हिमाचल के किसानों को राहत, गुजरात से पहुंची 2700 मीट्रिक टन खाद, जल्द आएगी दूसरी खेप

हिमाचल प्रदेश में गुजरात से 2700 मीट्रिक टन NPK खाद पहुंची है। इफको ने दूसरी खेप भी मांगी है। जानें खाद की नई कीमत, सब्सिडी और वितरण की पूरी जानकारी।

हिमाचल प्रदेश में गेहूं की बिजाई के बीच किसानों को एनपीके खाद मिलने लगी है। गुजरात से 2700 मीट्रिक टन खाद की खेप पहुंची है। इफको ने इतनी ही और खाद मंगाई है। हालांकि, एक बैग की कीमत 2450 रुपये हो गई है।

ऊना: हिमाचल प्रदेश में गेहूं और दूसरी फसलों की बिजाई कर रहे किसानों के लिए खाद की आपूर्ति शुरू होने से राहत मिली है। लंबे समय से एनपीके 12:32:16 खाद की सप्लाई प्रभावित थी, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ रही थी। अब गुजरात से ट्रेन के जरिए करीब 2700 मीट्रिक टन खाद पहुंचने के बाद वितरण शुरू हो गया है। इफको ने इतनी ही मात्रा में दूसरी खेप भी मांगी है, ताकि खेती के इस जरूरी समय में किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े।

गुजरात से ट्रेन में आई खाद, 700 केंद्रों तक पहुंचाई गई

हिमाचल प्रदेश में गेहूं की बिजाई का समय चल रहा है। ऐसे में किसानों को खाद की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ रही है। पिछले कुछ समय से एनपीके खाद की सप्लाई में परेशानी आने के कारण किसानों को इसकी उपलब्धता को लेकर चिंता थी। अब इफको ने गुजरात से खाद मंगाकर प्रदेश में वितरण शुरू कर दिया है।

करीब एक सप्ताह पहले एनपीके 12:32:16 खाद की 2700 मीट्रिक टन खेप प्रदेश में पहुंचाई गई थी। इसके बाद खाद को अलग-अलग जिलों के वितरण केंद्रों तक भेजा गया। इफको के अनुसार, प्रदेश में करीब 700 केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद उपलब्ध करवाई गई है। पहली खेप का अधिकांश हिस्सा वितरित किया जा चुका है।

गेहूं की बिजाई के दौरान समय पर खाद मिलना किसानों के लिए जरूरी होता है। कई किसान खेत तैयार करने के साथ ही खाद की खरीदारी करते हैं। ऐसे में आपूर्ति प्रभावित होने से खेती के काम में देरी होने की आशंका बनी रहती है।

2700 मीट्रिक टन की एक और खेप मंगाने की तैयारी

इफको ने प्रदेश में एनपीके खाद की मांग को देखते हुए दूसरी खेप मंगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए करीब 2700 मीट्रिक टन अतिरिक्त खाद की मांग भेजी गई है।

अधिकारियों के अनुसार, यह खेप दिवाली के बाद पहुंचने की उम्मीद है। अतिरिक्त खाद आने पर इसे चंडीगढ़ और होशियारपुर के रेल मार्गों से जुड़े वितरण नेटवर्क के जरिए हिमाचल के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।

इफको का प्रयास है कि किसानों को बिजाई के दौरान बार-बार खाद लेने के लिए भटकना न पड़े। हालांकि, दूसरी खेप पहुंचने की अंतिम तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। इसकी उपलब्धता आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

एनपीके खाद का बैग 550 रुपये महंगा हुआ

खाद की सप्लाई दोबारा शुरू होना किसानों के लिए राहत की बात है, लेकिन इस बार इसकी खरीदारी पर पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे।

पिछले वर्ष एनपीके खाद का एक बैग 1900 रुपये में मिल रहा था। अब इसकी कीमत बढ़कर 2450 रुपये हो गई है। यानी किसानों को प्रति बैग 550 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे।

जिन किसानों को अपनी जमीन के हिसाब से कई बैग खाद की जरूरत पड़ती है, उनके लिए यह बढ़ोतरी खेती की लागत बढ़ा सकती है। हालांकि, किसानों को पहले की तरह खाद पर सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा।

एनपीके 12:32:16 खाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व होते हैं। किसान फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार इसका इस्तेमाल करते हैं। खाद की उचित मात्रा तय करने के लिए मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेना उपयोगी होता है।

यूरिया की सप्लाई बढ़ाने पर भी काम जारी

एनपीके के साथ ही यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इफको के राज्य प्रमुख सुधीर कटियार के अनुसार, एनपीके की पहली खेप मिलने के बाद दूसरी खेप की मांग भेज दी गई है।

उन्होंने बताया कि यूरिया की मांग को देखते हुए इसकी आपूर्ति के लिए भी प्रयास किए गए हैं। हालांकि, यूरिया की नई खेप का आवंटन अभी सरकार के स्तर पर होना बाकी है। आवंटन मिलने के बाद इफको आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा।

इसलिए फिलहाल यूरिया की अतिरिक्त खेप कब पहुंचेगी, इसकी निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है।

किसानों को फार्मर आईडी बनवाने की सलाह

इफको ने खाद की आपूर्ति के साथ किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील भी की है। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में होने वाली परेशानियों से बचाना है।

जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी नहीं बनी है, उन्हें समय रहते इसे बनवाने की सलाह दी गई है। इससे सरकारी कृषि योजनाओं से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करने में आसानी हो सकती है।

फिलहाल एनपीके खाद की पहली खेप पहुंचने से प्रदेश में आपूर्ति को सहारा मिला है। अब किसानों की नजर दूसरी खेप पर है, जिससे बिजाई के दौरान खाद की उपलब्धता और बेहतर होने की उम्मीद है।

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