अमेरिका के अटलांटा में हुई क्वाड देशों की बैठक में नेपाल बाढ़ के दौरान भारत की मदद की सराहना हुई। चारों देशों ने चीन की ओर इशारा करते हुए व्यापार नीतियों पर चिंता जताई और होर्मुज व लाल सागर में सुरक्षित आवाजाही की मांग की।
वॉशिंगटन: भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों की शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में अहम बैठक हुई। इसमें नेपाल की बाढ़ के दौरान भारत की मदद को सराहा गया। वहीं, वैश्विक व्यापार में दबाव बनाने वाली नीतियों और निर्यात पर मनमानी पाबंदियों को लेकर चिंता जताई गई। बैठक में पश्चिम एशिया के तनाव के बीच होर्मुज और लाल सागर जैसे समुद्री रास्तों को खुला रखने पर भी जोर दिया गया।
नेपाल में बाढ़ के दौरान भारत की मदद को क्वाड ने सराहा
क्वाड देशों की बैठक में भारत की आपदा राहत से जुड़ी कोशिशों की खास तौर पर चर्चा हुई। चारों देशों ने 26 अगस्त 2026 को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई। इसके साथ ही राहत और बचाव कार्यों में भारत की भूमिका की सराहना की गई। संयुक्त बयान में भारत को नेपाल की मदद के लिए सबसे पहले आगे आने वाले प्रमुख देशों में बताया गया। भारत ने बाढ़ के तुरंत बाद जरूरी दवाइयां, राहत सामग्री और अन्य उपकरण नेपाल भेजे थे। भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए सहायता पहुंचाई गई थी।
इस दौरान अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की ओर से नेपाल को मिले सहयोग का भी जिक्र किया गया। चारों देशों ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय जरूरतमंद देशों की मदद के लिए आपसी तालमेल बनाए रखना जरूरी है। बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए। अमेरिका का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया, जबकि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग भी मौजूद रहीं।
चीन का नाम लिए बिना व्यापार नीतियों पर उठाए सवाल
अटलांटा की बैठक में वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। क्वाड देशों ने ऐसी आर्थिक नीतियों पर चिंता जताई, जिनके जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाया जाता है। संयुक्त बयान में कहा गया कि निर्यात पर अचानक पाबंदियां लगाना और बाजार के सामान्य नियमों से अलग नीतियां अपनाना अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। खासतौर पर महत्वपूर्ण उद्योगों में जरूरत से ज्यादा उत्पादन और आपूर्ति को नियंत्रित करने वाली नीतियों पर सवाल उठाए गए।
हालांकि, बयान में किसी देश का नाम नहीं लिया गया। लेकिन इन टिप्पणियों को चीन की व्यापार नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है। चीन के दुर्लभ खनिजों के निर्यात से जुड़े प्रतिबंध पहले भी कई देशों के लिए चिंता का विषय रहे हैं। क्वाड देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति के लिए भरोसेमंद विकल्प तैयार करने पर सहमति जताई। चारों देश चाहते हैं कि किसी एक देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता न रहे और वैश्विक सप्लाई चेन अचानक लगने वाली पाबंदियों से प्रभावित न हो।
होर्मुज और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा पर जोर
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच क्वाड ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों की बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित करने की मांग की गई। चारों देशों ने कहा कि इन समुद्री रास्तों से तेल, गैस और दूसरी जरूरी वस्तुओं की बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है।
संयुक्त बयान में व्यापारिक जहाजों और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को जरूरी बताया गया। साथ ही इन प्रमुख समुद्री रास्तों पर आवाजाही के लिए अतिरिक्त टोल लगाए जाने का विरोध किया गया। क्वाड ने समुद्री कानून से जुड़े संयुक्त राष्ट्र समझौते UNCLOS के अनुरूप जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता बनाए रखने पर जोर दिया।
जयशंकर ने हिंद-प्रशांत में स्थिरता की जरूरत बताई
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि क्वाड की प्राथमिकताओं में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता, आर्थिक विकास और देशों को अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने का अधिकार शामिल है। जयशंकर ने तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करने की जरूरत भी बताई। उन्होंने समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबले और आपदा राहत में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
अटलांटा में हुई यह 2026 की तीसरी क्वाड विदेश मंत्री स्तरीय बैठक थी। इससे पहले मई में नई दिल्ली और जुलाई में मनीला में चारों देशों के विदेश मंत्री मिल चुके हैं।
AI और जरूरी खनिजों के लिए भी नई पहल
बैठक में क्वाड देशों ने भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक तक पहुंच बढ़ाने के लिए 8.5 करोड़ डॉलर से अधिक की तकनीकी और आर्थिक सहायता देने की योजना जताई। इसके अलावा अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने की सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए एक करोड़ डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई।
चारों देशों ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और साइबर अपराधों से मिलकर निपटने पर भी सहमति जताई। अब नजर क्वाड देशों के अगले शिखर सम्मेलन पर है। हालांकि, अटलांटा में जारी संयुक्त बयान में इसकी तारीख या स्थान की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई।









