चांद और मंगल पर जाने वाले यात्रियों की मदद के लिए Google और NASA एक खास AI रोबोट बना रहे हैं। यह रोबोट मेडिकल सामान पहुंचाने के साथ दूसरे जरूरी काम भी कर सकेगा। इसकी शुरुआती जांच हो चुकी है।
Tech:अंतरिक्ष में किसी यात्री की तबीयत बिगड़ जाए तो इलाज के लिए धरती से मदद पहुंचने में काफी वक्त लग सकता है। चांद और मंगल के लंबे मिशन को देखते हुए NASA ने इस परेशानी का हल तलाशना शुरू किया है। Google की मदद से एक ऐसा रोबोट बनाया जा रहा है, जो जरूरत पड़ने पर दवाइयों और जांच से जुड़े उपकरण लाकर दे सकेगा। फिलहाल इसे अलग-अलग तरह के काम करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
चांद और मंगल मिशन में कैसे काम आएगा Google का नया रोबोट?
NASA आने वाले वर्षों में चांद पर लंबे समय तक इंसानों को रखने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए Artemis मिशन पर काम चल रहा है। आगे मंगल पर भी इंसानों को भेजने की योजना है। ऐसे मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों को कई महीनों तक पृथ्वी से दूर रहना पड़ सकता है। इस दौरान किसी को चोट लगने या बीमार पड़ने पर इलाज करना आसान नहीं होगा।
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Google ने 27 अक्टूबर 2026 को अपने ब्लॉग में इस प्रोजेक्ट की जानकारी दी। कंपनी ने बताया कि NASA की अलग-अलग टीमें मिलकर ऐसा रोबोट बना रही हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों के रोजमर्रा के काम आसान कर सके। इसमें NASA का Human Research Program, Johnson Space Center और Jet Propulsion Laboratory की टीमें शामिल हैं।
यह रोबोट केवल इलाज से जुड़े काम नहीं करेगा। अंतरिक्ष यान के अंदर किसी सामान की जरूरत पड़ने पर उसे खोजकर लाना, मेडिकल उपकरण सही जगह रखना और छोटे-मोटे काम निपटाना भी इसकी जिम्मेदारी होगी।
मान लीजिए किसी अंतरिक्ष यात्री की कमर में अचानक तेज दर्द उठता है। डॉक्टर को शक होता है कि इसकी वजह किडनी में पथरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोबोट अल्ट्रासाउंड मशीन लेकर आ सकता है और जांच के लिए जरूरी सामान तैयार करने में मदद कर सकता है। हालांकि, मरीज की जांच और इलाज का फैसला मेडिकल अधिकारी ही करेगा।
मंगल पर परेशानी बढ़ी तो पृथ्वी से तुरंत नहीं मिलेगी मदद
चांद की तुलना में मंगल ग्रह पृथ्वी से काफी दूर है। वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सबसे बड़ी दिक्कत समय पर संपर्क करना होगा। Google के मुताबिक, मंगल से पृथ्वी पर संदेश भेजने और उसका जवाब वापस मिलने में 44 मिनट तक लग सकते हैं।
अब सोचिए, किसी अंतरिक्ष यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे तुरंत इलाज की जरूरत है। ऐसे में पृथ्वी पर मौजूद डॉक्टर से सलाह लेकर अगला कदम उठाने में काफी देर हो सकती है। इसलिए NASA ऐसी तकनीक चाहता है, जिससे अंतरिक्ष यात्री खुद ही शुरुआती मेडिकल मदद हासिल कर सकें।
Google और NASA पहले से Crew Medical Officer Digital Assistant यानी CMO-DA नाम की तकनीक पर काम कर रहे हैं। इसका मकसद अंतरिक्ष में मेडिकल अधिकारियों को मरीज की परेशानी समझने और इलाज से जुड़ी जानकारी हासिल करने में मदद देना है।
अब इसी दिशा में एक कदम आगे बढ़ते हुए रोबोट तैयार किया जा रहा है। फर्क यह होगा कि यह सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर सामान उठाकर लाने जैसे काम भी करेगा।
फिलहाल इस तकनीक को डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जा रहा है। इसका काम अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करना होगा, जबकि मेडिकल फैसले इंसान ही लेंगे।
मेडिकल बैग उठाने के टेस्ट में मिले अच्छे नतीजे
Google और NASA ने शुरुआती परीक्षण के दौरान रोबोट को एक मेडिकल बैग ढूंढकर दूसरी जगह रखने का काम दिया। इस टेस्ट में रोबोट को 85 प्रतिशत सफलता मिली। हालांकि, यह अभी शुरुआती नतीजा है और असली अंतरिक्ष मिशन पर इस्तेमाल से पहले इसकी कई तरह से जांच करनी होगी।
रोबोट को ट्रेनिंग देने के लिए Google DeepMind के MuJoCo सिम्युलेटर का इस्तेमाल किया गया। इसमें कंप्यूटर पर ही अलग-अलग परिस्थितियां बनाकर देखा जाता है कि रोबोट किस तरह काम करेगा। इससे असली मशीन पर परीक्षण करने से पहले उसकी कमियों का पता लगाने में मदद मिलती है।
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में चार अरब पैरामीटर वाले Pi0 AI मॉडल पर भी काम किया गया है। इसे Google Cloud की मदद से करीब ढाई घंटे में फाइन-ट्यून किया गया। पिछले दो साल में टीम ने लगभग 15 तरह के कंप्यूटिंग डिवाइस की जांच की है। कोशिश यही है कि रोबोट कम बिजली में भी अच्छे से काम कर सके, क्योंकि अंतरिक्ष यान में बिजली और जगह दोनों सीमित होती हैं।
आगे इस रोबोट को आवाज से दिए जाने वाले निर्देश समझने की सुविधा भी मिल सकती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर जांचने और अल्ट्रासाउंड के लिए सामान तैयार करने जैसे कामों में भी इसकी मदद लेने की योजना है।
अभी यह रोबोट तैयार होने के शुरुआती दौर में है। NASA ने इसे अंतरिक्ष में भेजने की कोई तारीख नहीं बताई है। आने वाले टेस्ट के बाद ही साफ होगा कि यह रोबोट अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कितना उपयोगी साबित होता है।









