Israel Election 2026: नेतन्याहू ने आइजेनकोट संग सरकार बनाने का विकल्प खुला रखा, क्या अरब पार्टियां बदलेंगी सत्ता का समीकरण?

Israel Election 2026: नेतन्याहू ने आइजेनकोट के साथ सरकार बनाने का विकल्प खुला रखा है। अरब पार्टियों की 19 सीटें सत्ता का समीकरण बदल सकती हैं। जानें पूरा मामला

इजरायल में 27 अक्टूबर के चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ सरकार बनाने का विकल्प खुला रखा है। अरब पार्टियों की भूमिका अब अहम हो गई है।

यरुशलम: इजरायल में आम चुनाव के बाद नई सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है। इस बीच खबर है कि नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच किसी समझौते की घोषणा नहीं हुई है। दूसरी तरफ अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्ष के पास सरकार बनाने का रास्ता खुल सकता है। अब राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

बहुमत से 8 सीट दूर नेतन्याहू, आइजेनकोट के साथ सरकार बनाने की चर्चा

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को हुए संसदीय चुनाव के बाद सरकार बनाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन उनके नेतृत्व वाला गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर सका। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के साथ राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उन्होंने बंद कमरे में हुई बातचीत के दौरान सत्ता साझेदारी के अलग-अलग विकल्पों पर विचार करने के संकेत दिए हैं।

हालांकि, नेतन्याहू की ओर से गठबंधन का कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया है। दूसरी तरफ आइजेनकोट पहले ही कह चुके हैं कि वह नेतन्याहू के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल नहीं होंगे। रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के सहयोगियों को चिंता है कि विपक्षी दल अरब पार्टियों और धार्मिक दलों का समर्थन लेकर वैकल्पिक सरकार बना सकते हैं। ऐसा होने पर नेतन्याहू को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है।

चुनाव में किस गठबंधन को कितनी सीटें मिलीं?

इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं और सामान्य बहुमत के लिए 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। हालिया चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को 27 सीटें मिली हैं। उनके सहयोगी दलों को मिलाकर गठबंधन के पास कुल 53 सीटें हैं। इस तरह वह बहुमत से आठ सीट पीछे हैं।

दूसरी तरफ गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी ने 21 सीटें जीती हैं। उनके सहयोगी विपक्षी दलों को मिलाकर कुल 48 सीटें हैं। सबसे महत्वपूर्ण नतीजा अरब पार्टियों का रहा है। जॉइंट लिस्ट को 11 और राअम को आठ सीटें मिली हैं। दोनों के पास कुल 19 सांसद हैं। अगर आइजेनकोट के 48 सांसदों को अरब पार्टियों के 19 सांसदों का समर्थन मिल जाए, तो कुल संख्या 67 हो सकती है। यह बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटों से छह ज्यादा है। हालांकि, केवल सीटों का गणित पर्याप्त नहीं है। इन दलों के बीच कई राजनीतिक मुद्दों पर मतभेद भी हैं।

अरब पार्टियां कैसे बन सकती हैं सरकार बनाने में अहम?

Israel Election 2026: नेतन्याहू ने आइजेनकोट संग सरकार बनाने का विकल्प खुला रखा, क्या अरब पार्टियां बदलेंगी सत्ता का समीकरण?

इजरायल की राजनीति में इस बार अरब पार्टियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। चुनाव में इन दलों ने कुल 19 सीटें जीती हैं, जो उनके लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। जॉइंट लिस्ट के वरिष्ठ नेता अहमद तीबी ने संकेत दिया है कि उनकी पार्टी नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्षी दलों को बाहर से समर्थन दे सकती है। हालांकि, पार्टी खुद सरकार में शामिल होने के पक्ष में नहीं है।

दूसरी तरफ राअम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास सरकार बनाने की बातचीत में अपनी पार्टी की भूमिका चाहते हैं। आइजेनकोट के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी दलों को एक साथ रखना है। यिसराइल बेतेनु के नेता एविगडोर लिबरमैन अरब पार्टियों पर निर्भर सरकार का विरोध कर चुके हैं। इसके अलावा यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म जैसे यहूदी धार्मिक दलों के साथ भी बातचीत का विकल्प मौजूद है। लेकिन सेना में भर्ती से जुड़े नियमों पर विपक्ष और धार्मिक पार्टियों के बीच मतभेद हैं।

इसी कारण आइजेनकोट सीमित समर्थन वाली अल्पमत सरकार की संभावना भी देख रहे हैं। इसमें कुछ दल सरकार का हिस्सा बने बिना महत्वपूर्ण मतदान से दूर रह सकते हैं।

संसद के स्पीकर पद को लेकर भी शुरू हुई खींचतान

सरकार बनाने की बातचीत के साथ नेसेट के स्पीकर पद को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गई हैं। विपक्षी दल मौजूदा स्पीकर आमिर ओहाना की जगह अपना उम्मीदवार लाने की तैयारी कर रहे हैं। ओहाना नेतन्याहू की लिकुड पार्टी से हैं। इजरायल की नई संसद की पहली बैठक 10 नवंबर को होनी है। विपक्षी दल चाहते हैं कि इसी दौरान नए स्पीकर का चुनाव कराया जाए।

स्पीकर का पद इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संसद में विधायी कामकाज और प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में उसकी अहम भूमिका होती है। विपक्ष 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमलों और उस समय सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की स्वतंत्र जांच कराने के पक्ष में है। इसके लिए सरकारी जांच आयोग के गठन का प्रस्ताव भी चर्चा में है। हालांकि, विपक्षी पार्टियों के बीच नए स्पीकर के नाम पर अभी सहमति नहीं बन पाई है।

राष्ट्रपति हर्जोग के फैसले पर टिकी नजर

इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। चुनाव के आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को राष्ट्रपति के सामने पेश किए जाने हैं। इसके बाद वह राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और तय करेंगे कि किस नेता को सरकार बनाने का मौका दिया जाए।

जिस नेता को सरकार बनाने की जिम्मेदारी मिलेगी, उसे शुरुआत में 28 दिन का समय दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर यह अवधि 14 दिन और बढ़ाई जा सकती है।

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