देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने सितंबर तिमाही में 23,038 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। बैंक की शुद्ध ब्याज आय 49,143 करोड़ रुपये रही। लोन कारोबार बढ़ने के साथ खराब कर्ज यानी NPA में भी कमी आई है।
बिजनेस न्यूज़: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने मंगलवार, 3 नवंबर को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। जुलाई से सितंबर के बीच बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.28 फीसदी बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में बैंक ने 20,160 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।
इस बार ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी है और खराब कर्ज के लिए अलग रखी जाने वाली रकम भी घटी है। हालांकि, मुनाफे में एकमुश्त हिस्सेदारी बिक्री से मिली रकम का भी योगदान रहा।
SBI के मुनाफे में इतनी बढ़ोतरी कैसे हुई?
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सितंबर तिमाही में अच्छी कमाई की है। बैंक का मुनाफा बढ़कर 23,038 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में SBI ने 20,160 करोड़ रुपये कमाए थे। यानी इस बार बैंक को करीब 2,878 करोड़ रुपये ज्यादा फायदा हुआ है। बैंक की कमाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह लोन का कारोबार बढ़ना और उस पर पहले से ज्यादा ब्याज मिलना है। इसके अलावा पुराने खराब कर्ज के लिए बैंक को इस बार कम रकम अलग रखनी पड़ी है।
SBI को अपनी सहयोगी कंपनी SBI Funds Management में हिस्सेदारी बेचने से भी फायदा हुआ। इस सौदे से बैंक को करीब 7,288 करोड़ रुपये की एकमुश्त कमाई हुई। हालांकि, यह हर तिमाही होने वाली कमाई नहीं है। बैंक की कुल आय भी पिछले साल के 1,34,979 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,43,796 करोड़ रुपये हो गई। वहीं, रोजमर्रा के बैंकिंग कारोबार से होने वाला ऑपरेटिंग प्रॉफिट 7.28 फीसदी बढ़कर 34,226 करोड़ रुपये पहुंच गया।
लोन पर ब्याज से बैंक ने कमाए ज्यादा पैसे
SBI को इस तिमाही में ब्याज से भी अच्छी कमाई हुई है। बैंक की शुद्ध ब्याज आय यानी NII बढ़कर 49,143 करोड़ रुपये हो गई। पिछले साल जुलाई से सितंबर के बीच यह कमाई 42,847 करोड़ रुपये थी। इस बार इसमें करीब 14.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आसान भाषा में समझें तो बैंक लोगों को होम लोन, कार लोन और कारोबार के लिए कर्ज देता है। इन कर्जों पर उसे ब्याज मिलता है। दूसरी तरफ बैंक में पैसा जमा करने वाले ग्राहकों को भी ब्याज देना पड़ता है। इन दोनों के बीच जो अंतर बचता है, उसे शुद्ध ब्याज आय कहते हैं।
सितंबर तिमाही में SBI को ब्याज से कुल करीब 1.32 लाख करोड़ रुपये मिले। यह पिछले साल से लगभग 10 फीसदी ज्यादा है। वहीं, ग्राहकों की जमा रकम और दूसरे मदों पर ब्याज देने में बैंक ने करीब 82,876 करोड़ रुपये खर्च किए। बैंक का घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन भी थोड़ा बेहतर हुआ है। जून तिमाही में यह 3 फीसदी था, जो सितंबर में बढ़कर 3.11 फीसदी हो गया। इससे पता चलता है कि ब्याज से होने वाली कमाई के मामले में बैंक की स्थिति पिछली तिमाही से सुधरी है।
SBI ने बांटे ज्यादा लोन, कारोबार 52 लाख करोड़ के पार
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इस बार SBI के लोन कारोबार में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। सितंबर 2026 के आखिर तक बैंक की कुल बकाया लोन राशि करीब 52.08 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। एक साल पहले के मुकाबले इसमें लगभग 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। बैंक ने खेती-किसानी और छोटे कारोबारियों को ज्यादा कर्ज दिया है। कृषि क्षेत्र में लोन करीब 23 फीसदी बढ़ा है। वहीं, छोटे और मध्यम कारोबारियों को दिए गए कर्ज में लगभग 22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
आम ग्राहकों को मिलने वाले लोन में भी तेजी रही। SBI का रिटेल पर्सनल लोन कारोबार बढ़कर 18.25 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें घर खरीदने या बनवाने के लिए दिए गए लोन की रकम करीब 9.86 लाख करोड़ रुपये रही। पिछले साल होम लोन का आंकड़ा 8.80 लाख करोड़ रुपये था।
बड़ी कंपनियों को दिए जाने वाले कर्ज में भी बढ़ोतरी हुई है। बैंक का कॉर्पोरेट लोन कारोबार 16.1 फीसदी बढ़कर 14.39 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। विदेशों में बैंक के लोन कारोबार में भी रुपये के हिसाब से करीब 23 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।
बैंक में जमा पैसा बढ़ा, लेकिन CASA में आई कमी
SBI में पैसा जमा करने वाले ग्राहकों की कुल जमा रकम भी बढ़ी है। सितंबर के आखिर तक बैंक के पास 62.78 लाख करोड़ रुपये के डिपॉजिट थे। पिछले साल इसी समय यह रकम 55.92 लाख करोड़ रुपये थी। इस हिसाब से बैंक की जमा राशि में करीब 12.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, बैंक का CASA अनुपात थोड़ा कम हुआ है। CASA में ग्राहकों के सेविंग अकाउंट और करंट अकाउंट में जमा पैसे को गिना जाता है। इन खातों पर बैंक को आमतौर पर कम ब्याज देना पड़ता है।
पिछले साल SBI का CASA अनुपात 39.63 फीसदी था, जो इस बार घटकर 38.32 फीसदी रह गया। इसकी एक वजह यह भी है कि बचत और चालू खातों के मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट जैसी योजनाओं में जमा रकम तेजी से बढ़ी है।
खराब कर्ज घटने से भी SBI को हुआ फायदा
SBI के लिए अच्छी बात यह रही कि उसके खराब कर्ज में कमी आई है। बैंक का ग्रॉस एनपीए सितंबर तिमाही में घटकर 1.39 फीसदी रह गया। पिछले साल इसी समय यह 1.73 फीसदी था। जून 2026 में बैंक का ग्रॉस एनपीए 1.47 फीसदी दर्ज किया गया था। एनपीए ऐसे कर्ज को कहा जाता है, जिसकी किस्त या ब्याज लंबे समय से नहीं चुकाया गया हो और वह तय नियमों के मुताबिक खराब कर्ज की श्रेणी में आ गया हो। ऐसे कर्ज बढ़ने पर बैंक को नुकसान का खतरा रहता है।
SBI का नेट एनपीए भी पिछले साल के 0.42 फीसदी से घटकर 0.36 फीसदी रह गया है। इससे बैंक के कर्ज की स्थिति में सुधार दिखाई देता है। खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए बैंक ने इस बार 2,759 करोड़ रुपये अलग रखे हैं। पिछले साल इसी तिमाही में 4,132 करोड़ रुपये रखने पड़े थे। यानी इस मद में करीब 33 फीसदी कम रकम रखनी पड़ी।









