अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने बड़ा बयान दिया है। ओमान के सुल्तान से मुलाकात के दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया को बड़ी ताकतों की लड़ाई का मैदान नहीं बनने देना चाहिए। चीन ने शांति वार्ता पर जोर दिया है।
बीजिंग: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के नए हमलों की आशंका के बीच चीन ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार, 2 नवंबर को बीजिंग पहुंचे ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सैद से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों को बड़ी ताकतों की आपसी प्रतिस्पर्धा का मैदान नहीं बनना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने या सैन्य कार्रवाई बढ़ाने का सवाल है।
ओमान के सुल्तान से मुलाकात में शी चिनफिंग ने क्या कहा?
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार, 2 नवंबर को बीजिंग में ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव और पश्चिम एशिया के हालात पर लंबी बातचीत हुई। चिनफिंग ने कहा कि दुनिया में इस समय काफी बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में खाड़ी देशों को बड़ी ताकतों की आपसी लड़ाई से दूर रखना जरूरी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चिनफिंग ने कहा कि पश्चिम एशिया को ऐसा इलाका नहीं बनने देना चाहिए, जहां बड़े देश अपना दबदबा बनाने के लिए एक-दूसरे से टकराएं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में शांति बनाए रखना किसी एक देश की जिम्मेदारी नहीं है। सभी देशों को मिलकर इसके लिए काम करना होगा।
चिनफिंग ने यह भी कहा कि चीन अरब देशों और खाड़ी देशों के साथ मिलकर युद्ध खत्म कराने की कोशिश करता रहेगा। उनका मानना है कि बातचीत के जरिए ही इस समस्या का हल निकाला जा सकता है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से हालात और बिगड़ सकते हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता कराना चाहता है चीन
पश्चिम एशिया में लंबे समय से अमेरिका की मजबूत पकड़ रही है। लेकिन अब चीन भी इस इलाके के देशों के साथ अपने रिश्ते बढ़ा रहा है। खासकर ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष के बीच चीन लगातार बातचीत के जरिए युद्ध रोकने की बात कर रहा है। इस लड़ाई का असर केवल इन देशों तक नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस दूसरे देशों तक पहुंचती है। जहाजों की आवाजाही रुकने या धीमी होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने का खतरा रहता है। चीन चाहता है कि अमेरिका और ईरान फिर से बातचीत शुरू करें और किसी समझौते पर पहुंचें। इसी सिलसिले में चीन के पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत झाई जून नवंबर में ईरान, ओमान और सऊदी अरब जाएंगे। वहां वह अधिकारियों से मिलकर युद्ध रोकने के रास्तों पर चर्चा करेंगे।
होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर चीन और ओमान ने क्या कहा?
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बीजिंग में हुई बैठक के बाद चीन और ओमान ने 20 बिंदुओं वाला संयुक्त बयान जारी किया। इसमें दोनों देशों ने अमेरिका और ईरान से लड़ाई रोकने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की। दोनों देशों ने कहा कि अमेरिका और ईरान को जून में हुए इस्लामाबाद समझौते की रूपरेखा पर लौटना चाहिए। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम और दूसरे विवादों पर दोबारा बातचीत शुरू की जा सकती है।
बैठक में होर्मुज स्ट्रेट का मुद्दा भी उठाया गया। चीन और ओमान ने कहा कि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही फिर से सामान्य होनी चाहिए। दुनिया के कई देश तेल और गैस के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं।
भारत के लिए भी यह समुद्री रास्ता काफी अहम है। खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस की आपूर्ति पर यहां के हालात का असर पड़ सकता है। अगर जहाजों को आने-जाने में परेशानी होती है, तो तेल की कीमतों और सामान पहुंचाने के खर्च पर भी असर पड़ सकता है।
ईरान और सऊदी अरब के अधिकारियों से भी हुई बातचीत
चीन केवल ओमान के साथ ही नहीं, बल्कि ईरान और सऊदी अरब से भी इस मामले पर बातचीत कर रहा है। सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप सचिव अली बाघेरी कानी से मुलाकात की। वांग यी ने कहा कि चीन ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का समर्थन करता है। उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि वे दोबारा हथियार उठाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाएं। उनके मुताबिक, लड़ाई जारी रहने से किसी भी देश का फायदा नहीं होगा।
इसी दिन वांग यी ने सऊदी अरब के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद बिन मोहम्मद अल-ऐबान से भी मुलाकात की। दोनों के बीच पश्चिम एशिया के हालात और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर चर्चा हुई।
48 साल में पहली बार चीन पहुंचे ओमान के सुल्तान
ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक की चीन यात्रा एक और वजह से खास रही। चीन और ओमान के बीच 1978 में राजनयिक संबंध बने थे। इसके बाद पहली बार ओमान के किसी सुल्तान ने चीन की राजकीय यात्रा की है। दोनों देशों के नेताओं ने पश्चिम एशिया के मुद्दों के अलावा आपसी कारोबार पर भी बात की। तेल, गैस, निवेश, नई तकनीक और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमति बनी। चीन पहले से ही ओमान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
ओमान के सुल्तान ने पश्चिम एशिया में शांति लाने के लिए चीन की कोशिशों का समर्थन किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन आगे भी इस मामले में अपनी भूमिका निभाएगा। अब देखना होगा कि चीन और ओमान की कोशिशों से अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा बातचीत शुरू होती है या नहीं। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है और इसका असर खाड़ी क्षेत्र के साथ दुनिया के तेल कारोबार पर भी पड़ रहा है।










