अमेरिका में आज, 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल की शुचिता पटेल फोरसिथ काउंटी कमिश्नर पद के लिए मैदान में हैं। डेमोक्रेट उम्मीदवार पटेल का मुकाबला रिपब्लिकन नेता टॉड लेवेंट से है। उनकी उम्मीदवारी ऐतिहासिक मानी जा रही है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में इस बार भारतीय मूल की शुचिता पटेल का नाम चर्चा में है। वह जॉर्जिया राज्य की फोरसिथ काउंटी में कमिश्नर पद के लिए चुनाव लड़ रही हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार शुचिता का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा कमिश्नर टॉड लेवेंट से है। मतदान 3 नवंबर 2026 को होगा।
फोरसिथ काउंटी में पहली भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार के तौर पर उनकी भागीदारी को खास माना जा रहा है। इस इलाके का इतिहास नस्ली हिंसा और भेदभाव से जुड़ा रहा है।
घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं शुचिता पटेल
अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले उम्मीदवारों ने प्रचार तेज कर दिया है। जॉर्जिया की फोरसिथ काउंटी में भारतीय मूल की शुचिता पटेल भी लगातार लोगों से मिल रही हैं। रविवार, 1 नवंबर को वह घर-घर जाकर मतदाताओं से बातचीत करती नजर आईं। 40 साल की शुचिता डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर फोरसिथ काउंटी बोर्ड ऑफ कमिश्नर्स की डिस्ट्रिक्ट-3 सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उनके सामने रिपब्लिकन उम्मीदवार टॉड लेवेंट हैं, जो 2011 से इस पद पर बने हुए हैं।
शुचिता पटेल ने अपने चुनाव प्रचार में स्थानीय समस्याओं को प्रमुखता दी है। उनका कहना है कि काउंटी में तेजी से आबादी बढ़ रही है, लेकिन सड़क, स्कूल और दूसरी सुविधाओं पर भी उसी रफ्तार से काम करने की जरूरत है। वह सरकारी खर्चों में पारदर्शिता, बेहतर सड़कें और जिम्मेदारी के साथ विकास करने की बात कर रही हैं। इसके अलावा उनका जोर ऐसे फैसलों पर है जिनसे स्थानीय परिवारों और कामकाजी लोगों को फायदा मिले।
कौन हैं भारतीय मूल की शुचिता पटेल?
शुचिता पटेल का जन्म अमेरिका में हुआ था। उनके माता-पिता भारत से जाकर वहां बसे थे। साल 1993 में शुचिता अपने परिवार के साथ जॉर्जिया के अल्फारेटा इलाके में रहने लगी थीं। उन्होंने जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और इसके बाद पैसों के हिसाब-किताब और बजट से जुड़े काम करने लगीं। वह करीब 30 साल से उत्तरी जॉर्जिया में रह रही हैं। उनके तीन बच्चे हैं और फिलहाल वह अपने परिवार के साथ फोरसिथ काउंटी में रहती हैं।
राजनीति में कदम रखने से पहले शुचिता बजट बनाने, खर्चों का हिसाब रखने और आगे की योजनाएं तैयार करने का काम करती थीं। अब वह अपने इसी अनुभव का इस्तेमाल लोगों की समस्याएं दूर करने में करना चाहती हैं। शुचिता का कहना है कि उन्होंने पहले कभी राजनीति में आने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन अपने इलाके की परेशानियां और सरकारी कामकाज को लेकर लोगों की शिकायतें देखकर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया।
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फोरसिथ काउंटी में 1912 में क्या हुआ था?
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य की फोरसिथ काउंटी का पुराना इतिहास नस्ली हिंसा से जुड़ा रहा है। साल 1912 में यहां अश्वेत लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। उस समय गोरे लोगों की भीड़ ने अश्वेत परिवारों को निशाना बनाया था। एक अश्वेत व्यक्ति की भीड़ ने हत्या कर दी थी और कई परिवारों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था।
अटलांटा हिस्ट्री सेंटर के अनुसार, उस हिंसा के दौरान 1,000 से ज्यादा अश्वेत लोगों को जबरन इलाके से निकाल दिया गया था। इसके बाद कई साल तक यहां ज्यादातर गोरे लोग ही रहते थे। बाद के वर्षों में भी नस्ल के आधार पर भेदभाव और तनाव की घटनाएं सामने आती रहीं। हालांकि, अब फोरसिथ काउंटी पहले जैसी नहीं रही। यहां अलग-अलग देशों और समुदायों के लोग आकर बस गए हैं। भारतीय मूल के परिवार भी बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे इलाके से शुचिता पटेल का चुनाव लड़ना चर्चा का विषय बना हुआ है।
टॉड लेवेंट से होगा शुचिता पटेल का मुकाबला
चुनाव में शुचिता पटेल का मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के टॉड लेवेंट से है। लेवेंट करीब 16 साल से फोरसिथ काउंटी की राजनीति में हैं और कई बार चुनाव जीत चुके हैं। ऐसे में शुचिता के सामने लंबे समय से चुनाव लड़ रहे नेता की चुनौती है। शुचिता का कहना है कि सरकारी कामकाज में लोगों को साफ-साफ जानकारी मिलनी चाहिए। वह चाहती हैं कि इलाके में ऐसे घर बनें जिन्हें आम कमाई वाले परिवार भी खरीद या किराए पर ले सकें।
इसके अलावा सरकारी पैसे कहां खर्च हो रहे हैं, इसकी जानकारी भी लोगों तक पहुंचनी चाहिए। दूसरी तरफ टॉड लेवेंट सड़कों की सुरक्षा, पानी की व्यवस्था और रिहायशी इलाकों में होने वाले विकास के कामों को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान शुचिता ने महंगाई का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि आम परिवारों के लिए घर चलाना पहले से मुश्किल होता जा रहा है।
बाजार से राशन खरीदने, गाड़ी में पेट्रोल भरवाने और इलाज कराने में लोगों के काफी पैसे खर्च हो रहे हैं। शुचिता के मुताबिक, वह चाहती हैं कि उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को रहने के लिए एक बेहतर इलाका मिले। इसी सोच के साथ वह चुनाव मैदान में उतरी हैं।








