केरल में 27 अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे निजी बस संचालकों ने सरकार से बातचीत के बाद अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने बताया कि केएसआरटीसी निजी ऑपरेटरों की बसें वेट-लीज पर लेकर चलाएगा। सरकार ने निजी बस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा दिलाने की दिशा में कदम उठाने का भी आश्वासन दिया है।
तिरुवनंतपुरम: केरल में निजी बस संचालकों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद फिलहाल बातचीत के जरिए सुलझ गया है। निजी बस उद्योग को आर्थिक संकट से बचाने की मांग को लेकर 27 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे संचालकों ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को अपना आंदोलन वापस ले लिया। परिवहन मंत्री सीपी जॉन और केरल स्टेट प्राइवेट बस ऑपरेटर्स फेडरेशन के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में कई मुद्दों पर सहमति बनी। सरकार ने निजी बसों को केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के जरिए चलाने और बस संचालकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कदम उठाने का भरोसा दिया है।
सरकार से बातचीत के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल
राजधानी तिरुवनंतपुरम में सचिवालय के सामने निजी बस संचालक पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका कहना था कि राज्य में निजी बसों का कारोबार लगातार मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ते खर्च और आमदनी में कमी के कारण कई संचालकों के लिए बस सेवाएं जारी रखना चुनौती बन गया है।
केरल स्टेट प्राइवेट बस ऑपरेटर्स फेडरेशन ने इन समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन शुरू किया था। संगठन चाहता था कि सरकार निजी बस उद्योग को बचाने के लिए ठोस फैसले ले।
शुक्रवार को परिवहन मंत्री के साथ हुई बातचीत में संचालकों की मांगों पर चर्चा की गई। सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद संगठन ने भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
वेट-लीज पर निजी बसें चलाएगा केएसआरटीसी
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला निजी बसों को वेट-लीज व्यवस्था के तहत केएसआरटीसी से जोड़ने का रहा। परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने कहा कि निगम निजी संचालकों से बसें लेकर अपनी सेवाओं में उनका इस्तेमाल करेगा।
वेट-लीज एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बस का स्वामित्व निजी ऑपरेटर के पास रहता है, लेकिन उसका इस्तेमाल तय अनुबंध के आधार पर सरकारी परिवहन निगम करता है। इस व्यवस्था में वाहन के साथ चालक, रखरखाव और संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां भी अनुबंध की शर्तों के अनुसार तय की जाती हैं।
इस योजना का उद्देश्य निजी संचालकों को आय का एक अतिरिक्त जरिया देना है। इससे उन बस मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी कमाई पिछले कुछ समय से प्रभावित हुई है। हालांकि, बसों की संख्या, भुगतान की दर और अनुबंध की अवधि जैसी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं की गई है। ये बातें आगे होने वाली प्रक्रिया में तय होंगी।
निजी बस क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने पर भी चर्चा
बैठक में निजी बस क्षेत्र को औपचारिक रूप से उद्योग का दर्जा देने की मांग भी उठी। परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस दिशा में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
निजी बस संचालकों का मानना है कि उद्योग का दर्जा मिलने से बैंक ऋण, निवेश और दूसरी वित्तीय सुविधाओं तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे बसों की खरीद, रखरखाव और कारोबार बढ़ाने में मदद मिलने की संभावना है।
इससे पहले निजी बस क्षेत्र की समस्याओं का अध्ययन करने वाली पद्मकुमार समिति ने भी उद्योग का दर्जा देने और वेट-लीज व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी।
सरकार ने इन सुझावों पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, उद्योग का दर्जा देने की घोषणा और उसे औपचारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं।
प्रियदर्शिनी योजना से क्यों बढ़ा निजी बस संचालकों का विरोध?
केरल में निजी बस संचालकों की नाराजगी का एक प्रमुख कारण सरकार की प्रियदर्शिनी योजना है। इस योजना के तहत केएसआरटीसी की सामान्य बसों में महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों को मुफ्त सफर की सुविधा मिलती है।
निजी बस मालिकों का आरोप है कि योजना लागू होने के बाद बड़ी संख्या में यात्री सरकारी बसों की ओर चले गए। इससे निजी बसों की आमदनी पर असर पड़ा है। संचालकों ने न्यूनतम किराया बढ़ाने, विद्यार्थियों के रियायती किराए की समीक्षा करने और नुकसान की भरपाई के लिए सहायता देने जैसी मांगें भी उठाई थीं।
हालांकि, परिवहन विभाग का कहना रहा है कि निजी बस क्षेत्र की आर्थिक परेशानियों के पीछे केवल प्रियदर्शिनी योजना जिम्मेदार नहीं है। निजी वाहनों की बढ़ती संख्या, परिचालन खर्च और कोविड महामारी के बाद पैदा हुई आर्थिक चुनौतियां भी इसके कारणों में शामिल हैं।
अब बस संचालकों और यात्रियों पर क्या असर होगा?
सरकार और निजी बस ऑपरेटरों के बीच बातचीत सफल होने से लंबे समय से चल रहे आंदोलन में फिलहाल राहत मिली है। वेट-लीज व्यवस्था लागू होने पर निजी बसों का उपयोग सरकारी परिवहन सेवाओं में बढ़ सकता है।
इससे निगम को अतिरिक्त बसें उपलब्ध कराने और निजी संचालकों को अपने वाहनों से आय प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि, भूख हड़ताल समाप्त होने के बाद भी किराया बढ़ोतरी, आर्थिक सहायता और दूसरी मांगों पर अंतिम फैसले की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। इसके अलावा, तीन नवंबर से प्रस्तावित राज्यव्यापी बस हड़ताल के संबंध में सभी संगठनों के फैसले की अलग से पुष्टि जरूरी होगी।









