Karnataka SIR: करीब एक करोड़ मतदाता घटे, धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी से पूछा सवाल, कांग्रेस पर निशाना

कर्नाटक में SIR के बाद वोटर लिस्ट से करीब 99 लाख नाम घटे। धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी से सवाल पूछते हुए कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया।

कर्नाटक में SIR के बाद मतदाता सूची से करीब 99.32 लाख नाम कम होने पर भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया का समर्थन किया है।

नई दिल्ली: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद करीब एक करोड़ मतदाताओं की कमी ने सियासी बहस तेज कर दी है। भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि जब कांग्रेस शासित राज्य में इतनी बड़ी संख्या में नाम कम हुए हैं, तो क्या राहुल गांधी वहां की चुनावी व्यवस्था पर भी सवाल उठाएंगे? प्रधान ने कांग्रेस के रुख को दोहरा रवैया बताया है।

धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर लगाया पाखंड का आरोप

कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज पर सवाल उठा रहा है, जबकि इसी प्रक्रिया के तहत कांग्रेस शासित कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कम हुए हैं।

प्रधान के मुताबिक, कर्नाटक में मतदाता सूची की जांच का काम निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AERO) और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने किया। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक सुविधा के अनुसार अपना रुख बदलने का आरोप लगाया। प्रधान ने इसे पाखंड बताते हुए कहा कि मतदाता सूची को सही करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का जरूरी हिस्सा है।

हालांकि, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम चुनाव आयोग की निगरानी में होता है। इसमें राज्य के प्रशासनिक कर्मचारियों की भागीदारी का अर्थ यह नहीं है कि पूरी प्रक्रिया राज्य सरकार या सत्ताधारी दल के नियंत्रण में होती है।

राहुल गांधी से पूछा- क्या अपनी सरकार पर भी उठाएंगे सवाल?

धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सीधे सवाल किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दूसरे राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटने पर धांधली के आरोप लगाती है, लेकिन कर्नाटक के आंकड़ों पर उसका रुख क्या होगा? प्रधान ने पूछा कि क्या राहुल गांधी अब अपनी पार्टी की सरकार वाले राज्य की चुनावी मशीनरी पर भी गड़बड़ी का आरोप लगाएंगे या मतदाता सूची के पुनरीक्षण को जरूरी प्रक्रिया मानेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी संवैधानिक संस्था पर केवल राजनीतिक फायदे के लिए सवाल उठाना उचित नहीं है। ये सभी आरोप धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। कर्नाटक में मतदाताओं की संख्या घटने से अपने आप किसी दल की जिम्मेदारी या चुनावी गड़बड़ी साबित नहीं होती।

कर्नाटक SIR में कितने मतदाताओं के नाम कम हुए?

Karnataka SIR: करीब एक करोड़ मतदाता घटे, धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी से पूछा सवाल, कांग्रेस पर निशाना

चुनाव आयोग ने मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी। SIR शुरू होने से पहले राज्य में कुल 5,54,32,314 पंजीकृत मतदाता थे। नई सूची में यह संख्या घटकर 4,55,00,011 रह गई है। यानी पहले के मुकाबले 99,32,303 मतदाता कम हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए, जिनमें मतदाता स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके थे, उनका निधन हो गया था या उनका नाम एक से ज्यादा स्थानों पर दर्ज था। कुछ लोग सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले।

हालांकि, करीब 99.32 लाख की कमी अंतिम सूचियों के बीच शुद्ध अंतर है। इस दौरान नए मतदाताओं के नाम भी जोड़े गए और कुछ प्रविष्टियों में सुधार किया गया। दावे और आपत्तियों की अवधि में करीब 10.08 लाख नाम जोड़े गए, 1.88 लाख नाम हटाए गए और लगभग 8.96 लाख प्रविष्टियों में संशोधन हुआ।

कांग्रेस क्यों कर रही SIR का विरोध?

कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कई दल लंबे समय से विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि बड़े स्तर पर नाम हटने से गरीब, कमजोर और दूसरे राज्यों में काम करने वाले पात्र मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है।

दूसरी तरफ चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद गलतियों को ठीक करना और पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर भी विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर एक नवंबर को दिल्ली में विपक्ष की रैली प्रस्तावित है।

सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है मामला

SIR और चुनाव आयोग के फैसलों से जुड़ी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। 27 अक्टूबर को अदालत ने याचिकाकर्ताओं को आयोग के हलफनामे का जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया था। चुनाव आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि SIR से जुड़े फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत और आयोग के सभी तीन सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं।

अदालत में इनसे जुड़े सवालों पर आगे सुनवाई होनी है। वहीं, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जिन पात्र लोगों का नाम अंतिम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं। मतदाता अपना नाम चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल या कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर देख सकते हैं। नाम नहीं मिलने पर फॉर्म-6 के जरिए आवेदन किया जा सकता है।

Leave a comment