एलन मस्क का ब्लाइंडसाइट ब्रेन इम्प्लांट तैयार? नेत्रहीनों की मदद के लिए FDA मंजूरी बाकी

एलन मस्क ने दावा किया कि Neuralink का Blindsight ब्रेन इम्प्लांट तकनीकी रूप से तैयार है। जानें यह नेत्रहीनों को देखने में कैसे मदद कर सकता है और FDA मंजूरी

एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक ने नेत्रहीन लोगों की मदद के लिए ब्लाइंडसाइट तकनीक विकसित की है। मस्क का कहना है कि यह ब्रेन इम्प्लांट तकनीकी रूप से तैयार है, लेकिन इसके इस्तेमाल के लिए नियामकीय मंजूरी मिलना बाकी है।

World News: एलन मस्क की ब्रेन टेक्नोलॉजी कंपनी न्यूरालिंक ने अपने दो खास प्रोजेक्ट ब्लाइंडसाइट और टेलीपैथी को लेकर नई जानकारी दी है। मस्क ने 30 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि ब्लाइंडसाइट का इंजीनियरिंग से जुड़ा काम पूरा हो चुका है। इस तकनीक का मकसद उन लोगों को दृश्य जानकारी उपलब्ध कराना है, जिनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी है। हालांकि, इंसानों में इसकी सफलता साबित होना अभी बाकी है।

बिना आंखों की मदद के कैसे दिखाएगा ब्लाइंडसाइट?

न्यूरालिंक का ब्लाइंडसाइट एक प्रयोगात्मक ब्रेन इम्प्लांट है। इसे इस तरह विकसित किया जा रहा है कि आंखों और ऑप्टिक नर्व के काम नहीं करने पर भी मस्तिष्क तक दृश्य संकेत पहुंचाए जा सकें। इसके लिए बाहरी कैमरे और दिमाग में लगाए जाने वाले एक छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की मदद ली जाएगी। कैमरा सामने मौजूद चीजों और आसपास के वातावरण की तस्वीरें कैप्चर करेगा। इसके बाद इनसे जुड़ी जानकारी वायरलेस तरीके से ब्रेन इम्प्लांट तक पहुंचेगी। यह उपकरण मस्तिष्क के उस हिस्से को विद्युत संकेत देगा, जो सामान्य तौर पर देखने की प्रक्रिया में काम करता है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य व्यक्ति को दृश्य अनुभव कराना है। हालांकि, इससे मिलने वाली दृष्टि सामान्य आंखों जैसी होगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। तकनीक कितनी उपयोगी साबित होगी, इसका पता इंसानों पर होने वाले परीक्षणों से चलेगा। मस्क का दावा है कि ब्लाइंडसाइट भविष्य में जन्म से नेत्रहीन लोगों की भी मदद कर सकता है। फिलहाल कंपनी ने ऐसा कोई सार्वजनिक परीक्षण पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि इस इम्प्लांट के जरिए किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी वापस आई है।

FDA से मिला विशेष दर्जा, लेकिन इलाज को मंजूरी नहीं

ब्लाइंडसाइट को सितंबर 2024 में अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) से ब्रेकथ्रू डिवाइस का दर्जा मिल चुका है। यह दर्जा गंभीर बीमारियों या शारीरिक समस्याओं के इलाज के लिए विकसित की जा रही नई मेडिकल तकनीकों की समीक्षा को प्राथमिकता देने में मदद करता है। हालांकि, ब्रेकथ्रू डिवाइस का दर्जा मिलने का मतलब यह नहीं है कि तकनीक मरीजों के सामान्य इलाज के लिए मंजूर हो गई है। इसके लिए सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़ी जरूरी जांच तथा नियामकीय प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

मस्क ने फिलहाल ब्लाइंडसाइट के इंसानों पर परीक्षण शुरू होने की कोई निश्चित तारीख नहीं बताई है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि नेत्रहीन लोगों को यह सुविधा कब तक मिल सकेगी।

एलन मस्क का ब्लाइंडसाइट ब्रेन इम्प्लांट तैयार? नेत्रहीनों की मदद के लिए FDA मंजूरी बाकी

टेलीपैथी से बिना हाथ लगाए कंप्यूटर चला सकेंगे लोग

ब्लाइंडसाइट के साथ न्यूरालिंक एक दूसरी तकनीक टेलीपैथी पर भी काम कर रही है। इसका उद्देश्य उन लोगों को कंप्यूटर और दूसरे डिजिटल उपकरण चलाने में मदद करना है, जिनके हाथ-पैर लकवे या किसी गंभीर बीमारी के कारण काम नहीं करते। टेलीपैथी में मस्तिष्क के भीतर लगाया गया इम्प्लांट इलेक्ट्रोड की मदद से तंत्रिका संकेत रिकॉर्ड करता है। इसके बाद कंप्यूटर सिस्टम इन संकेतों को डिजिटल निर्देशों में बदलता है। इससे व्यक्ति केवल सोचकर स्क्रीन पर कर्सर घुमा सकता है, किसी विकल्प पर क्लिक कर सकता है और टाइपिंग भी कर सकता है।

न्यूरालिंक के शुरुआती मानव परीक्षणों में कुछ प्रतिभागियों ने इस तकनीक की मदद से कंप्यूटर इस्तेमाल किया है। वे गेम खेलने और दूसरे डिजिटल काम करने में भी सफल रहे हैं। हालांकि, यह तकनीक अभी परीक्षण के चरण में है और इसे सामान्य इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिली है। मस्क का मानना है कि आने वाले वर्षों में टेलीपैथी की मदद से लोग बोलने या टाइप करने के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से संवाद कर सकेंगे। यह उनका भविष्य को लेकर अनुमान है, जिसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

न्यूरालिंक की इन दोनों तकनीकों में सबसे बड़ा अंतर इनके काम करने के तरीके का है। टेलीपैथी मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर तक पहुंचाती है, जबकि ब्लाइंडसाइट बाहरी दृश्य जानकारी को मस्तिष्क तक पहुंचाने के लिए विकसित की जा रही है। अब ब्लाइंडसाइट के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम नियामकीय अनुमति और मानव परीक्षण होंगे।

इनसे ही पता चलेगा कि यह तकनीक सुरक्षित है या नहीं और नेत्रहीन लोगों को वास्तव में कितनी मदद दे सकती है। न्यूरालिंक के आगे के अपडेट और परीक्षणों की जानकारी के लिए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखी जा सकती है।

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