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इनसे जुड़कर अपना काम शुरू कर सकें और कमाई का जरिया बना सकें।
फिलहाल इन कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आवेदन कब शुरू होंगे, कौन आवेदन कर सकेगा और लोगों का चयन कैसे होगा, इसकी जानकारी विभाग ने अभी नहीं दी है।









