अरबपति निवेशक मार्क क्यूबन ने नौकरी तलाश रहे युवाओं को सलाह दी है कि वे मनपसंद नौकरी मिलने का इंतजार न करें। उन्होंने अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस का उदाहरण देते हुए कहा कि छोटी नौकरी से भी करियर की अच्छी शुरुआत हो सकती है।
Tech: कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्यादातर युवा अच्छी कंपनी में नौकरी करना चाहते हैं। कई बार इसी चक्कर में महीनों तक नौकरी की तलाश चलती रहती है। अमेरिकी अरबपति मार्क क्यूबन ने ऐसे युवाओं को एक सलाह दी है। उनका कहना है कि करियर की शुरुआत में नौकरी कितनी बड़ी है, इससे ज्यादा जरूरी है कि आप वहां क्या सीख रहे हैं। उन्होंने Amazon के संस्थापक जेफ बेजोस का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने शुरुआती दिनों में McDonald's में काम किया था।
अच्छी नौकरी के इंतजार में समय न गंवाएं युवा
मार्क क्यूबन ने हाल ही में 'The Diary of a CEO' पॉडकास्ट में युवाओं के करियर को लेकर बात की। उनका कहना था कि हर किसी को शुरुआत में अपनी पसंद की नौकरी नहीं मिलती। ऐसे में सिर्फ बड़ी कंपनी या अच्छे पद का इंतजार करते रहना सही नहीं है।
![]()
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि जहां काम करने का मौका मिले, वहां से शुरुआत करें। नौकरी मिलने के बाद कोशिश यह होनी चाहिए कि अपना काम अच्छी तरह किया जाए और नई जिम्मेदारियां संभालना सीखा जाए।
क्यूबन के मुताबिक, McDonald's या Dairy Queen जैसे फास्ट फूड रेस्टोरेंट में काम करना भी बुरा विकल्प नहीं है। जरूरी नहीं कि कोई व्यक्ति पूरी जिंदगी वहीं नौकरी करे। अगर वह अपने काम से आगे बढ़ता है और ज्यादा जिम्मेदारियां संभालता है, तो भविष्य में दूसरी कंपनियों के सामने भी अपना अनुभव रख सकता है।
जेफ बेजोस ने भी McDonald's में किया था काम
दुनिया के बड़े कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस ने भी अपना करियर किसी बड़ी टेक कंपनी से शुरू नहीं किया था। किशोर उम्र में उन्होंने McDonald's में नौकरी की थी।
बेजोस पहले भी युवाओं को शुरुआती नौकरी से मिलने वाले अनुभव के बारे में बता चुके हैं। उनके मुताबिक, ऐसी जगह काम करने से समय पर पहुंचना, जिम्मेदारी निभाना और अलग-अलग लोगों के साथ काम करना सीखा जा सकता है।
मार्क क्यूबन भी इसी बात पर जोर दे रहे हैं। उनका मानना है कि पहली नौकरी का मकसद सिर्फ पैसा कमाना नहीं होना चाहिए। वहां काम करने के तरीके सीखना भी उतना ही जरूरी है।
मार्क क्यूबन ने खुद भी किए थे छोटे-मोटे काम
आज मार्क क्यूबन की पहचान एक सफल निवेशक और कारोबारी के तौर पर होती है, लेकिन उनकी शुरुआत भी आसान नहीं थी। कॉलेज के दिनों में उन्होंने कचरे के बैग बेचने से लेकर दुकान पर मीट काटने तक का काम किया था।
इसके अलावा उन्होंने डांस सिखाया और बारटेंडर की नौकरी भी की। उस समय ये काम उनके भविष्य के बड़े कारोबार से सीधे जुड़े हुए नहीं थे, लेकिन इन्हीं नौकरियों से उन्हें ग्राहकों के साथ बातचीत करने और काम की जिम्मेदारी समझने का मौका मिला।
क्यूबन ने युवाओं को यह भी समझाया कि नौकरी में आगे बढ़ने के लिए अपने काम को लेकर ईमानदार रहना जरूरी है। केवल यह मान लेना कि आप अच्छा काम कर रहे हैं, काफी नहीं है। यह भी देखना चाहिए कि कहां सुधार की जरूरत है।
नौकरी में तरक्की के लिए क्या करना चाहिए?
Fortune से बातचीत में मार्क क्यूबन ने बताया कि शुरुआती नौकरी में युवाओं को अपने बॉस और साथ काम करने वाले लोगों के साथ अच्छा तालमेल बनाना सीखना चाहिए।
उनके मुताबिक, कर्मचारियों को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि उनकी कंपनी पैसे कैसे कमाती है। साथ ही यह भी देखना चाहिए कि वे अपने काम से कंपनी की कितनी मदद कर सकते हैं।
क्यूबन का कहना है कि करियर में बड़ा बदलाव आने में दो से तीन साल भी लग सकते हैं। इसलिए पहली नौकरी मिलते ही ऊंचे पद की उम्मीद करने के बजाय अपने काम में सुधार करते रहना चाहिए।
जब कोई कर्मचारी जिम्मेदारी से काम करता है और धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, तो उसका पिछला अनुभव नई नौकरी पाने में भी काम आ सकता है।
सुंदर पिचाई और Nvidia के CEO ने भी दी थी ऐसी सलाह
Google के CEO सुंदर पिचाई ने भी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्रों से करियर के शुरुआती फैसलों को लेकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि युवाओं को जिन फैसलों की शुरुआत में बहुत चिंता होती है, वे हमेशा उनकी पूरी जिंदगी तय नहीं करते।
वहीं, Nvidia के CEO जेनसन हुआंग ने अपने शुरुआती दिनों में रेस्टोरेंट में बर्तन धोने और सफाई करने का काम किया था। उन्होंने भी मुश्किल परिस्थितियों से सीखने और खुद को मजबूत बनाने पर जोर दिया है।
इन कारोबारियों की बातों में एक समानता है। उनका मानना है कि पहली नौकरी छोटी होने से किसी का करियर छोटा नहीं हो जाता। वहां सीखा गया काम और अनुभव आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
मार्क क्यूबन की सलाह खासकर उन युवाओं के लिए है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी पहली नौकरी तलाश रहे हैं। उनके मुताबिक, काम शुरू करना और उसमें बेहतर होते जाना, केवल सही मौके का इंतजार करने से ज्यादा उपयोगी हो सकता है।







