किसानों की बदहाली पर KTR का कांग्रेस सरकार पर हमला, बोले- अब सरकार को छुट्टी देने का समय आ गया

तेलंगाना में सूखे और बिजली कटौती पर KTR ने रेवंत रेड्डी सरकार को घेरा। मूसी नदी परियोजना के 1.5 लाख करोड़ रुपये किसानों की राहत पर खर्च करने की मांग की।

तेलंगाना में सूखे, बिजली कटौती और किसानों की परेशानियों को लेकर बीआरएस नेता केटी रामाराव ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मूसी नदी परियोजना पर प्रस्तावित 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने के बजाय किसानों को राहत देने की मांग की।

हैदराबाद: तेलंगाना में पानी की कमी और फसलों को हो रहे नुकसान को लेकर भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार, 29 अक्टूबर को हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार चुनाव के समय किए गए वादे पूरे नहीं कर पा रही है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए परेशान हैं, जबकि सरकार मूसी नदी के सौंदर्यीकरण पर बड़ी रकम खर्च करने की तैयारी कर रही है। केटीआर ने लोगों से कहा कि अब समय आ गया है कि वे कांग्रेस सरकार को ही छुट्टी दे दें।

किसानों को अपनी फसल बचाने में हो रही परेशानी

केटीआर ने आरोप लगाया कि राज्य में पानी और बिजली की कमी के कारण खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। कई इलाकों में किसान अपनी फसल बचाने के लिए जनरेटर और पानी के टैंकर इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे खेती का खर्च बढ़ रहा है और किसानों की आर्थिक परेशानी भी बढ़ गई है।

उन्होंने दावा किया कि कुछ किसान नुकसान से इतने परेशान हैं कि अपनी खड़ी फसलों में ही आग लगाने को मजबूर हो रहे हैं। केटीआर ने कहा कि चुनाव से पहले कांग्रेस ने किसानों के लिए कई घोषणाएं की थीं, लेकिन अब उन्हें अपनी फसल की सुरक्षा खुद करने संबंधी घोषणा पत्र देने पड़ रहे हैं। बीआरएस नेता ने सरकार से किसानों को तुरंत सहायता देने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग की।

मूसी नदी परियोजना पर 1.5 लाख करोड़ खर्च करने पर सवाल

केटीआर ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की मूसी नदी परियोजना को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि राज्य में किसान पानी के लिए परेशान हैं, लेकिन सरकार नदी के सौंदर्यीकरण पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है।

उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी परियोजना शुरू करने से पहले सरकार को इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सार्वजनिक करनी चाहिए। केटीआर ने दावा किया कि परियोजना पर प्रभावित लोगों की राय ठीक से नहीं ली गई है।

उन्होंने परियोजना के नाम पर आर्थिक अनियमितताओं की आशंका भी जताई। हालांकि, ये केटीआर के राजनीतिक आरोप हैं और इनके समर्थन में किसी जांच के निष्कर्ष की जानकारी सामने नहीं आई है। बीआरएस नेता ने मांग की कि सरकार फिलहाल इस परियोजना को रोके और प्रस्तावित धनराशि का इस्तेमाल किसानों तथा पानी की कमी से परेशान लोगों की मदद में करे।

किसान सहायता और बिजली कटौती पर भी उठाए सवाल

केटीआर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने चुनाव से पहले छह गारंटियों समेत कई वादे किए थे, लेकिन उनका पूरा लाभ लोगों तक नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को रायतु बंधु योजना की पूरी सहायता राशि नहीं मिली है। रायतु बीमा, पेंशन और बेरोजगारी सहायता जैसी योजनाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार की आलोचना की।

बिजली कटौती का मुद्दा उठाते हुए केटीआर ने दावा किया कि इसका असर खेती के साथ उद्योगों पर भी पड़ रहा है। उनके मुताबिक, लगातार बिजली की समस्या बनी रही तो छोटे और बड़े उद्योगों के कामकाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से बकाया किसान सहायता राशि जारी करने, अधूरी सिंचाई परियोजनाएं पूरी करने और बिजली की नियमित सप्लाई सुनिश्चित करने की मांग की।

आईटी सेक्टर की नौकरियों और निवेश पर सरकार से मांगा जवाब

बीआरएस नेता ने तेलंगाना में रोजगार की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि जब बीआरएस सरकार सत्ता से बाहर हुई थी, तब राज्य के आईटी क्षेत्र में करीब 9.46 लाख लोग काम कर रहे थे।केटीआर के अनुसार, कांग्रेस सरकार आने के बाद आईटी क्षेत्र में लगभग सात हजार नौकरियों की कमी हुई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 सरकार से निवेश और रोजगार के दावों पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की। इसमें विदेशी दौरों, कंपनियों के साथ हुए समझौतों, वास्तविक निवेश और पैदा हुई नई नौकरियों की जानकारी देने को कहा। केटीआर ने प्रस्तावित ग्लोबल समिट पर होने वाले प्रचार खर्च पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की परेशानियों को दूर करने के बजाय बड़े आयोजनों के प्रचार पर ध्यान दे रही है।

मेडिगड्डा बैराज और सूखे पर भी सरकार से जवाब मांगा

केटीआर ने मेडिगड्डा बैराज के क्षतिग्रस्त खंभों का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि तीन साल बीतने के बाद भी सरकार इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि पानी की कमी से जूझ रहे किसानों को राहत देना सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके लिए सिंचाई व्यवस्था सुधारने और जल भंडारण पर ध्यान देने की जरूरत है।

केटीआर ने कांग्रेस सरकार पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीआरएस किसानों और परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहेगी।

Leave a comment