नेतन्याहू को झटका, सहयोगी पार्टी ने आइजनकोट को दिया PM बनने का प्रस्ताव, सैन्य सेवा पर रखी शर्त

इजराइल चुनाव 2026 के बाद नेतन्याहू की सहयोगी UTJ पार्टी ने आइजनकोट को समर्थन देने का प्रस्ताव रखा। बदले में हरेदी समुदाय को सैन्य सेवा से छूट देने की शर्त रखी।

इजराइल में चुनाव के बाद नई सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सहयोगी यूनाइटेड टोरा जूडिज्म पार्टी विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को समर्थन देने पर विचार कर रही है। बदले में पार्टी ने हरेदी समुदाय को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की शर्त रखी है।

यरुशलम: इजराइल में आम चुनाव के बाद सरकार बनाने को लेकर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लंबे समय से सहयोगी रहे यूनाइटेड टोरा जूडिज्म (UTJ) के नेता अब विपक्षी नेता गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने पर विचार कर रहे हैं। पार्टी ने इसके बदले अति-रूढ़िवादी यहूदी हरेदी समुदाय को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने वाला कानून बनाने की मांग रखी है। चुनाव में किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण छोटी पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

नेतन्याहू की सहयोगी पार्टी ने क्यों बदला रुख?

इजराइली मीडिया चैनल 12 और वाईनेट की रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड टोरा जूडिज्म के एक वरिष्ठ नेता ने संकेत दिया है कि पार्टी गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसके लिए हरेदी समुदाय को सैन्य भर्ती से छूट देने की मांग स्वीकार करनी होगी।

पार्टी ने नई सरकार में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देने का विकल्प भी रखा है। इस व्यवस्था में उसके सांसद सरकार के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण मतदान में हिस्सा लेने से बच सकते हैं। इससे अल्पमत सरकार को संसद में बने रहने का मौका मिल सकता है।

यूनाइटेड टोरा जूडिज्म को हालिया चुनाव में सात सीटें मिली हैं। पार्टी लंबे समय से नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी और धार्मिक गठबंधन का हिस्सा रही है। ऐसे में विपक्षी नेता को समर्थन देने की संभावना इजराइल की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

120 सीटों वाली संसद में किसके पास कितनी ताकत?

इजराइल के केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से 30 अक्टूबर को जारी परिणामों के अनुसार, प्रधानमंत्री नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। वहीं, गादी आइजनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिली हैं।

नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को कुल 53 सीटें मिली हैं, जबकि नेतन्याहू विरोधी यहूदी नेतृत्व वाले दलों के पास 48 सीटें हैं। अरब बहुल पार्टियों ने संयुक्त रूप से 19 सीटें हासिल की हैं।

संसद नेसेट में सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का बहुमत जरूरी है। यदि विपक्षी दलों और अरब पार्टियों के सभी सांसद साथ आते हैं, तो उनके पास 67 सीटें हो सकती हैं। हालांकि, कई विपक्षी पार्टियां अरब दलों के साथ गठबंधन करने के पक्ष में नहीं हैं।

यही वजह है कि चुनाव में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे रहने के बावजूद विपक्ष के लिए सरकार बनाना आसान नहीं है।

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हरेदी समुदाय की सैन्य भर्ती पर क्यों है विवाद?

इजराइल में ज्यादातर यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, अति-रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के धार्मिक छात्रों को लंबे समय से सेना में भर्ती होने से छूट मिलती रही है।

साल 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद धार्मिक शिक्षा हासिल करने वाले करीब 400 छात्रों को सैन्य सेवा से छूट दी गई थी। इसका उद्देश्य धार्मिक अध्ययन और परंपराओं को बनाए रखना था। बाद के वर्षों में इस व्यवस्था का दायरा बढ़ता गया।

इस छूट का लंबे समय से विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी नागरिकों के बीच समान रूप से बंटनी चाहिए।

गादी आइजनकोट भी सैन्य या राष्ट्रीय सेवा में समान भागीदारी के समर्थक रहे हैं। इसलिए यूनाइटेड टोरा जूडिज्म की शर्त स्वीकार करना उनके लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है।

अरब पार्टियों के समर्थन पर विपक्ष में मतभेद

इजराइल की डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलान ने विपक्षी दलों से अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक चुनाव में जीतने वाले सांसदों को सरकार गठन की प्रक्रिया से अलग रखना उचित नहीं है।

ताजा चुनाव परिणामों में अरब बहुल जॉइंट लिस्ट को 11 और रा'म पार्टी को आठ सीटें मिली हैं। वहीं, डेमोक्रेट्स पार्टी के पास आठ सीटें हैं।

जॉइंट लिस्ट में हदाश, ताल और बलद जैसी पार्टियां शामिल हैं। ये दल अरब नागरिकों के अधिकारों, सामाजिक समानता और फिलिस्तीन से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं।

हालांकि, याशर, बियाचाद और इजराइल बेतेनु सहित कुछ विपक्षी दल अरब पार्टियों के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे हैं। इससे नई सरकार बनाने की कोशिशें जटिल हो गई हैं।

अब इजराइल में आगे क्या होगा?

चुनाव परिणाम चार नवंबर को राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग को सौंपे जाने हैं। इसके बाद राष्ट्रपति राजनीतिक दलों से बातचीत करके उस नेता को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होगी।

नई संसद का गठन 10 नवंबर को होना निर्धारित है। फिलहाल आइजनकोट के नेतृत्व में सरकार बनाने या यूनाइटेड टोरा जूडिज्म के साथ किसी औपचारिक समझौते की घोषणा नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नेतन्याहू अपने पुराने सहयोगियों का समर्थन बनाए रख पाते हैं या इजराइल में नई राजनीतिक व्यवस्था सामने आती है।

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