अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी रैली में कहा कि चीन और रूस अमेरिका की जासूसी करते हैं, लेकिन अमेरिका भी ऐसा करता है। उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और महंगाई तथा तेल की कीमतों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा।
वॉशिंगटन: अमेरिका में आज, 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने नई चर्चा शुरू कर दी है। रविवार, 1 नवंबर को आयोवा के डुबुक शहर में रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि चीन और रूस अमेरिका की जासूसी करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इन दोनों देशों के खिलाफ खुफिया गतिविधियां चलाता है और इसमें उनसे बेहतर है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी संघर्ष और देश की अर्थव्यवस्था पर भी अपनी बात रखी।
ट्रंप बोले- चीन और रूस हमारी जासूसी करते हैं, हम भी पीछे नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आयोवा में चुनाव प्रचार के दौरान चीन और रूस की जासूसी गतिविधियों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि कई लोग उनसे शिकायत करते हैं कि चीन अमेरिकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है, लेकिन उन्हें इस बात से ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने समर्थकों को बताया कि जब किसी ने उनसे चीन की जासूसी का जिक्र किया तो उन्होंने जवाब दिया कि अमेरिका भी चीन की जासूसी करता है। रूस को लेकर भी उन्होंने इसी तरह की बात कही।
ट्रंप का दावा था कि अमेरिका खुफिया जानकारी जुटाने के मामले में चीन और रूस से कहीं आगे है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि अमेरिका किस तरह की जासूसी करता है या किन अभियानों के आधार पर वह ऐसा दावा कर रहे हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और चीन के बीच तकनीक, राष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। रूस के साथ भी अमेरिका के रिश्ते कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तनावपूर्ण रहे हैं।
ईरान को लेकर कहा- युद्ध हमने शुरू नहीं किया, लेकिन खत्म करेंगे
जासूसी के मुद्दे के अलावा ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने कहा कि इस संघर्ष की शुरुआत अमेरिका ने नहीं की थी, लेकिन उनकी सरकार इसे खत्म करने के लिए कार्रवाई कर रही है।
अपने भाषण में उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब रडार, विमान-रोधी हथियार और प्रभावी नेतृत्व की कमी हो गई है। उन्होंने यहां तक कहा कि बातचीत करने के लिए किसी जिम्मेदार नेता को तलाशना भी मुश्किल हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में ईरान के शीर्ष नेतृत्व को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, ईरान की सैन्य क्षमता और नेतृत्व को लेकर किए गए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। ट्रंप पहले भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा बताते रहे हैं।
महंगाई पर बाइडेन सरकार को ठहराया जिम्मेदार
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आयोवा में दो घंटे से अधिक समय तक भाषण देने के बाद ट्रंप कंसास के सलीना शहर पहुंचे। यहां उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में रैली की और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। ट्रंप ने दावा किया कि पिछले तीन महीनों की महंगाई दर 1.7 प्रतिशत पर आ गई है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब उन्हें पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार से ऊंची कीमतों वाली अर्थव्यवस्था मिली थी।
राष्ट्रपति ने खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की जरूरतों पर बढ़ते खर्च के लिए पिछली सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, 1.7 प्रतिशत का आंकड़ा उनका चुनावी दावा है। इसे आधिकारिक सालाना महंगाई दर के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। अमेरिका में महंगाई और घरेलू खर्च मध्यावधि चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। ऐसे में ट्रंप अपनी रैलियों में अर्थव्यवस्था को लेकर लगातार सफाई दे रहे हैं।
तेल की कीमतों पर भी दिया जवाब
ईरान के साथ संघर्ष के बीच तेल और पेट्रोल की कीमतों को लेकर भी ट्रंप ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में तेल की कीमतें बाइडेन और बराक ओबामा के समय की तुलना में कम हैं। ट्रंप ने माना कि पश्चिम एशिया में संघर्ष का असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने इसे अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा के लिए चुकाई जाने वाली छोटी कीमत बताया।
उनका कहना था कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होते ही तेल की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोका है और इसके लिए आर्थिक दबाव सहना जरूरी है। फिलहाल तेल की कीमतें कब और कितनी कम होंगी, इसका निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। यह संघर्ष की स्थिति और वैश्विक तेल आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
3 नवंबर को मतदान, संसद में बहुमत बचाने की चुनौती
अमेरिका में मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों पर मतदान होगा। रिपब्लिकन पार्टी के सामने दोनों सदनों में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
चुनाव से पहले ट्रंप ने आयोवा और कंसास में रैलियां करके रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार किया। दोनों जगह उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई, महंगाई, राष्ट्रीय सुरक्षा और अपनी सरकार की नीतियों को प्रमुखता से उठाया। इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि राष्ट्रपति ट्रंप को अपने कार्यकाल के अगले दो वर्षों में संसद से कितना सहयोग मिल पाएगा। खासकर बजट, कानून बनाने और सरकार की नीतियों की निगरानी जैसे मामलों में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।









