अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की मांग दोहराई है। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने अटलांटा में बैठक कर सुरक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों से तनाव बढ़ा है।
वॉशिंगटन: उत्तर कोरिया के लगातार मिसाइल परीक्षणों और परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने एक बार फिर साझा रुख अपनाया है। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अमेरिका के अटलांटा में बैठक की। इस दौरान उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार खत्म करने, संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लागू रखने और क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत करने पर सहमति बनी। बैठक में आर्कटिक क्षेत्र में आर्थिक और समुद्री सहयोग का समझौता भी हुआ।
उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर तीन देशों का साझा फैसला
अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपना पुराना रुख दोहराया है। तीनों देशों का कहना है कि कोरियाई प्रायद्वीप में स्थायी शांति के लिए उत्तर कोरिया का पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण जरूरी है। अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक से अलग अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून के बीच बातचीत हुई। इसमें उत्तर कोरिया की सैन्य गतिविधियों के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा की गई।
अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, तीनों मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को पूरी तरह लागू करने की प्रतिबद्धता जताई। इन प्रस्तावों में उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध भी शामिल हैं। तीनों देशों ने उत्तर कोरिया की ओर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने की कोशिशों पर नजर रखने की जरूरत बताई। इसके लिए प्रतिबंधों की निगरानी करने वाली बहुराष्ट्रीय टीम के काम का भी समर्थन किया गया।
उत्तर कोरिया ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें
तीनों देशों की बैठक से ठीक एक दिन पहले उत्तर कोरिया ने एक साथ कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया था। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अनुसार, गुरुवार, 29 अक्टूबर को उत्तर कोरिया के वोंसान इलाके से पूर्वी सागर की ओर करीब 10 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इन मिसाइलों ने लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय की।
मिसाइल परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया ने अपनी सैन्य निगरानी बढ़ा दी। अमेरिका और जापान के साथ जानकारी साझा कर किसी दूसरे संभावित परीक्षण के लिए भी तैयारियां की गईं। जापान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, मिसाइलें उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरीं। वहीं, दक्षिण कोरिया ने इन परीक्षणों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन बताया।
इन परीक्षणों से पहले दोनों कोरियाई देशों की सीमा पर भी तनाव बढ़ा था। दक्षिण कोरिया ने सीमा विवाद और संभावित सैन्य टकराव रोकने के लिए बातचीत का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उत्तर कोरिया की ओर से सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
किम जोंग उन परमाणु हथियार छोड़ने को तैयार नहीं
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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन कई बार साफ कर चुके हैं कि उनका देश अपनी परमाणु ताकत खत्म नहीं करेगा। प्योंगयांग ने परमाणु हथियार रखने की नीति को अपने कानून में भी शामिल कर लिया है। उत्तर कोरिया का कहना है कि परमाणु हथियार उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। दूसरी ओर अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया इन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं।
अमेरिका लंबे समय से उत्तर कोरिया को परमाणु हथियार छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक बातचीत के बावजूद अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है। दक्षिण कोरिया की ओर से परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में चरणबद्ध बातचीत की संभावना पर भी चर्चा होती रही है। इसके तहत पहले हथियार कार्यक्रम को सीमित करने और फिर आगे की शर्तों पर सहमति बनाने जैसे विकल्प सामने आए हैं।
ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात पर क्या है अपडेट?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के महीनों में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से दोबारा बातचीत करने की इच्छा जताई है। दोनों नेताओं के बीच पहले भी तीन मुलाकातें हो चुकी हैं। पहली बैठक जून 2018 में सिंगापुर में हुई थी। इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई और जून 2019 में कोरियाई सीमा पर दोनों नेता मिले थे।
अब नवंबर में चीन के शेनझेन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन के दौरान नई मुलाकात की संभावना पर चर्चा है। यह सम्मेलन 18 और 19 नवंबर को आयोजित होना है। हालांकि, अब तक दोनों नेताओं की बैठक की कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं हुई है। रॉयटर्स की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया की ओर से अमेरिकी संपर्क प्रयासों पर जवाब नहीं मिलने के कारण इस साल बैठक की संभावना कमजोर हुई है।
आर्कटिक क्षेत्र में भी मिलकर काम करेंगे तीनों देश
उत्तर कोरिया के मुद्दे के अलावा अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने ट्राइलेटरल आर्कटिक पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत तीनों देश प्रशांत आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आपातकालीन सहायता और आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर काम करेंगे। इसके लिए एक साझा कार्य समूह बनाने की भी योजना है।
बैठक में सप्लाई चेन की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक दबाव से निपटने जैसे मुद्दे भी उठे। तीनों देशों ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता बनाए रखने का समर्थन किया।









