बिहार के गया जिले के दादपुर गांव की वैष्णवी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 298वीं रैंक हासिल की है। उनके पिता सर्वे अधिकारी और मां गृहिणी हैं। वैष्णवी की सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
गया, बिहार: गया जिले के बेलागंज प्रखंड के एक छोटे से गांव की बेटी ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। दादपुर गांव की वैष्णवी ने देशभर में 298वीं रैंक प्राप्त कर अपने परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है। उनके पिता राजीव नयन सर्वे अधिकारी हैं, जबकि मां घर संभालती हैं। वैष्णवी ने शुरुआती पढ़ाई रामगढ़ के कैंट स्कूल से की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की।
दादपुर गांव की बेटी ने UPSC में हासिल की 298वीं रैंक
बिहार के गया जिले में स्थित दादपुर गांव इन दिनों वैष्णवी की सफलता को लेकर चर्चा में है। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 298वीं रैंक हासिल करने के बाद उनकी उपलब्धि से परिवार और गांव के लोग खुश हैं।
दादपुर गांव बेलागंज प्रखंड मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर पूरब में स्थित है। यहां के अधिकांश परिवार खेती-किसानी से जुड़े हैं। गांव की पहचान पहले एक ऐसे इलाके के रूप में रही है, जहां सुविधाएं सीमित थीं। इसी गांव से ताल्लुक रखने वाली वैष्णवी ने पढ़ाई के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है।
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UPSC जैसी कठिन परीक्षा में अच्छी रैंक हासिल करना आसान नहीं होता। इसके लिए लंबे समय तक पढ़ाई, अलग-अलग विषयों की समझ और परीक्षा के हर चरण की तैयारी करनी पड़ती है। वैष्णवी की इस उपलब्धि ने गांव के दूसरे युवाओं का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
पिता सर्वे अधिकारी, मां संभालती हैं घर
वैष्णवी के परिवार की बात करें तो उनके पिता राजीव नयन मध्य प्रदेश के सिंगरौली में सर्वे अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। परिवार में वैष्णवी के अलावा एक भाई और एक बहन भी हैं।
घर में पढ़ाई को महत्व दिया जाता रहा है। वैष्णवी शुरू से ही अपनी शिक्षा को लेकर गंभीर थीं। परिवार ने भी पढ़ाई और आगे बढ़ने के उनके फैसले में साथ दिया।
गांव से निकलकर देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में जगह बनाने तक का सफर उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है। हालांकि, उन्होंने UPSC की तैयारी कितने साल की और किस प्रयास में सफलता मिली, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए परिवार का सहयोग कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
रामगढ़ के कैंट स्कूल से दिल्ली विश्वविद्यालय तक की पढ़ाई
वैष्णवी की शुरुआती शिक्षा रामगढ़ स्थित कैंट स्कूल से हुई। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वह उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली गईं और दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई की।
छोटे गांव से बाहर निकलकर बड़े शिक्षण संस्थान तक पहुंचना उनके शैक्षणिक सफर का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने पढ़ाई के दौरान अपना ध्यान प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी पर भी रखा।
दिल्ली विश्वविद्यालय देश के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल है। यहां अलग-अलग राज्यों से छात्र पढ़ने आते हैं। वैष्णवी ने भी इसी विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी की।
हालांकि, उन्होंने किस विषय में डिग्री हासिल की और सिविल सेवा परीक्षा में कौन-सा वैकल्पिक विषय चुना था, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
UPSC परीक्षा में सफलता पाना क्यों है बड़ी उपलब्धि?
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा देश की कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल बड़ी संख्या में युवा इसमें शामिल होते हैं। इसी परीक्षा के जरिए आईएएस, आईपीएस और दूसरी केंद्रीय सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन होता है। परीक्षा तीन चरणों में पूरी होती है। पहले प्रारंभिक परीक्षा, फिर मुख्य परीक्षा और आखिर में इंटरव्यू होता है। मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को जोड़कर उम्मीदवारों की अंतिम रैंक तय की जाती है।
वैष्णवी की सफलता से गांव की बेटियों का बढ़ा हौसला
दादपुर जैसे छोटे गांव से निकलकर UPSC में अच्छी रैंक लाना वैष्णवी के लिए बड़ी उपलब्धि है। उनकी कामयाबी की चर्चा अब बेलागंज और आसपास के इलाकों में भी हो रही है। खासकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को उनकी सफलता से नई उम्मीद मिली है।
गांवों में रहने वाले कई छात्र पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पटना, दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में जाते हैं। इसके लिए परिवारों को काफी खर्च भी उठाना पड़ता है। ऐसे माहौल में दादपुर की बेटी का सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना गांव के दूसरे बच्चों के लिए भी खुशी की बात है।










