दीपावली पर नोएडा में लगेगा माटी कला महोत्सव, कुम्हारों को मिलेगा सामान बेचने का मौका

नोएडा में दीपावली पर माटी कला महोत्सव की तैयारी शुरू हो गई है। स्थानीय कुम्हार मिट्टी के दीये, बर्तन और सजावटी सामान बेच सकेंगे। आयोजन की तारीख जल्द तय होगी।

 उत्तर प्रदेश सरकार दीपावली के मौके पर पारंपरिक माटी कला को बढ़ावा देने के लिए जिलों में महोत्सव आयोजित कर रही है। नोएडा में भी इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। स्थानीय कुम्हार और शिल्पकार मिट्टी के दीये, बर्तन और सजावटी सामान बेच सकेंगे। आयोजन की तारीख अभी तय नहीं हुई है।

नोएडा: दीपावली के त्योहार पर मिट्टी के दीये और पारंपरिक सजावटी सामान बनाने वाले कारीगरों को इस बार अपना कारोबार बढ़ाने का मौका मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार ने माटी कला से जुड़े लोगों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिलों में माटी कला महोत्सव आयोजित करने की पहल की है। नोएडा में भी इस कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई है। महोत्सव में स्थानीय कुम्हार, शिल्पकार और मिट्टी के उत्पाद बनाने वाले उद्यमी अपना सामान प्रदर्शित करने के साथ उसकी बिक्री भी कर सकेंगे।

नोएडा में माटी कला महोत्सव की तैयारियां शुरू, जल्द तय होगी तारीख

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर नोएडा में माटी कला महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। जिला प्रशासन ने कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं पर काम शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी आयोजन की तारीख और स्थान का अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, अगले एक-दो दिनों में कार्यक्रम की तारीख और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है।

इस महोत्सव का उद्देश्य मिट्टी के पारंपरिक उत्पाद बनाने वाले कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ना है। सामान्य दिनों में कई कुम्हार अपने उत्पाद स्थानीय बाजारों और दुकानदारों के माध्यम से बेचते हैं। महोत्सव में उन्हें खुद अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।

खासकर दीपावली के आसपास मिट्टी के दीयों, सजावटी सामान और बर्तनों की मांग रहती है। ऐसे में यह आयोजन स्थानीय कारीगरों के लिए उपयोगी हो सकता है। महोत्सव के जरिए लोग भी एक ही स्थान पर अलग-अलग तरह के मिट्टी के उत्पाद खरीद सकेंगे।

लखनऊ में शुरू हुआ 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 28 अक्टूबर से माटी कला महोत्सव-2026 शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम सात नवंबर तक चलेगा। डालीबाग स्थित खादी भवन परिसर में राज्य स्तरीय प्रदर्शनी लगाई गई है, जहां अलग-अलग जिलों से आए कारीगरों के उत्पाद रखे गए हैं।

इस बार महोत्सव की थीम 'मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि' रखी गई है। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। महोत्सव में पारंपरिक और आधुनिक मिट्टी के उत्पादों के प्रदर्शन के साथ उनकी बिक्री की व्यवस्था की गई है।

लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से कारीगरों को अपनी कला दिखाने के साथ कारोबार बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। इसी तरह नोएडा में भी स्थानीय स्तर पर आयोजन की तैयारी चल रही है। हालांकि, लखनऊ के 11 दिवसीय कार्यक्रम की तारीखों को नोएडा के आयोजन की तारीख नहीं माना जाना चाहिए।

मिट्टी के दीये और सजावटी सामान बेच सकेंगे स्थानीय कारीगर

नोएडा में प्रस्तावित महोत्सव से स्थानीय कुम्हारों, शिल्पकारों और माटी कला से जुड़े छोटे कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यहां मिट्टी के दीये, बर्तन, फूलदान और घर सजाने के लिए तैयार किए गए दूसरे उत्पादों को प्रदर्शित किया जा सकेगा।

मिट्टी के उत्पादों का इस्तेमाल केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है। अब कई कारीगर पारंपरिक बर्तनों के साथ आधुनिक डिजाइन वाले सजावटी सामान भी तैयार कर रहे हैं। ऐसे उत्पादों को बड़े बाजारों में पहचान दिलाने के लिए प्रदर्शनी और बिक्री के अवसर महत्वपूर्ण होते हैं।

उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और विशेष सचिव एमएसएमई शिशिर सिंह के अनुसार, पारंपरिक माटी कला को बचाए रखने के लिए कारीगरों को केवल प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपने उत्पाद बेचने के लिए बाजार और खरीदार उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

सरकार की इस पहल के जरिए मिट्टी के उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ प्लास्टिक और कृत्रिम सजावटी सामान के विकल्प के रूप में पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जा रही है।

महोत्सव से कारीगरों को ग्राहकों की पसंद और बदलती मांग समझने का अवसर भी मिलेगा। इससे वे भविष्य में नए डिजाइन और जरूरत के अनुसार उत्पाद तैयार कर सकेंगे।

फिलहाल नोएडा में कार्यक्रम की अंतिम तारीख, आयोजन स्थल और स्टॉल आवंटन की प्रक्रिया की जानकारी सामने आना बाकी है। इन व्यवस्थाओं के तय होने के बाद स्थानीय कारीगरों को महोत्सव में भाग लेने की प्रक्रिया के बारे में बताया जा सकेगा।

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