अंबाला में 800 करोड़ का शहीदी स्मारक तैयार, 5 नवंबर को अमित शाह करेंगे उद्घाटन

अंबाला में 800 करोड़ रुपये से बना 1857 का शहीदी स्मारक तैयार है। अमित शाह 5 नवंबर को उद्घाटन करेंगे। जानें इतिहास और खासियतें।

हरियाणा के अंबाला में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित शहीदी स्मारक तैयार हो गया है। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्मारक का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को करेंगे। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दिखाया जाएगा।

अंबाला: हरियाणा के अंबाला छावनी में 1857 की क्रांति की यादों को संजोने के लिए तैयार शहीदी स्मारक अब आम लोगों के लिए खुलने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को इसका उद्घाटन करेंगे। अंबाला-दिल्ली हाईवे पर 22 एकड़ जमीन में बने इस स्मारक पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यहां आधुनिक तकनीक के जरिए उन सैनिकों और स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी दिखाई जाएगी, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। 

अंबाला में 800 करोड़ का शहीदी स्मारक तैयार, अमित शाह करेंगे उद्घाटन

हरियाणा के अंबाला छावनी में देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम की याद में बनाया गया भव्य शहीदी स्मारक उद्घाटन के लिए तैयार है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। इसके अगले दिन यानी 6 नवंबर से आम लोग भी स्मारक देखने जा सकेंगे। अंबाला-दिल्ली हाईवे पर करीब 22 एकड़ क्षेत्र में बने इस स्मारक की लागत लगभग 800 करोड़ रुपये बताई गई है। यहां 1857 की क्रांति से जुड़े दस्तावेज, स्वतंत्रता सेनानियों की कहानियां और उस दौर की घटनाओं को आधुनिक तकनीक की मदद से दिखाया जाएगा।

अंबाला में 800 करोड़ का शहीदी स्मारक तैयार, 5 नवंबर को अमित शाह करेंगे उद्घाटन

हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने उद्घाटन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि स्मारक का उद्देश्य आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले उन लोगों को पहचान दिलाना है, जिनकी कहानियां आम लोगों तक कम पहुंची हैं। उद्घाटन समारोह के बाद अमित शाह अंबाला छावनी के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे।

मेरठ से पहले अंबाला में दिखने लगे थे विद्रोह के संकेत

1857 के स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र होने पर आमतौर पर मेरठ और दिल्ली की घटनाएं याद आती हैं। हालांकि, अंबाला छावनी में भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ असंतोष पहले से बढ़ रहा था। ऐतिहासिक दस्तावेजों में अप्रैल 1857 के दौरान यहां हुई कई घटनाओं का उल्लेख मिलता है।

'द रिवोल्ट ऑफ 1857 इन हरियाणा' पुस्तक और पंजाब गजेटियर के विवरण के अनुसार, 22 अप्रैल को पांचवीं नेटिव इन्फैंट्री की मेस से जुड़े शिप हाउस में आग लगा दी गई थी। उसी दिन यूरोपीय इन्फैंट्री लाइंस में एक अंग्रेज अधिकारी के अस्तबल को जलाने का प्रयास भी हुआ।

इसके बाद 23 अप्रैल को नौवीं लांसर्स लाइंस में कैप्टन साउंडर्स के घर को निशाना बनाने की कोशिश की गई। 25 अप्रैल को बैंक मास्टर के घर और रेजिमेंट की संपत्ति में आग लगने की घटना दर्ज हुई। अगले दिन एक अन्य अंग्रेज अधिकारी के घर में भी आग लगाने का प्रयास हुआ।

इन घटनाओं से अंग्रेज अधिकारियों की चिंता बढ़ने लगी थी। छावनी में भारतीय सैनिकों के बीच असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं।

चर्बी वाले कारतूसों को लेकर नाराज थे भारतीय सैनिक

अंग्रेजी सेना में इस्तेमाल होने वाले नए कारतूसों को लेकर भारतीय सैनिकों के बीच नाराजगी थी। सैनिकों को आशंका थी कि इन कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। कारतूसों को इस्तेमाल करने के लिए दांतों से खोलना पड़ता था। इस वजह से हिंदू और मुस्लिम सैनिकों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होने की आशंका थी।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, पांचवीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही शाम सिंह ने अप्रैल 1857 के अंतिम दिनों में तत्कालीन अधिकारी फोरसिथ को सैनिकों की नाराजगी के बारे में बताया था। सैनिकों को डर था कि अंग्रेज अधिकारी उन्हें विवादित कारतूस इस्तेमाल करने के लिए मजबूर कर सकते हैं।

सात और आठ मई को भी अंग्रेज अधिकारियों तक छावनी में विद्रोह की तैयारियों की जानकारी पहुंची थी। इसके बाद 10 मई को भारतीय सैनिकों ने खुले तौर पर आदेशों का विरोध करना शुरू कर दिया।

पांचवीं और 60वीं भारतीय पैदल सेना के सैनिक बैरकों में पहुंचे और हथियार संभाल लिए। खजाने की सुरक्षा में तैनात जवानों ने भी अंग्रेज अधिकारियों के आदेश मानने से इनकार कर दिया। इन घटनाओं को अंबाला में 1857 के विद्रोह के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाता है।

विद्रोह दबाने के लिए अंग्रेजों ने जुटाए थे 500 ऊंट

अंबाला के इतिहास से जुड़ी एक और बात सामने आती है। जिस छावनी में भारतीय सैनिक अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे, वहीं से ब्रिटिश प्रशासन विद्रोह को दबाने के लिए संसाधन भी जुटा रहा था।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, अंग्रेजों ने सैन्य अभियान के लिए अंबाला से 500 ऊंट और 500 बैलगाड़ियों की व्यवस्था की थी। इनका इस्तेमाल सैनिकों के सामान, रसद और दूसरे जरूरी संसाधनों को पहुंचाने के लिए किया जाना था।

यह जानकारी दिखाती है कि उस समय अंबाला ब्रिटिश सेना के लिए कितना महत्वपूर्ण केंद्र था। एक तरफ भारतीय सैनिकों में विद्रोह की भावना बढ़ रही थी, तो दूसरी तरफ अंग्रेजी सेना अपने सैन्य अभियान की तैयारियों में लगी हुई थी।

स्मारक में 23 गैलरियां, 700 से ज्यादा सेनानियों के नाम

अंबाला में तैयार शहीदी स्मारक में इतिहास को केवल तस्वीरों और दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा गया है। यहां 23 आधुनिक गैलरियां बनाई गई हैं। इनमें अंबाला, मेरठ, दिल्ली, झांसी और देश के दूसरे हिस्सों में 1857 के दौरान हुई घटनाओं को दिखाया जाएगा।

स्मारक में 700 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज किए गए हैं। यहां लाइट एंड साउंड शो, डिजिटल डिस्प्ले, ओपन एयर थिएटर और अन्य आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

करीब 2,500 लोगों की क्षमता वाला ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। इसके अलावा 300 सीटों वाला ऑडिटोरियम भी तैयार किया गया है। स्मारक में आने वाले लोग अलग-अलग गैलरियों में जाकर स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास समझ सकेंगे।

हरियाणा सरकार की योजना स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों को भी यहां लाने की है, ताकि नई पीढ़ी 1857 की क्रांति और उसमें हरियाणा के योगदान के बारे में जान सके।

6 नवंबर से आम लोगों के लिए खुलेगा स्मारक

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी स्मारक के उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा की है। उन्होंने 31 अक्टूबर को शहीदी स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट शुरू की। इस वेबसाइट के जरिए लोगों को स्मारक की गैलरियों, सुविधाओं और टिकट बुकिंग से जुड़ी जानकारी मिल सकेगी।

सरकार की ओर से हरियाणा के ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर हेरिटेज टूरिज्म सर्किट विकसित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे राज्य में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

पांच नवंबर को उद्घाटन के बाद छह नवंबर से शहीदी स्मारक आम दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा। यहां आने वाले लोग 1857 के संघर्ष से जुड़ी घटनाओं को जान सकेंगे और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को करीब से समझ सकेंगे।

Leave a comment