अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस को इंटेलिस्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर के अधिग्रहण के लिए CCI की मंजूरी मिल गई है। यह सौदा 3,050 करोड़ रुपये का है। इसके पूरा होने से अदाणी समूह का स्मार्ट मीटर कारोबार बढ़ेगा और उसका पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ से ज्यादा मीटर तक पहुंच सकता है।
बिजनेस न्यूज़: गौतम अदाणी के नेतृत्व वाले अदाणी समूह ने एक और बड़ी कंपनी के अधिग्रहण की दिशा में कदम बढ़ाया है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड को इंटेलिस्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है। करीब 3,050 करोड़ रुपये की इस डील से समूह को देश के स्मार्ट मीटर कारोबार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिलेगी। आयोग ने 30 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित अधिग्रहण को मंजूरी दी थी।
3050 करोड़ रुपये में इंटेलिस्मार्ट की पूरी हिस्सेदारी खरीदेगा अदाणी समूह
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने शुक्रवार को अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस सौदे के तहत कंपनी इंटेलिस्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर की 100 प्रतिशत इक्विटी शेयर पूंजी खरीदेगी। यह हिस्सेदारी नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF) और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) से खरीदी जाएगी।
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने इस अधिग्रहण की घोषणा 9 जून 2026 को की थी। उस समय कंपनी ने बताया था कि उसने दोनों संस्थानों के साथ बाध्यकारी शेयर खरीद और सब्सक्रिप्शन समझौता किया है। इस डील की कुल कीमत 3,050 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें इंटेलिस्मार्ट की पूरी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदने के साथ NIIF के पास मौजूद वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर का भुगतान भी शामिल है।
CCI की मंजूरी मिलने से सौदे की एक बड़ी नियामकीय बाधा दूर हो गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। कंपनी को अब बाकी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। NIIF भारत में बुनियादी ढांचा निवेश से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। वहीं, EESL बिजली मंत्रालय के तहत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का संयुक्त उद्यम है। इन दोनों संस्थानों ने मिलकर इंटेलिस्मार्ट को स्मार्ट मीटर कारोबार में आगे बढ़ाया है।
क्या काम करती है इंटेलिस्मार्ट और अदाणी को कैसे मिलेगा फायदा?
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इंटेलिस्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर देश में स्मार्ट बिजली मीटर लगाने और उनसे जुड़ी तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराने का काम करती है। कंपनी एडवांस्ड मीटरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर यानी AMI कारोबार से जुड़ी हुई है। इसके अलावा वह कुछ परियोजनाओं में स्मार्ट गैस मीटर लगाने का काम भी करती है। इंटेलिस्मार्ट के पास पांच राज्यों में 2.2 करोड़ से ज्यादा स्मार्ट मीटर का पोर्टफोलियो है। इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और असम शामिल हैं। कंपनी देश के प्रमुख स्मार्ट मीटर सेवा प्रदाताओं में गिनी जाती है।
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस पहले से बिजली ट्रांसमिशन, डिस्ट्रीब्यूशन और स्मार्ट मीटर लगाने के कारोबार में सक्रिय है। इस अधिग्रहण के पूरा होने के बाद दोनों कंपनियों का संयुक्त स्मार्ट मीटर पोर्टफोलियो 4.7 करोड़ से अधिक हो सकता है। इससे अदाणी समूह को अपने मौजूदा कारोबार का विस्तार करने और नई परियोजनाओं पर काम करने में मदद मिलेगी। कंपनी का मानना है कि बड़े स्तर पर कारोबार करने से संचालन और रखरखाव के खर्च को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
स्मार्ट मीटर में बिजली की खपत से जुड़ी जानकारी डिजिटल तरीके से दर्ज होती है। इससे बिजली वितरण कंपनियों को मीटर रीडिंग और बिलिंग की प्रक्रिया बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ग्राहकों के बिजली बिल या टैरिफ में बदलाव का फैसला संबंधित नियामक नियमों के अनुसार ही होगा।
जेपी एसोसिएट्स के बाद अदाणी समूह का एक और बड़ा अधिग्रहण
अदाणी समूह पिछले कुछ समय से अलग-अलग क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ा रहा है। इससे पहले समूह की प्रमुख कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज ने दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JP Associates) के अधिग्रहण की योजना पेश की थी। इस योजना को मार्च 2026 में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) से मंजूरी मिल गई थी। जेपी एसोसिएट्स का कारोबार सीमेंट, बिजली, रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़ा रहा है।
अब इंटेलिस्मार्ट के अधिग्रहण के जरिए अदाणी समूह बिजली वितरण से जुड़ी डिजिटल सेवाओं में अपना कारोबार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस एक सूचीबद्ध कंपनी है और इसके शेयर बीएसई तथा एनएसई पर कारोबार करते हैं। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बीएसई पर कंपनी का शेयर 1,345.55 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले 52 सप्ताह में इसका उच्चतम स्तर 1,789 रुपये और न्यूनतम स्तर 804.70 रुपये रहा है।
हालांकि, किसी कंपनी के अधिग्रहण को मंजूरी मिलने से उसके शेयर की कीमत बढ़ना तय नहीं होता। शेयर बाजार में कंपनी के प्रदर्शन के साथ आर्थिक और दूसरी कारोबारी परिस्थितियों का भी असर पड़ता है।









