दिल्ली में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समय-सीमा बढ़ा दी गई है। अब लोग 25 नवंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। चुनाव आयोग 15 दिसंबर तक मामलों का निपटारा करेगा और 22 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।
नई दिल्ली: दिल्ली के उन लोगों को चुनाव आयोग ने बड़ी राहत दी है, जिनका नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है या जिनकी जानकारी में कोई गलती है। आयोग ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को SIR का नया शेड्यूल जारी कर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए 26 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की मांग पर यह फैसला लिया गया है। अब मतदाताओं को अपने दस्तावेज और जानकारी ठीक कराने का ज्यादा मौका मिलेगा।
दिल्ली में अब 22 दिसंबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट
दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने में अब पहले से ज्यादा समय लगेगा। चुनाव आयोग के नए आदेश के मुताबिक, मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटवाने या गलत जानकारी को लेकर आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख 25 नवंबर 2026 तय की गई है। पहले यह प्रक्रिया 30 अक्टूबर को समाप्त होने वाली थी।
वहीं, दावों और आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा भी 30 नवंबर से बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी गई है। इसके बाद 22 दिसंबर को अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशित की जाएगी। पुराने शेड्यूल में इसे 4 दिसंबर को जारी किया जाना था। चुनाव आयोग ने दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध पर निर्वाचन पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 12 के तहत नई समय-सीमा तय की है।
सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बाद बढ़ाई गई तारीख
दिल्ली में SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है। बुधवार, 28 अक्टूबर को अदालत ने चुनाव आयोग से दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ाने पर विचार करने को कहा था। अदालत के सामने उन मतदाताओं का मुद्दा भी उठाया गया, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं। ऐसे लोगों को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए पर्याप्त अवसर देने की बात कही गई।
इसके अगले दिन चुनाव आयोग ने संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया। इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो दस्तावेज जुटाने या नोटिस का जवाब देने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे।
दिल्ली में करीब 33 लाख मामलों में सामने आई थीं गड़बड़ियां
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दिल्ली में SIR के दौरान मतदाताओं की जानकारी जांचने पर करीब 33 लाख मामले ऐसे मिले थे, जिनमें अलग-अलग तरह की विसंगतियां थीं। इनमें करीब 19.33 लाख मामले जानकारी में तार्किक विसंगतियों से जुड़े थे। वहीं, लगभग 13.79 लाख मतदाताओं का रिकॉर्ड 2002 की पुरानी मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाया था।
ऐसे मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी कर जानकारी और दस्तावेज की जांच की गई। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक, 24 अक्टूबर तक लगभग 29.5 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका था या उन्हें अंतिम सूची में विचार के लिए रखा गया था। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में भी बड़ी संख्या में नाम शामिल नहीं हुए थे। ऐसे लोगों को दावा दाखिल कर अपना नाम जुड़वाने का अवसर दिया गया है।
वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिला तो ऐसे कराएं दर्ज
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं दिख रहा है तो उसे जुड़वाने के लिए आवेदन किया जा सकता है। इसके लिए फॉर्म-6 भरना होगा। वहीं, किसी के नाम पर आपत्ति दर्ज कराने या नियमों के मुताबिक नाम हटवाने के लिए फॉर्म-7 दिया जाता है। अगर नाम की स्पेलिंग, पता या कोई दूसरी जानकारी गलत दर्ज है तो उसे फॉर्म-8 के जरिए ठीक कराया जा सकता है।
ये फॉर्म चुनाव आयोग के आधिकारिक वोटर पोर्टल पर उपलब्ध हैं। संबंधित निर्वाचन कार्यालय से भी इसकी जानकारी ली जा सकती है। फॉर्म भरते समय सभी जानकारियां सही दर्ज करें और जरूरी दस्तावेज भी जांच लें, ताकि आवेदन में कोई परेशानी न हो।
महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों में भी बढ़ाया गया समय
दिल्ली के साथ महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और नगालैंड में भी वोटर लिस्ट से जुड़ी तारीखें बदली गई हैं। महाराष्ट्र में पहले 26 अक्टूबर तक दावे और आपत्तियां ली जानी थीं। अब इसके लिए 13 नवंबर तक का समय दिया गया है। महाराष्ट्र में 31 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी हुई थी। पहले आपत्तियों और दावों के निपटारे के लिए 10 नवंबर की तारीख तय थी, जिसे बढ़ाकर 25 नवंबर कर दिया गया है। इसके बाद 30 नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी।
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड में भी अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित करने का कार्यक्रम तय किया गया है। ऐसे में जिन लोगों को अपने नाम या दूसरी जानकारी में कोई गलती दिख रही है, वे अपने राज्य की तय तारीख के भीतर सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।









