भागलपुर के 30 किसानों को आधुनिक बागवानी का पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें ड्रोन से फसलों की निगरानी, सेंसर तकनीक, ड्रिप सिंचाई और बेहतर फल उत्पादन के तरीके सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण दो से छह नवंबर तक चलेगा।
भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले के किसानों को अब बागवानी में नई तकनीक इस्तेमाल करने की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए जिले के 30 किसानों को पूर्वी चंपारण भेजा गया है, जहां वे पांच दिनों तक खेती के आधुनिक तरीके सीखेंगे। प्रशिक्षण में ड्रोन से फसलों की निगरानी, सेंसर की मदद से सिंचाई और कम पानी में बेहतर फल उत्पादन पर जोर रहेगा। कृषि वैज्ञानिक किसानों को खेतों में इन तकनीकों का इस्तेमाल भी समझाएंगे।
भागलपुर के 30 किसान सीखेंगे आधुनिक बागवानी, पांच दिन तक चलेगा प्रशिक्षण
बिहार में खेती को नई तकनीक से जोड़ने के लिए किसानों को प्रशिक्षण देने की पहल की गई है। भागलपुर जिले के 30 चयनित किसान दो नवंबर से स्मार्ट बागवानी के तरीके सीखेंगे। इसके लिए कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंध अभिकरण (आत्मा), भागलपुर ने किसानों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय, पिपराकोठी, पूर्वी चंपारण भेजा है।
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यह प्रशिक्षण छह नवंबर तक चलेगा। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कि फलदार पौधों की देखभाल कैसे करें, सिंचाई में पानी की बचत कैसे हो और खेती में तकनीक का इस्तेमाल करके खर्च किस तरह कम किया जा सकता है।
सेंसर से मिलेगी मिट्टी की जानकारी, सिंचाई के नए तरीके सीखेंगे किसान
प्रशिक्षण के पहले दिन किसानों को स्मार्ट बागवानी और आधुनिक फल उद्यान तैयार करने के बारे में बताया जाएगा। कृषि विशेषज्ञ मिट्टी की सेहत बनाए रखने और पौधों की जरूरत के अनुसार देखभाल करने के तरीके समझाएंगे।
किसानों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स यानी IoT तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी। इस तकनीक में सेंसर की मदद से मिट्टी की नमी और दूसरी जरूरी जानकारी जुटाई जा सकती है। इससे किसान समझ सकेंगे कि पौधों को कब पानी देने की जरूरत है।
दूसरे दिन किसानों को ड्रिप सिंचाई और फर्टिगेशन की जानकारी दी जाएगी। ड्रिप सिंचाई में पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है, जबकि फर्टिगेशन में सिंचाई के पानी के साथ खाद दी जाती है। इससे पानी और खाद का इस्तेमाल जरूरत के अनुसार करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा किसान एक ही खेत में अलग-अलग फसलें उगाने, बहुस्तरीय फल उत्पादन और पौधशाला प्रबंधन के तरीके सीखेंगे। बिना मिट्टी के पौधे तैयार करने की तकनीक के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
ड्रोन से फसलों की निगरानी करना सीखेंगे किसान
प्रशिक्षण के तीसरे दिन किसानों को ड्रोन तकनीक से परिचित कराया जाएगा। कृषि विशेषज्ञ बताएंगे कि बागवानी में ड्रोन का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है। फसलों की निगरानी और पौधों की सुरक्षा में इसकी उपयोगिता का व्यावहारिक प्रदर्शन भी होगा।
ड्रोन की मदद से बड़े खेतों और बागों की स्थिति देखने में आसानी हो सकती है। इससे किसानों को पौधों की बढ़वार और फसल की स्थिति समझने में मदद मिलती है। हालांकि, इसका फायदा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक और खेत की जरूरत पर निर्भर करता है।
इसी दिन फलदार पौधों की छंटाई और उनकी शाखाओं का सही आकार बनाए रखने के तरीके भी बताए जाएंगे। कृषि वैज्ञानिक किसानों को समझाएंगे कि फल तोड़ने के बाद उन्हें खराब होने से कैसे बचाया जाए। सही रखरखाव से फलों की गुणवत्ता लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
एक ही खेत से ज्यादा आमदनी के तरीके भी बताए जाएंगे
चौथे दिन किसानों को फल उद्यानों में अंतरवर्ती खेती की जानकारी दी जाएगी। इसके तहत मुख्य फलदार फसल के साथ दूसरी उपयुक्त फसलें उगाने के तरीकों के बारे में बताया जाएगा। इसका उद्देश्य उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करना और आमदनी के अतिरिक्त अवसर तैयार करना है।
किसानों को एकीकृत कृषि प्रणाली यानी IFS मॉडल के बारे में भी समझाया जाएगा। इसमें खेती के अलग-अलग कार्यों को जोड़कर संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है।
इस दिन किसानों को खेतों और महाविद्यालय परिसर का भ्रमण कराया जाएगा। वहां वे खेती के अलग-अलग तरीकों को करीब से देख सकेंगे और कृषि विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं पर चर्चा कर पाएंगे।
अंतिम दिन कीट प्रबंधन की जानकारी, किसानों को मिलेंगे प्रमाणपत्र
छह नवंबर को प्रशिक्षण के अंतिम दिन किसानों को फल फसलों में कीटों से बचाव और टिकाऊ बागवानी के तरीके सिखाए जाएंगे। इसके साथ ही वानिकी उत्पादन प्रणाली की जानकारी भी दी जाएगी। प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को समापन समारोह में प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।
आत्मा भागलपुर के उप परियोजना निदेशक प्रभात कुमार सिंह के मुताबिक, इस तरह के प्रशिक्षण से किसानों को आधुनिक खेती अपनाने में मदद मिलेगी। इससे फल उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने और आमदनी बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं।
प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों की जानकारी देना है, जिनका इस्तेमाल वे अपने खेतों और बागों में कर सकें। बेहतर गुणवत्ता वाले फल तैयार होने पर किसानों को बाजार में अच्छा मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है।









